भारत ने SSBN INS अरिदमन पनडुब्बी को नौसेना में शामिल किया | 04 Apr 2026
भारत ने अपनी तीसरी परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी INS अरिदमन को शामिल किया, जो एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है, क्योंकि अब देश पहली बार समुद्र में 3 परिचालन SSBN बनाए रख सकेगा।
- साथ ही, भारत ने हाल ही में स्टील्थ फ्रिगेट INS तारागिरि को भी कमीशन किया है, जिससे हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में देश के हितों की सुरक्षा करने की भारतीय नौसेना की क्षमता और सुदृढ़ होगी।
INS अरिदमन
- परिचय: INS अरिदमन भारत की तीसरी परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) है, जो अरिहंत-श्रेणी की है और INS अरिहंत (2016) तथा INS अरिघाट (2024) के बाद शामिल की गई है। इसे एडवांस्ड टेक्नोलॉजी वेसल (ATV) प्रोजेक्ट के तहत विकसित किया गया है।
- INS अरिहंत: वर्ष 2016 में शामिल की गई 6,000-टन INS अरिहंत ने भारत के परमाणु त्रय (Nuclear Triad) का समुद्री पक्ष स्थापित किया और वर्ष 2018 में अपनी पहली निरोधक गश्त (Deterrence Patrol) पूरी की।
- INS अरिघाट: INS अरिहंत की सफलता पर आधारित, दूसरी SSBN, INS अरिघाट, वर्ष 2024 में शामिल की गई, जिससे भारत की गहरे जल क्षेत्रों में निरंतर उपस्थिति और सुदृढ़ हुई।
- वर्द्धित मिसाइल क्षमता: 7,000-टन INS अरिदमन में 8 वर्टिकल लॉन्चिंग सिस्टम (VLS) ट्यूबें हैं, जो इसे K-15 (700 किमी. सीमा) और K-4 (3,500 किमी. सीमा) सबमरीन-लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल्स (SLBM) का बड़ा पेलोड ले जाने में सक्षम बनाती हैं।
- परमाणु त्रय और द्वितीय प्रहार क्षमता: INS अरिदमन के शामिल होने से भारत का परमाणु त्रय सुदृढ़ हुआ- भूमि से (अग्नि मिसाइल), वायु से (राफेल, Su-30MKI) और समुद्र से परमाणु हथियार लॉन्च करने की क्षमता, जो ‘नो फर्स्ट यूज़’ परमाणु सिद्धांत के अनुरूप विश्वसनीय द्वितीय प्रहार क्षमता सुनिश्चित करता है।
- संचालन संबंधी उपलब्धि: इस कमीशन के साथ भारत उन चयनित देशों, जैसे– अमेरिका, रूस, यूनाइटेड किंगडम, फ्राँस और चीन में शामिल हो गया है, जो समुद्र के भीतर परमाणु निरोधक क्षमता संचालित करने में सक्षम हैं।
- भविष्य की रणनीतिक रूपरेखा: भारत वर्तमान में चौथी SSBN (कोडनाम S-4*, संभवतः वर्ष 2027 में सेवा में प्रवेश) का निर्माण कर रहा है और परमाणु-संचालित अटैक सबमरीन (SSN) कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहा है, साथ ही प्रोजेक्ट-75I के तहत एडवांस्ड कॉन्शनल सबमरीन विकसित की जा रही हैं, जो AIP (एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन) तकनीक से सुसज्जित होंगी।
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