मीथेन उत्सर्जन | 16 Dec 2025
चर्चा में क्यों?
मीथेन, जो घरेलू और औद्योगिक उपयोगों के लिये एक महत्त्वपूर्ण ईंधन है, जब बिना नियंत्रण के लैंडफिल से उत्सर्जित होती है तो यह भारत के जलवायु लक्ष्यों और शहरी पारिस्थितिक स्वास्थ्य के लिये एक बड़ा पर्यावरणीय खतरा बन जाती है।
सारांश
- उपग्रह आँकड़ों से पता चलता है कि भारत के लैंडफिल से निकलने वाला मीथेन उत्सर्जन अनुमान से कहीं अधिक है, जिससे CO₂ की तुलना में 20 वर्षों में 84 गुना अधिक शक्तिशाली इस गैस के संबंध में एक बड़ा सूचना-अंतर उजागर होता है।
- उपग्रह निगरानी, स्थल-स्तरीय सत्यापन और एकीकृत नीतियाँ मीथेन हॉटस्पॉट की सटीक पहचान में सक्षम बनाती हैं, जिससे प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन, जलवायु कार्रवाई तथा ऊर्जा पुनर्प्राप्ति पहलों को समर्थन मिलता है।
मीथेन क्या है?
- परिचय: मीथेन एक रासायनिक यौगिक है, जिसका आणविक सूत्र CH₄ है। इसमें एक कार्बन परमाणु चार हाइड्रोजन परमाणुओं से जुड़ा होता है। यह सबसे सरल एल्केन है और प्राकृतिक गैस का प्रमुख घटक है।
- भौतिक गुण: यह गंधहीन, रंगहीन, स्वादहीन तथा वायु से हल्की गैस है। पूर्ण दहन की अवस्था में ऑक्सीजन की उपस्थिति में यह नीली ज्वाला के साथ जलती है और कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) तथा जल (H₂O) का निर्माण करती है।
- उपयोग: प्राकृतिक गैस का मुख्य घटक होने के कारण (आमतौर पर 80–95%), मीथेन का उपयोग हीटिंग, विद्युत उत्पादन और खाना पकाने के लिये एक प्रमुख ऊर्जा स्रोत के रूप में किया जाता है।
- इसके अतिरिक्त, इसका उपयोग रासायनिक संश्लेषण में हाइड्रोजन, अमोनिया, मेथनॉल तथा अन्य रसायनों के उत्पादन में भी किया जाता है।
- उत्सर्जन: भारत, चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका के बाद विश्व का तीसरा सबसे बड़ा मीथेन उत्सर्जक है, जो प्रतिवर्ष लगभग 31 मिलियन टन मीथेन उत्सर्जित करता है (वैश्विक उत्सर्जन का लगभग 9%)।
- UNFCCC को प्रस्तुत भारत की तीसरी द्विवार्षिक अद्यतन रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2016 में (भूमि उपयोग, भूमि उपयोग परिवर्तन और वानिकी—LULUCF को छोड़कर) भारत का मीथेन उत्सर्जन 409 मिलियन टन CO₂e था।
- मीथेन के प्रमुख स्रोत:
- प्राकृतिक स्रोत: आर्द्रभूमियाँ, जहाँ कार्बनिक पदार्थों का अवायवीय अपघटन होता है।
- कृषि गतिविधियाँ: जलमग्न धान के खेत, जहाँ अवायवीय परिस्थितियाँ बनती हैं तथा पशुओं में एंटेरिक किण्वन, विशेष रूप से मवेशियों से।
- दहन एवं औद्योगिक प्रक्रियाएँ: जीवाश्म ईंधनों का निष्कर्षण, परिवहन और दहन।
- जैव-ईंधन दहन (जैसे लकड़ी, फसल अवशेष)।
- लैंडफिल और अपशिष्ट जल उपचार (कार्बनिक अपशिष्ट का अवायवीय अपघटन): भारत के कुल मीथेन उत्सर्जन का लगभग 15% अपशिष्ट क्षेत्र से उत्पन्न होता है।
- उर्वरक उत्पादन एवं अन्य औद्योगिक गतिविधियाँ।
- ग्लोबल वार्मिंग पोटेंशियल (GWP): यह एक प्रबल ग्रीनहाउस गैस (GHG) है, जो अवरक्त विकिरण को अवशोषित करती है और ग्रीनहाउस प्रभाव में योगदान करती है।
- 20 वर्ष की अवधि में मीथेन CO₂ की तुलना में लगभग 84 गुना अधिक प्रभावी रूप से ऊष्मा को रोकती है और 100 वर्ष की अवधि में, यह लगभग 28–34 गुना अधिक शक्तिशाली होती है।
- मीथेन को कम करने की पहलें:
- भारत की पहलें: हरित धारा, BS-VI उत्सर्जन मानक, राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (NAPCC)।
- वैश्विक पहलें:
- उपग्रह निगरानी: कार्बनमैपर के टैनेजर जैसे अभियान मीथेन हॉटस्पॉट्स का उच्च सटीकता के साथ पता लगाने में सहायता करते हैं। उदाहरण: दिल्ली में गाज़ीपुर और ओखला।
- ग्लोबल मीथेन प्लेज (GMP): UNFCCC के COP26 (ग्लासगो, 2021) में शुरू किया गया, GMP का लक्ष्य वर्ष 2030 तक मीथेन उत्सर्जन में वर्ष 2020 के स्तर से न्यूनतम 30% की कमी करना है। भारत GMP में शामिल नहीं हुआ है।
- ग्लोबल मीथेन ट्रैकर: अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी का ग्लोबल मीथेन ट्रैकर ऊर्जा क्षेत्र से मीथेन उत्सर्जन को कम करने के लिये एक प्रमुख उपकरण है।
- UNEP पहलें: संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP), अंतर्राष्ट्रीय मीथेन उत्सर्जन वेधशाला (IMEO) और तेल एवं गैस मीथेन साझेदारी जैसी पहलों का नेतृत्व करता है, जिनका उद्देश्य कृषि जैसे प्रमुख क्षेत्रों से मीथेन उत्सर्जन की निगरानी और उसे कम करना है।
- मीथेन चक्र: यह वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा मीथेन (CH₄) का उत्पादन, उत्सर्जन और पर्यावरण से निष्कासन होता है।
- अवायवीय परिस्थितियों में सूक्ष्मजीवों द्वारा उत्पादित (आर्द्रभूमियाँ, धान के खेत, रोमंथी पशु, लैंडफिल)।
- प्राकृतिक और मानवीय गतिविधियों के माध्यम से वायुमंडल में उत्सर्जित।
- मृदा और वायुमंडल में ऑक्सीकरण द्वारा निष्कासित (मुख्यतः OH रेडिकल्स द्वारा)।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. मीथेन को कार्बन डाइऑक्साइड से अधिक खतरनाक क्यों माना जाता है?
मीथेन का ग्लोबल वार्मिंग पोटेंशियल (GWP) 20 वर्षों में CO₂ की तुलना में 84 गुना है, जिससे यह निकट‑अवधि के जलवायु परिवर्तन का एक प्रमुख कारण बनता है।
2. भारत के मीथेन उत्सर्जन में अपशिष्ट क्षेत्र का कितना हिस्सा है?
भारत में लगभग 15% मीथेन उत्सर्जन लैंडफिल और अपशिष्ट जल उपचार से उत्पन्न होता है, जो जैविक अपशिष्ट के एनारोबिक विघटन के कारण होता है।
3. ग्लोबल मीथेन प्लेज क्या है?
COP26 में लॉन्च किया गया यह अभियान 2030 तक वैश्विक मीथेन उत्सर्जन में 30% कमी लाने का लक्ष्य रखता है। भारत ने इस प्रतिज्ञा में अभी तक सदस्यता नहीं ली है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQs)
प्रश्न. ‘मीथेन हाइड्रेट’ के निक्षेपों के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं? (2019)
- भूमंडलीय तापन के कारण इन निक्षेपों से मीथेन गैस का निर्मुक्त होना प्रेरित हो सकता है।
- मीथेन हाइड्रेट के विशाल निक्षेप उत्तरी ध्रुवीय टुंड्रा में तथा समुद्र अधस्तल के नीचे पाए जाते हैं।
- वायुमंडल के अंदर मीथेन एक या दो दशक के बाद कार्बन डाइऑक्साइड में ऑक्सीकृत हो जाती है।
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (d)
प्रश्न. चावल की व्यापक खेती के कारण कुछ क्षेत्र ग्लोबल वार्मिंग में योगदान दे सकते हैं। इसके संभावित कारण क्या है/हैं? (2010)
1. चावल की खेती से जुड़ी अवायवीय स्थितियाँ मीथेन के उत्सर्जन का कारण बनती हैं।
2. जब नाइट्रोजन आधारित उर्वरकों का उपयोग किया जाता है तो उर्वरित मिट्टी से नाइट्रस ऑक्साइड उत्सर्जित होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: (c)
मेन्स
प्रश्न. ग्लोबल वार्मिंग (वैश्विक तापन) की चर्चा कीजिये और वैश्विक जलवायु पर इसके प्रभावों का उल्लेख कीजिये। क्योटो प्रोटोकॉल, 1997 के आलोक में ग्लोबल वार्मिंग का कारण बनने वाली ग्रीनहाउस गैसों के स्तर को कम करने के लिये नियंत्रण उपायों को समझाइये। (2022)
प्रश्न. 'जलवायु परिवर्तन' एक वैश्विक समस्या है। जलवायु परिवर्तन से भारत कैसे प्रभावित होगा? भारत के हिमालयी और तटीय राज्य जलवायु परिवर्तन से कैसे प्रभावित होंगे? (2017)

