चीन का सेनलिंग काउंटी और भारत की आपत्ति | 13 Apr 2026

स्रोत: द हिंदू 

भारत ने अपने क्षेत्र, विशेषकर अरुणाचल प्रदेश के कुछ स्थानों को "काल्पनिक नाम" देने के चीन के प्रयासों को दृढ़तापूर्वक अस्वीकार कर दिया है, यह कहते हुए कि ऐसे कृत्य निराधार और अस्वीकार्य हैं।

  • विदेश मंत्रालय ने पुनः पुष्टि की कि ये क्षेत्र सदैव भारत का अभिन्न अंग बने रहेंगे, साथ ही यह भी कहा कि ऐसे कृत्य द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर और सामान्य बनाने के प्रयासों को कमज़ोर करते हैं।
  • पृष्ठभूमि: चीन ने हाल ही में शिनजियांग में "सेनलिंग" नाम का एक नया ज़िला स्थापित किया है। यह अफगानिस्तान, पाकिस्तान-अधिगृहीत कश्मीर और भारत के अरुणाचल प्रदेश से सटे त्रि-संधि स्थल क्षेत्र के निकट, काराकोरम श्रेणी के समीप स्थित है।
  • प्रतिरूप: यह विकास एक सतत प्रतिरूप को दर्शाता है, क्योंकि चीन ने हाल के वर्षों में हियान और हेकांग सहित ऐसी कई प्रशासनिक इकाइयाँ बनाई हैं, जिनके विरुद्ध भारत ने औपचारिक विरोध दर्ज कराया है।
  • चीन का दावा: चीन के दावे शिमला सम्मेलन के अंतर्गत परिभाषित सीमा और संबद्ध मैकमोहन सीमा को अस्वीकार करने पर आधारित हैं।
    • यह तवांग मठों और ल्हासा के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों का हवाला देकर अपनी स्थिति को और उचित ठहराता है।
  • उद्देश्य: स्थानों का नाम बदलना और प्रशासनिक इकाइयाँ बनाना चीन द्वारा क्षेत्रीय दावों को सुदृढ़ करने और भारत पर दबाव डालने के लिये प्रयुक्त रणनीतिक उपकरण माने जाते हैं।
  • रणनीतिक महत्त्व: यह दृष्टिकोण एक व्यापक भू-राजनीतिक स्वरूप को दर्शाता है, जो दक्षिण चीन सागर में चीन के आचरण के समान है, जहाँ संप्रभुता का दावा करने के लिये प्रतीकात्मक कार्यों को आर्थिक और सैन्य सामर्थ्य के साथ जोड़ा जाता है।

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