लंबी दूरी की एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल (LR-AShM) | 28 Jan 2026

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस 

77वीं गणतंत्र दिवस परेड में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने पहली बार लंबी दूरी की एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल (Long Range Anti-Ship Hypersonic Missile- LR-AShM) का प्रदर्शन किया, जो भारत की मिसाइल क्षमताओं में एक महत्त्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होता है।

LR-AShM

  • परिचय: LR-AShM (लंबी दूरी की एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल) एक हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल है जो अर्द्ध-बैलिस्टिक (Quasi-ballistic) पथ का पालन करती है, जिसमें बैलिस्टिक लॉन्च को कम ऊँचाई पर चलने वाली, दिशा-संवेदनशील उड़ान के साथ जोड़ा गया है।
  • गति और उड़ान प्रोफाइल: यह मिसाइल प्रारंभ में मैक 10 (Mach 10) की गति तक पहुँचती है और औसतन मैक 5 (Mach 5) की गति बनाए रखती है। यह कई वायुमंडलीय ‘स्किप’ प्रदर्शन करती है, जिससे इसकी दूरी और अप्रत्याशितता बढ़ती है।
  • दायरा और लक्ष्य: मिसाइल स्थिर तथा गतिशील, दोनों प्रकार के लक्ष्यों पर सटीक हमला करने में सक्षम है और इसकी प्रारंभिक सीमा लगभग 1,500 किमी. है, जबकि भविष्य में इसके संस्करण 3,500 किमी. तक की दूरी के लिये विकसित किये जाने की योजना है।
  • स्टील्थ और जीवित रहने की क्षमता: अत्यधिक गति और दिशा-संवेदनशीलता के साथ कम ऊँचाई पर उड़ान भरने के कारण, यह मिसाइल दुश्मन के ज़मीन और जहाज़ आधारित राडार द्वारा पहचान या रोकथाम को कठिन बना देती है।
  • प्रोपल्शन सिस्टम: मिसाइल दो-स्टेज सॉलिड रॉकेट मोटर का उपयोग करती है- स्टेज-1 बर्नआउट के बाद अलग हो जाता है, जबकि स्टेज-2 मिसाइल को अतिरिक्त गति देता है, जिसके बाद यह बिना शक्ति वाले हाइपरसोनिक ग्लाइड चरण में प्रवेश करती है।
  • वायुगतिकीय दक्षता: उच्च वायुगतिकीय दक्षता के कारण मिसाइल ड्रैग को कम करते हुए लिफ्ट और नियंत्रण बनाए रखती है, जिससे गति, दायरा एवं सटीकता अधिक होती है तथा ऊर्जा का उपयोग इष्टतम रहता है।
  • उद्देश्य और रणनीतिक भूमिका: यह भारतीय नौसेना की तटीय सुरक्षा आवश्यकताओं के लिये  डिज़ाइन की गई है और एक शक्तिशाली सी-डिनायल हथियार के रूप में कार्य करती है, जो सभी वर्ग के युद्धपोतों को निष्क्रिय करने में सक्षम है, विशेषकर रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण भारतीय महासागर क्षेत्र (IOR) में।
  • भविष्य का विकास और सेवा में समावेश: LR-AShM के संस्करण सेना, वायुसेना और जहाज़ से प्रक्षेपित नौसैनिक उपयोग के लिये विकसित किये जा रहे हैं। नवंबर 2024 में सफल परीक्षण के बाद, वारहेड और सेंसर एकीकरण चल रहा है और इसे अगले 2-3 वर्षों में सेवा में शामिल किये जाने की आशा है।

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