जैव-आधारित रसायन | 18 Feb 2026

स्रोत:द हिंदू 

चर्चा में क्यों?

जैव-आधारित रसायन भारत के लिये एक रणनीतिक क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। ये देश के विशाल कृषि-आधार का उपयोग करने, पेट्रो-रसायनों पर आयात-निर्भरता को घटाने तथा वैश्विक सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप औद्योगिक परिवर्तन को प्रोत्साहित करने की क्षमता रखते हैं।

जैव-आधारित रसायन क्या हैं?

  • परिचय: जैव-आधारित रसायन ऐसे रासायनिक पदार्थ हैं जो जीवाश्म ईंधन, जैसे- पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस या कोयले के बजाय नवीकरणीय जैविक संसाधनों (पौधे, कृषि अवशेष, वानिकी सामग्री, समुद्री स्रोत, शैवाल) से पूर्णतः या आंशिक रूप से प्राप्त होते हैं।  
    • एंज़ाइम जैविक उत्प्रेरक होते हैं जिनका उपयोग व्यापक रूप से डिटर्जेंट, खाद्य प्रसंस्करण, फार्मास्यूटिकल्स, वस्त्र, लुगदी एवं कागज़ उद्योग तथा जैव-उत्पादन में किया जाता है। ये निम्न तापमान एवं दाब पर कार्य करते हैं, जिससे ऊर्जा-उपभोग तथा उत्सर्जन में कमी आती है।
  • उत्पादन विधियाँ: उत्पादन में आमतौर पर बायोरिफाइनरी शामिल होती हैं जहाँ बायोमास किण्वन, एंज़ाइम रूपांतरण, थर्मोकेमिकल उपचार या उत्प्रेरक उन्नयन जैसी प्रक्रियाओं से गुज़रते हैं।
    • सामान्य विधियों में शर्करा अथवा स्टार्च का सूक्ष्मजीवी किण्वन कर कार्बनिक अम्ल एवं अल्कोहल का उत्पादन या पौधे से प्राप्त तेल तथा लिग्नो-सेल्यूलोजिक पदार्थों का निष्कर्षण एवं संशोधन सम्मिलित हैं।

जैव-आधारित रसायनों के उदाहरण:

रासायन

उत्पादन विधि

अनुप्रयोग

लैक्टिक एसिड

कार्बोहाइड्रेट का किण्वन

जैव-अपघटनीय प्लास्टिक (पॉलीलैक्टिक एसिड), खाद्य परिरक्षक, सौंदर्य प्रसाधन

सक्सीनिक अम्ल

ग्लूकोज़/शर्करा से प्राप्त

पॉलिमर, विलायक और औषधियों हेतु घटक उत्पाद के रूप में

जैव-आधारित ग्लिसरॉल

बायोडीज़ल उत्पादन का उप-उत्पाद

औषधि, व्यक्तिगत देखभाल, रासायनिक कच्चा माल

बायो-इथेनॉल और बायो-ब्यूटेनॉल

किण्वन

विलायक, ईंधन एवं रसायन निर्माण

1,3-प्रोपेन डाइअल

ग्लिसरॉल/शर्करा से किण्वित

वस्त्र, सौंदर्य प्रसाधन और औद्योगिक उपयोगों के लिये पॉलिएस्टर

जैव-आधारित सर्फेक्टेंट और स्नेहक

पौधों के तेल से प्राप्त

डिटर्जेंट, पेंट, चिपकने वाले पदार्थ

  • भारत की वर्तमान स्थिति एवं संभावनाएँ: भारत इस क्षेत्र में सुदृढ़ता रखता है। भारत के पास एक बड़ा कृषि आधार, औषधि एवं टीका उद्योग से संबंधित किण्वन में गहरी विशेषज्ञता और तीव्र गति से विकसित हो रहा विनिर्माण क्षेत्र है। 
    • इस क्षेत्र का विस्तार करने से पेट्रोकेमिकल्स पर आयात निर्भरता कम हो सकती है (उदाहरण के लिये, भारत ने वर्ष 2023 में 479.8 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य का एसिटिक अम्ल आयात किया), कृषि उत्पादों के लिये नए बाज़ार सृजित हो सकते हैं तथा सतत औद्योगिक आगतों के प्रतिस्पर्द्धी आपूर्तिकर्त्ता के रूप में भारत की स्थिति सुदृढ़ हो सकती है।
    • भारत ने जैव प्रौद्योगिकी विभाग की बायो ई-3 नीति के तहत जैव-आधारित रसायनों और एंज़ाइमों को प्राथमिकता दी है
  • वैश्विक स्तर पर सर्वोत्तम पद्धतियाँ: 
    • यूरोपीय संघ: यूरोपीय संघ की जैव-अर्थव्यवस्था रणनीति और कार्ययोजना चक्रीय जैव-अर्थव्यवस्था लक्ष्यों के हिस्से के रूप में जैव-आधारित रसायनों के लिये समन्वित समर्थन प्रदान करती है।
    • संयुक्त राज्य अमेरिका: USDA का बायोप्रेफर्ड प्रोग्राम प्रमाणित जैव-आधारित उत्पादों के लिये संघीय खरीद वरीयता को अनिवार्य बनाता है, जिससे उत्पादकों के लिये बाज़ार की उपलब्धता सुनिश्चित होती है।
    • चीन: चीन ने राष्ट्रीय जैव-अर्थव्यवस्था विकास योजनाओं में उच्च मूल्य वाले जैव-आधारित रसायनों और एंज़ाइम प्रौद्योगिकियों को रणनीतिक क्षेत्रों के रूप में स्पष्ट रूप से प्राथमिकता दी है
  • लाभ: प्रमुख लाभों में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी, गैर-नवीकरणीय संसाधनों पर निर्भरता में कमी, जैव-अपघटनीयता में वृद्धि और कृषि एवं औद्योगिक अपशिष्ट शृंखलाओं के मूल्यवर्द्धन के माध्यम से चक्रीय अर्थव्यवस्था सिद्धांतों के साथ संरेखण शामिल हैं।
  • जोखिम और चुनौतियाँ: प्रमुख जोखिमों में पेट्रोकेमिकल्स के मुकाबले कम लागत वाली प्रतिस्पर्द्धात्मकता शामिल है, जो उत्पादन बढ़ाने के दौरान निजी निवेश को हतोत्साहित करती है। इसके अतिरिक्त विश्वसनीय फीडस्टॉक की उपलब्धता और बुनियादी ढाँचे संबंधी अनिश्चितताएँ भी प्रमुख चुनौतियाँ हैं। 
    • बाज़ार स्वीकृति में चुनौती, क्योंकि विनिर्माता तुलनात्मक लागत होने पर भी मौजूदा आगतों को बदलने में अनिच्छुक हो सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. जैव-आधारित रसायन क्या होते हैं?
जैव-आधारित रसायन औद्योगिक रसायन हैं जो जीवाश्म ईंधन के बजाय नवीकरणीय बायोमास (पौधे, अवशेष, शैवाल) से प्राप्त होते हैं और अक्सर किण्वन या एंज़ाइम प्रक्रियाओं के माध्यम से उत्पादित होते हैं।

2. जैव-आधारित रसायन क्षेत्र में एंज़ाइम क्यों महत्त्वपूर्ण हैं?
एंज़ाइम जैविक उत्प्रेरक के रूप में कार्य करते हैं, जिससे डिटर्जेंट, फार्मास्यूटिकल्स, वस्त्र और जैव-विनिर्माण में कम तापमान एवं कम ऊर्जा वाली औद्योगिक प्रक्रियाएँ संभव हो पाती हैं।

3. भारत जैव-आधारित रसायनों पर क्यों ध्यान केंद्रित कर रहा है?
भारत का लक्ष्य पेट्रोकेमिकल आयात पर निर्भरता को कम करना (उदाहरण के लिये, भारत ने वर्ष 2023 में 479.8 मिलियन अमेरिकी डॉलर का एसिटिक अम्ल आयात किया था), अपने कृषि आधार का लाभ उठाना और बायो ई-3 नीति के तहत स्थिरता लक्ष्यों के साथ तालमेल बिठाना है।

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UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न 

प्रिलिम्स:

प्रश्न. माइकोराइजल (कवकमूलीय) जैव-प्रौद्योगिकी को निम्नीकृत स्थलों के पुनर्वासन में उपयोग में लाया गया है क्योंकि कवकमूल के द्वारा पौधों में: (2013)

  1. सूखे का प्रतिरोध करने एवं अवशोषण क्षेत्र बढ़ाने की क्षमता आ जाती है 
  2. pH की अति सीमाओं को सहन करने की क्षमता आ जाती है 
  3. रोगग्रस्तता से प्रतिरोध की क्षमता आ जाती है

 नीचे दिये गए कूट का प्रयोग करते हुए सही उत्तर चुनिये:

(A) केवल 1 

(B) केवल 2 और 3

(C) केवल 1 और 3 

(D) 1, 2 और 3

उत्तर: (D)


प्रश्न. पीड़कों के प्रतिरोध के अतिरिक्त वे कौन-सी संभावनाएँ हैं जिनके लिये आनुवंशिक रूप से रूपांतरित पादपों का निर्माण किया गया है? (2012)

  1. सूखा सहन करने के लिये उन्हें सक्षम बनाना   
  2. उत्पाद में पोषकीय मान बढ़ाना    
  3. अंतरिक्ष यानों और अंतरिक्ष स्टेशनों में  उन्हें उगने और प्रकाश संश्लेषण करने के लिये सक्षम बनाना  उनकी शेल्फ लाइफ बढ़ाना 

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:  

(a) केवल 1 और 2 

(b) केवल 3 और 4 

(c) केवल 1, 2 और 4  

(d) 1, 2, 3 और 4 

उत्तर: (c)