विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 | 25 Mar 2026
चर्चा में क्यों?
केंद्र सरकार विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 प्रस्तुत करने जा रही है, जिसका उद्देश्य विदेशी निधियों से निर्मित परिसंपत्तियों के प्रबंधन में कानूनी कमियों को दूर करना तथा NGO के पदाधिकारियों की जवाबदेही को सुदृढ़ करना है।
प्रस्तावित विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 से संबंधित प्रमुख तथ्य क्या हैं?
- परिसंपत्तियों हेतु नामित प्राधिकरण: एक प्रमुख प्रस्तावित परिवर्तन के तहत सरकार को यह अधिकार दिया जाएगा कि वह एक ‘नामित प्राधिकरण’ निर्धारित करे, जो उन गैर-सरकारी संगठनों (NGO) की विदेशी निधियों से निर्मित परिसंपत्तियों को अपने अधीन लेकर उनका प्रबंधन या निपटान कर सके, जिनका FCRA पंजीकरण निलंबित, रद्द या नवीनीकृत नहीं हुआ है। यह प्रावधान पहले से मौजूद एक कानूनी अंतराल को दूर करने के उद्देश्य से लाया गया है।
- इसके बाद इन परिसंपत्तियों को हस्तांतरित या बेचा जा सकेगा और प्राप्त आय को भारत के संघीय कोष में जमा किया जाएगा।
- ‘प्रमुख पदाधिकारी’ की विस्तारित परिभाषा: अब इस परिभाषा में निदेशक, भागीदार, ट्रस्टी, हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) का कर्त्ता, सोसाइटी/ट्रस्ट/ट्रेड यूनियन के पदाधिकारी तथा प्रबंधन पर नियंत्रण रखने वाला कोई भी व्यक्ति शामिल किया गया है। इससे वे व्यक्तिगत रूप से अपराधों के लिये उत्तरदायी होंगे, जब तक वे यह प्रमाणित न कर दें कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी अथवा उन्होंने आवश्यक सावधानी बरती थी।
- जाँच के लिये पूर्व अनुमोदन: यह विधेयक यह अनिवार्य करता है कि किसी भी कानून प्रवर्तन एजेंसी या राज्य सरकार को FCRA से संबंधित शिकायतों की जाँच शुरू करने से पहले केंद्रीय सरकार से पूर्व अनुमोदन लेना आवश्यक होगा।
- निर्धारित समय-सीमा एवं स्वतः समाप्ति: यह पूर्व अनुमोदन के तहत विदेशी फंड की प्राप्ति तथा उपयोग के लिये निश्चित समय-सीमा प्रस्तावित करता है, अवधि समाप्त होने या नवीनीकरण न होने पर पंजीकरण की स्वतः समाप्ति (Automatic Lapse) एवं निलंबन के दौरान संपत्ति के संचालन पर स्पष्ट नियम प्रदान करता है।
- कैद अवधि में कमी: यह विधेयक FCRA अपराधों के लिये अधिकतम कैद अवधि को 5 वर्ष से घटाकर 1 वर्ष करने का प्रस्ताव करता है, साथ ही दंड को भी तर्कसंगत बनाया गया है।
विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम, 2010 क्या है?
- परिचय: यह एक केंद्रीय कानून है जिसे भारत सरकार द्वारा लागू किया गया है, जिसका उद्देश्य व्यक्तियों, संघों और NGO द्वारा प्राप्त विदेशी योगदान और विदेशी आतिथ्य की स्वीकृति, उपयोग तथा लेखांकन को विनियमित करना है।
- यह अधिनियम मूल रूप से वर्ष 2010 में पारित किया गया और वर्ष 2011 में लागू हुआ तथा वर्ष 2016, 2018 तथा 2020 में संशोधित किया गया। इसका प्रशासन गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा किया जाता है।
- लगभग 16,000 संघ FCRA के तहत पंजीकृत हैं, जो प्रतिवर्ष लगभग 22,000 करोड़ रुपये प्राप्त करते हैं।
- उद्देश्य: यह सुनिश्चित करना कि विदेशी फंड का उपयोग भारत के राष्ट्रीय हित, संप्रभुता या सार्वजनिक व्यवस्था के लिये हानिकारक गतिविधियों के लिये न किया जाए।
- विदेशी फंड का दुरुपयोग देशविरोधी, राजनीतिक या धार्मिक परिवर्तन से जुड़ी गतिविधियों के लिए होने से रोकना।
- मुख्य प्रावधान और विशेषताएँ:
- पंजीकरण: किसी भी व्यक्ति या संगठन को केंद्र सरकार से पूर्व पंजीकरण या विशिष्ट पूर्व अनुमति के बिना विदेशी योगदान स्वीकार करना वर्जित है।
- पंजीकरण के लिये पात्रता: किसी संगठन को निम्नलिखित शर्तें पूरी करनी होंगी:
- सोसाइटीज़ रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1860, भारतीय ट्रस्ट अधिनियम, 1882 या कंपनी अधिनियम, 1956 की धारा 25 के तहत पंजीकृत होना अनिवार्य है।
- कम-से-कम 3 वर्षों की संबंधित गतिविधियों का प्रमाणित रिकॉर्ड होना आवश्यक है।
- न्यूनतम व्यय सीमा पूरी करनी होगी (वर्तमान में इसे पिछले 3 वर्षों में 15 लाख रुपये तक बढ़ाया गया है)।
- निर्दिष्ट FCRA खाता: समस्त विदेशी योगदान केवल नई दिल्ली के स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (मुख्य शाखा) में खोले गए एक निर्दिष्ट बैंक खाते में प्राप्त किये जाने चाहिये।
- उपयोग पर प्रतिबंध: विदेशी निधि को किसी अन्य व्यक्ति या संगठन को हस्तांतरित (उप-अनुदान) नहीं किया जा सकता है जब तक कि उनके पास भी वैध FCRA पंजीकरण न हो।
- पंजीकरण की वैधता:पंजीकरण की वैधता पाँच वर्ष की निर्धारित अवधि के लिये प्रभावी होती है। निरंतरता सुनिश्चित करने हेतु, इसकी समाप्ति से कम-से-कम छह माह पूर्व नवीनीकरण (Renewal) का आवेदन प्रस्तुत करना अनिवार्य है।
- निषिद्ध गतिविधियाँ: आवेदकों को काल्पनिक संस्थाओं का प्रतिनिधित्व नहीं करना चाहिये और उनका सांप्रदायिक तनाव, असामंजस्य या राजद्रोही गतिविधियों का कोई इतिहास नहीं होना चाहिये। इसके अतिरिक्त, FCRA चुनाव के लिये उम्मीदवारों, पत्रकारों, मीडियाकर्मियों, न्यायाधीशों, सरकारी कर्मचारियों, राजनेताओं और राजनीतिक संगठनों के लिये विदेशी वित्तपोषण को प्रतिबंधित करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. वर्ष 2026 के विधेयक में प्रस्तावित 'नामित प्राधिकारी' कौन है?
यह केंद्र द्वारा नियुक्त एक अधिकारी है, जो उन NGO की विदेशी निधियों से बनाई गई संपत्तियों का प्रबंधन या निपटान करता है जिनके लाइसेंस रद्द या निलंबित कर दिये गए हैं।
2. नए संशोधन में 'स्वतः समाप्ति' खंड क्या है?
यह अनिवार्य करता है कि यदि नवीनीकरण आवेदन सफलतापूर्वक संसाधित नहीं होता है, तो एक FCRA पंजीकरण प्रमाणपत्र अपनी समाप्ति तिथि पर तुरंत अपनी कानूनी वैधता खो देगा।
3. FCRA के तहत प्रशासनिक व्यय की वर्तमान सीमा क्या है?
NGO एक वित्तीय वर्ष में प्राप्त विदेशी योगदान का अधिकतम 20% प्रशासनिक लागतों पर खर्च करने के लिये प्रतिबंधित हैं।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न
मेन्स
प्रश्न. क्या नागरिक समाज और गैर-सरकारी संगठन आम नागरिक को लाभ प्रदान करने के लिये लोक सेवा प्रदायगी का वैकल्पिक प्रतिमान प्रस्तुत कर सकते हैं? इस वैकल्पिक प्रतिमान की चुनौतियों की विवेचना कीजिये। (2021)