ASI ने तमिलनाडु में स्थलों के उत्खनन को स्वीकृति प्रदान की | 20 Mar 2026

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस 

प्राचीन स्मारक एवं पुरातत्त्व स्थल और अवशेष नियम, 1959 के तहत भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण (ASI) ने तमिलनाडु में 8 प्रमुख स्थलों पर उत्खनन को स्वीकृति प्रदान की है।

  • महत्त्व: ये 8 स्थल सामूहिक रूप से लौह युग से लेकर कीलाडी जैसी शहरी बस्तियों तक तमिलनाडु के इतिहास का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो संभावित रूप से प्राचीन दक्षिण भारतीय शहरीकरण और वैश्विक व्यापार नेटवर्क के बीच के अंतर को समाप्त कर सकते हैं।

प्रमुख स्थल और उनका महत्त्व

प्रमुख स्थल

महत्त्व

कीलाडी

वैगई बेसिन में शहरी बस्ती; तमिल-ब्राह्मी लिपि और उन्नत जल निकासी प्रणालियों के साक्ष्य।

आदिचनल्लूर और करिवलमवंतनल्लूर

यह प्रमुख शवाधान प्रारंभिक अंत्येष्टि प्रथाओं और लौह युग की भौतिक संस्कृति के बारे में जानकारी प्रदान करता है ।

वेल्लोर

रोमन साम्राज्य के साथ वाणिज्यिक आदान-प्रदान के साक्ष्य, जिनमें आभूषण और सिक्के शामिल हैं।

थेलुंगनूर

यह लोहे के उपयोग में प्रारंभिक तकनीकी प्रगति का संकेत देता है, जो संभवतः कई सहस्राब्दियों पहले की है।

नागपट्टिनम और पट्टिनामरुदुर

यह ऐतिहासिक चोल-काल का बंदरगाह बौद्ध एवं हिंद महासागर के व्यापार विस्तार को दर्शाता है।

मणिकोल्लाई

दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ होने वाले लंबी दूरी के व्यापार से जुड़ा काँच के मोतियों का उत्पादन केंद्र।

  • तमिलनाडु की प्रतिबद्धता: तमिलनाडु सरकार ने अपने वर्ष 2025-26 के बजट में पुरातात्त्विक कार्यों के लिये 7 करोड़ रुपये आवंटित किये हैं, जिसमें DNA टेस्टिंग और ऑप्टिकली स्टिम्युलेटेड ल्यूमिनेसेंस (OSL) डेटिंग जैसी उन्नत वैज्ञानिक विधियाँ शामिल हैं।
  • स्थलों की डेटिंग:
    • DNA टेस्टिंग (जेनेटिक टेस्टिंग या DNA प्रोफाइलिंग) एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसका उपयोग गुणसूत्रों, जीनों या प्रोटीनों में परिवर्तनों की पहचान करने, जैविक संबंधों और पैतृक मूल को निर्धारित करने के लिये किया जाता है।
      • पुरातत्त्व में इसका उपयोग कंकाल अवशेषों से निकाले गए प्राचीन DNA (aDNA) का विश्लेषण करके प्राचीन सभ्यताओं के प्रवास और वंशावली का पता लगाने के लिये किया जाता है।
    • OSL डेटिंग एक परिष्कृत भू-कालनिर्धारण (जियोक्रोनोलॉजिकल) तकनीक है जो यह निर्धारित करती है कि खनिज कण (जैसे– क्वार्ट्ज़ या फेल्डस्पार) आखिरी बार सूर्य के प्रकाश के संपर्क में कब आए थे।
      • पुरातत्त्व में यह उन मृदा परतों की डेटिंग हेतु विशेष रूप से उपयोगी है, जिनमें कलाकृतियाँ पाई जाती हैं, विशेष रूप से जब रेडियोकार्बन डेटिंग के लिये जैविक सामग्री उपलब्ध नहीं होती है।

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