चंद्रशेखर आज़ाद | 28 Feb 2026

स्रोत: ऑल इंडिया रेडियो

भारत में 27 फरवरी, 2026 को स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आज़ाद के 95वें बलिदान दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

  • प्रारंभिक जीवन और 'आज़ाद' की उपाधि: आज़ाद का मूल नाम चंद्रशेखर तिवारी था और उनका जन्म वर्ष 1906 में अलीराजपुर (वर्तमान मध्य प्रदेश) में हुआ था, उन्होंने कम उम्र में ही घर छोड़ दिया और महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन (1921) में सक्रिय रूप से शामिल हो गए।  
    • गिरफ्तार होने पर जब उन्हें मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत किया गया, तो उन्होंने प्रसिद्ध रूप से अपना नाम ‘आज़ाद’, पिता का नाम ‘स्वतंत्रता’ तथा पता ‘जेल की कोठरी’ बताया।
  • वैचारिक परिवर्तन: वर्ष 1922 में असहयोग आंदोलन की आकस्मिक वापसी ने उन्हें गांधीवादी अहिंसा से दूर कर उग्र, क्रांतिकारी राष्ट्रवाद की ओर प्रेरित किया।
  • हिंदुस्तान रिपब्लिकन आर्मी (HRA): वह हिंदुस्तान रिपब्लिकन आर्मी में शामिल हुए, जिसका नेतृत्व प्रमुख क्रांतिकारी राम प्रसाद बिस्मिल और सचिंद्रनाथ सान्याल कर रहे थे।
  • काकोरी ट्रेन एक्शन (1925): आज़ाद ने राजनीतिक डकैतियों, विशेष रूप से काकोरी ट्रेन एक्शन (1925) के माध्यम से सशस्त्र संघर्ष के लिये धन जुटाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • HSRA की स्थापना (1928): भगत सिंह के साथ मिलकर उन्होंने वर्ष 1928 में क्रांतिकारी युवाओं का पुनर्गठन कर हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) की स्थापना की
    • भगत सिंह के प्रभाव में संगठन ने स्पष्ट समाजवादी विचारधारा अपनाई, जबकि आज़ाद इसके प्रमुख सैन्य नेता एवं रणनीतिकार रहे।
  • जॉन सॉन्डर्स की हत्या (1928): लाला लाजपत राय की मृत्यु का प्रतिशोध लेने के लिये आज़ाद ने लाहौर में ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जॉन सॉन्डर्स की हत्या की योजना बनाई और उसमें सहभागिता की।
    • हत्या के पश्चात HSRA ने ‘बलराज’ नामक आज़ाद के छद्म नाम से हस्ताक्षरित पर्चे जारी किये।
  • अंतिम संघर्ष (1931): 1929 में केंद्रीय विधानसभा पर हुए बम विस्फोट के बाद गुप्त रूप से कार्य करते हुए, आज़ाद को अंततः 27 फरवरी, 1931 को इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में एक पुलिस बटालियन ने घेर लिया। 
    • उन्होंने अपने साथी सुखदेव राज को सुरक्षित निकलने में सहायता करने हेतु साहसपूर्वक संघर्ष किया और जीवित पकड़े न जाने की प्रतिज्ञा के अनुरूप अंतिम गोली से स्वयं के प्राण की आहुति दी।

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