काकोरी ट्रेन एक्शन | 30 Mar 2026
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने काकोरी ट्रेन एक्शन (1925) के वीर नायकों– रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान और रोशन सिंह की प्रतिमाओं को सड़क सौंदर्यीकरण परियोजना के दौरान हटाए/ध्वस्त किये जाने के बाद सख्त दंडात्मक कार्रवाई के आदेश दिये।
काकोरी ट्रेन एक्शन, 1925
- परिचय: काकोरी ट्रेन एक्शन (1925) भारत के स्वतंत्रता संग्राम को वित्तपोषित करने के उद्देश्य से हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) के सदस्यों द्वारा किया गया एक ऐतिहासिक क्रांतिकारी कार्य था।
- इसने ब्रिटिश औपनिवेशिक सत्ता को चुनौती दी और राष्ट्रीय आंदोलन के भीतर संगठित सशस्त्र प्रतिरोध की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण परिवर्तन को चिह्नित किया।
- प्रतिरोध की उत्पत्ति: असहयोग आंदोलन, 1922 की वापसी और जलियाँवाला बाग हत्याकांड, 1919 के बाद निराश हुए युवा राष्ट्रवादियों ने क्रांतिकारी मार्ग अपनाने का निर्णय लिया। उन्होंने सशस्त्र संघर्ष के माध्यम से भारत की स्वतंत्रता प्राप्त करने के उद्देश्य से वर्ष 1924 में कानपुर में हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) की स्थापना की।
- मिशन का कार्यान्वयन: नेताओं, जिनमें रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान, चंद्रशेखर आज़ाद और राजेंद्र लाहिड़ी शामिल थे, ने काकोरी स्टेशन के पास शाहजहाँपुर से लखनऊ की ओर जा रही 8-डाउन ट्रेन को रोका ताकि वे राज्य खज़ाने को लूटकर अपने संघर्ष को वित्तपोषित कर सकें।
- काकोरी ट्रेन के एक्शन में भाग लेने वाले अन्य प्रमुख क्रांतिकारियों में शचींद्रनाथ बख्शी, मुकुंदी लाल, बनवारी लाल और मन्मथनाथ गुप्ता शामिल थे।
- न्यायिक दमन: काकोरी ट्रेन एक्शन (1925) के बाद लगभग 18 महीनों तक मुकदमा चला; इसके परिणामस्वरूप रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान, राजेंद्र लाहिड़ी और ठाकुर रोशन सिंह को दिसंबर 1927 में फाँसी दी गई। चंद्रशेखर आज़ाद पुलिस की गिरफ्तारी से बचने में सफल रहे।
- वैचारिक विरासत: यह घटना हिंदू-मुस्लिम एकता का एक महत्त्वपूर्ण प्रतीक है (जिसका उदाहरण बिस्मिल और खान हैं) और इसने भगत सिंह के नेतृत्व में हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) के पुनर्गठन के लिये मार्ग प्रशस्त किया।
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