इसरो का सबसे भारी प्रक्षेपण: ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 | 26 Dec 2025

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

चर्चा में क्यों?

इसरो ने अमेरिकी कंपनी AST स्पेसमोबाइल द्वारा निर्मित अपने अब तक के सबसे भारी उपग्रह ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 (6,100 किलोग्राम) का प्रक्षेपण लॉन्च व्हीकल मार्क-3 (LVM-3) रॉकेट के माध्यम से कर एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की, जिससे भारत की मज़बूत हेवी-लिफ्ट प्रक्षेपण क्षमता का प्रदर्शन हुआ।

सारांश

  • 6,100 किलोग्राम वज़न वाला ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 इसरो द्वारा प्रक्षेपित अब तक का सबसे भारी पेलोड है, जिसे प्रत्यक्ष मोबाइल 4G/5G कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लो अर्थ ऑर्बिट (LEO: 160–2,000 कि.मी.) में स्थापित किया गया है।
  • C32 क्रायोजेनिक चरण, अर्द्ध-क्रायोजेनिक इंजनों तथा बूटस्ट्रैप री-इग्निशन जैसी LVM-3 में की गई उन्नतियाँ इसकी पेलोड वहन क्षमता को और अधिक सुदृढ़ बनाती हैं।

ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 क्या है?

  • परिचय: ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 इसरो द्वारा कक्षा में स्थापित किया गया अब तक का सबसे भारी पेलोड है, जिसने 5,700 किलोग्राम (वनवेब उपग्रह) के पूर्व रिकॉर्ड को पार कर लिया है।
  • उद्देश्य: यह उपग्रह प्रत्यक्ष मोबाइल कनेक्टिविटी प्रदान करेगा, जिससे विशेष ग्राउंड स्टेशनों की आवश्यकता के बिना सीधे मोबाइल फोनों पर 4G और 5G सेवाएँ उपलब्ध हो सकेंगी।
  • वाणिज्यिक महत्त्व: यह LVM-3 के माध्यम से इसरो का तीसरा वाणिज्यिक मिशन है, इससे पूर्व वर्ष 2022 और 2023 में दो वनवेब उपग्रह प्रक्षेपण किये गए थे।
    • स्पेसएक्स के फाल्कन-9 तथा यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के एरियान-6 जैसे वैश्विक विकल्पों की उपस्थिति के बावजूद, LVM-3 कम लागत पर हेवी-लिफ्ट प्रक्षेपण में इसरो की क्षमता को सुदृढ़ रूप से रेखांकित करता है।

लो अर्थ ऑर्बिट (LEO)

  • परिचय: LEO पृथ्वी की सतह से लगभग 160 से 2,000 किमी की ऊँचाई तक फैली होती है, जहाँ उपग्रह लगभग हर 90-120 मिनट में एक परिक्रमा पूरी करते हैं।
  • LEO में उपग्रह: इस कक्षा में संचार, पृथ्वी अवलोकन, वैज्ञानिक मिशनों और नेविगेशन हेतु प्रयुक्त उपग्रह स्थित होते हैं।
  • कक्षा के प्रकार: जहाँ अधिकांश LEO उपग्रह वृत्ताकार कक्षाओं का अनुसरण करते हैं, वहीं कुछ उपग्रह दीर्घवृत्ताकार कक्षाओं में भी संचालित होते हैं।
  • विशेष दीर्घवृत्ताकार कक्षाएँ: मोल्निया और टुंड्रा कक्षाएँ उच्च अक्षांशीय क्षेत्रों के ऊपर अधिक समय तक उपस्थिति प्रदान करती हैं तथा उन क्षेत्रों में संचार एवं अवलोकन के लिये उपयोग की जाती हैं, जहाँ भू-स्थिर कक्षा की कवरेज सीमित होती है।

LVM3 प्रक्षेपण यान क्या है?

  • परिचय: LVM3 इसरो का सबसे बड़ा और सबसे शक्तिशाली हेवी-लिफ्ट प्रक्षेपण यान है, जिसमें तीन चरण होते हैं। यह रॉकेट भू-समकालिक स्थानांतरण कक्षा (GTO) में लगभग 4,000 किलोग्राम तक तथा LEO में लगभग 8,000 किलोग्राम तक का पेलोड ले जाने में सक्षम है।
    • इसे पहले जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल मार्क–III (GSLV Mk III) के नाम से जाना जाता था और इसका पहला प्रक्षेपण दिसंबर 2014 में हुआ था।
  • तीन चरण: 
    • प्रथम चरण: इसमें दो बड़े S200 ठोस रॉकेट बूस्टर उपयोग किये जाते हैं, जो ठोस प्रणोदक HTPB (हाइड्रॉक्सिल-टर्मिनेटेड पॉलीब्यूटाडाइन) से संचालित होते हैं।
    • द्वितीय चरण (कोर): यह द्रव ईंधन से संचालित चरण है, जिसमें दो विकास इंजन लगे होते हैं। इसमें UDMH (अनसिमेट्रिकल डाइमेथाइलहाइड्राज़ीन) और नाइट्रोजन टेट्रॉक्साइड का दहन किया जाता है।
    • तृतीय चरण (ऊपरी): इसमें C25 क्रायोजेनिक चरण का उपयोग होता है, जो CE20 इंजन से सुसज्जित है और द्रव हाइड्रोजन तथा द्रव ऑक्सीजन का दहन करता है।
  • उच्च दक्षता हेतु इंजन अनुकूलन:
    • क्रायोजेनिक चरण उन्नयन: इसरो अधिक थ्रस्ट और ईंधन क्षमता के लिये C32 क्रायोजेनिक चरण का विकास कर रहा है।
    • सेमी-क्रायोजेनिक इंजन विकास: इसरो केरोसीन और द्रव ऑक्सीजन का उपयोग करने वाले सेमी-क्रायोजेनिक इंजनों का विकास कर रहा है, जिससे LEO में पेलोड क्षमता 8,000 किलोग्राम से बढ़कर 10,000 किलोग्राम हो जाएगी।
    • बूटस्ट्रैप रीइग्निशन प्रौद्योगिकी: इसरो क्रायोजेनिक इंजनों के लिये बूटस्ट्रैप रीइग्निशन क्षमता विकसित कर रहा है, जिससे ऊपरी चरण को हीलियम जैसी बाह्य गैसों के बिना पुनः प्रज्वलित किया जा सकेगा। इससे ईंधन का भार कम होगा और बहु-कक्षा (मल्टी-ऑर्बिट) मिशनों के लिये पेलोड क्षमता में वृद्धि होगी।
  • भविष्य के मिशनों में भूमिका: मानव-सुरक्षा संबंधी अतिरिक्त पुनरावृत्त व्यवस्थाओं (Human-Safety Redundancies) के साथ संशोधित LVM-3 गगनयान मिशनों को समर्थन देगा और आगे चलकर भारत के प्रस्तावित अंतरिक्ष स्टेशन भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिये मॉड्यूलों का प्रक्षेपण भी करेगा। 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 (BlueBird Block-2) क्या है?
ब्लूबर्ड ब्लॉक-2, AST SpaceMobile द्वारा विकसित 6,100 किलोग्राम वजनी एक वाणिज्यिक उपग्रह है, जो निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO: 160 किमी से 2,000 किमी.) में रहते हुए सीधे मोबाइल उपकरणों को 4G/5G कनेक्टिविटी प्रदान करता है।

2. लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) का क्या महत्त्व है?
लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में संचार, पृथ्वी अवलोकन और नौवहन (नेविगेशन) उपग्रह संचालित होते हैं, जो कम विलंबता (Low Latency) के साथ वैश्विक कनेक्टिविटी सुनिश्चित करते हैं।

3. LVM-3 रॉकेट के चरण क्या हैं?
LVM-3 के तीन चरण होते हैं: S200 ठोस ईंधन बूस्टर, L110 द्रव-ईंधन कोर चरण और C25 क्रायोजेनिक ऊपरी चरण, जो भारी पेलोड (heavy-lift) मिशनों के लिये अनुकूलित हैं।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)

प्रश्न. भारत के उपग्रह प्रमोचित करने वाले वाहनों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2018)

  1. PSLV से वे उपग्रह प्रमोचित किये जाते हैं जो पृथ्वी संसाधनों के मॉनिटरन उपयोगी हैं जबकि GSLV को मुख्यतः संचार उपग्रहों को प्रमोचित करने के लिये अभिकल्पित किया गया है।
  2.   PSLV द्वारा प्रमोचित उपग्रह आकाश में एक ही स्थिति में स्थायी रूप से स्थिर रहते प्रतीत होते हैं जैसा कि पृथ्वी के एक विशिष्ट स्थान से देखा जाता है।
  3.   GSLV Mk III, एक चार स्टेज वाला प्रमोचन वाहन है, जिसमें प्रथम और तृतीय चरणों में ठोस रॉकेट मोटरों का तथा द्वितीय एवं चतुर्थ चरणों में द्रव रॉकेट इंजनों का प्रयोग होता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1
(b) 2 और 3
(c) 1 और 2
(d) केवल 3

उत्तर: (a)


प्रश्न. निम्नलिखित में से किन कार्यकलापों में भारतीय दूर संवेदन (IRS) उपग्रहों का प्रयोग किया जाता है?

1. फसल की उपज का आकलन

2. भौम जल (ग्राउंडवॉटर) संसाधनों का स्थान-निर्धारण

3. खनिज का अन्वेषण

4. दूरसंचार

5. यातायात अध्ययन

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये।

(a) केवल 1, 2 और 3

(b) केवल 4 और 5

(c) केवल 1 और 2

(d) 1, 2, 3, 4 और 5

उत्तर: (a)