आर्कटिक वार्मिंग से आक्रामक प्रजातियों का बढ़ता जोखिम | 13 Feb 2026

स्रोत: द हिंदू 

चर्चा में क्यों?

हाल के वैज्ञानिक अध्ययनों ने चेतावनी दी है कि तीव्र आर्कटिक वार्मिंग के कारण आक्रामक विदेशी पादप प्रजातियों के स्थापित होने तथा संवेदनशील आर्कटिक पारितंत्रों को परिवर्तित करने का जोखिम बढ़ रहा है।

आर्कटिक ऊष्मीकरण से आक्रामक पौधों का जोखिम कैसे बढ़ रहा है?

  • परिवर्तित जलवायु परिस्थितियाँ: जलवायु परिवर्तन और बढ़ती मानवीय गतिविधियाँ आर्कटिक के प्राकृतिक अवरोधों, जैसे– अल्प विकसित होने की अवधि, सख्त जलवायु तथा सीमित पारिस्थितिक व्यवधान को प्रभावित कर रही हैं, जिससे पूर्व में अनुपयुक्त रहे क्षेत्र अब गैर-स्थानीय (विदेशी) प्रजातियों के लिये अनुकूल बनते जा रहे हैं।
  • वैज्ञानिक निष्कर्ष: हालिया अध्ययन के अनुसार, विश्व भर की लगभग 2,554 वाहिकीय (Vascular) पौध प्रजातियाँ एक उष्ण होते आर्कटिक में उपयुक्त जलवायु विशिष्ट स्थान (Climatic Niches) प्राप्त कर सकती हैं।
  • प्रसार के मौजूदा साक्ष्य: एक पूर्व आर्कटिक सूचीकरण (Arctic Inventory) में 341 विदेशी प्रजाति-समूहों का दस्तावेज़ीकरण किया गया, जिनमें से 188 प्राकृतिक रूप से स्थापित (Naturalised) हो चुके हैं। शोधकर्त्ताओं ने स्वालबार्ड में भी अप्रत्याशित गैर-स्थानीय प्रजातियों, जिनमें कॉमन मीडो रू शामिल है, की उपस्थिति दर्ज की है।
  • संवेदनशील हॉटस्पॉट की पहचान: छह प्रमुख संभावित आक्रमण हॉटस्पॉट चिह्नित किये गए हैं, अलास्का का पश्चिमी भाग, ग्रीनलैंड के दक्षिण-पश्चिमी एवं दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र, आइसलैंड का उत्तरी भाग, फेनोस्कैंडिया तथा कानिन-पेशोरा क्षेत्र जहाँ तीव्र ऊष्मीकरण और बढ़ते मानवीय जुड़ाव एक साथ प्रभाव डाल रहे हैं।
  • प्रवेश के मार्ग: आक्रामक पादप प्रजातियों का प्रवेश मुख्यतः कनफाइनमेंट, ट्रांसपोर्ट-स्टोअवे, सीड कंटेमिनेशन, ट्रांसपोर्ट वाया वेहिकल आदि के कारण होता है।
  • पारिस्थितिकीय प्रभाव: विदेशी प्रजातियाँ जो देशी वनस्पतियों को विस्थापित करती हैं, कमज़ोर आर्कटिक टुंड्रा पारिस्थितिकी—जिसमें मॉस, लाइकेन, बेरबेरी जैसी झाड़ियाँ तथा स्नोई आउल, आर्कटिक फॉक्स, ग्रिज़ली बियर, सील, वालरस और बेलुगा जैसे अद्वितीय जीव-जंतु सम्मिलित हैं—के लिये संकट उत्पन्न करती हैं और इन्हें वैश्विक जैव विविधता ह्रास के सबसे बड़े कारकों में से एक माना जाता है।

आक्रामक विदेशी पादप प्रजातियाँ क्या हैं?

  • परिचय: आक्रामक पादप प्रजातियाँ वे गैर-देशज पादप हैं जिन्हें जानबूझकर या अनजाने में किसी पारिस्थितिक तंत्र में लाया जाता है, जहाँ उनकी मात्रा स्थानीय प्रजातियों की तुलना में अधिक हो जाती है और आर्थिक, पर्यावरणीय या मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं।
    • जलवायु परिवर्तन, भूमि-उपयोग में परिवर्तन, अल्टर्ड फायर रेजीम, मृदा आर्द्रता में परिवर्तन, पशुधन चराई के पैटर्न और जैव विविधता की हानि के कारण इन आक्रमणों में तेज़ी आ रही है।
  • भारत में आक्रामक पादप प्रजातियाँ: प्रमुख आक्रामक प्रजातियों में लैंटाना कैमरा, क्रोमोलेना ओडोराटा और प्रोसोपिस जूलिफ्लोरा शामिल हैं।
    • ये आक्रामक प्रजातियाँ भारत में 266,954 वर्ग किमी. के प्राकृतिक आवासों में फैल चुकी हैं।
  • उच्च जोखिम वाले क्षेत्र: इनमें शिवालिक-तराई पेटी, पूर्वोत्तर का दुआर क्षेत्र, अरावली, दंडकारण्य वन और पश्चिमी घाट में नीलगिरि शामिल हैं।
    • शुष्क घास के मैदान, सवाना, शोला घास के मैदान और गंगा-ब्रह्मपुत्र के आर्द्र मैदान जैसे खुले पारिस्थितिक तंत्र तेज़ी से आक्रामक पादप प्रजातियों के विस्तार के प्रति सर्वाधिक संवेदनशील हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. आक्रामक विदेशी प्रजातियाँ क्या हैं?
आक्रामक विदेशी प्रजातियाँ वे पौधे, जानवर या अन्य जीव होते हैं, जिन्हें उनके प्राकृतिक आवास के बाहर लाया जाता है और जो वहाँ स्थापित होकर तेज़ी से फैलते हैं। ये स्थानीय प्रजातियों से प्रतिस्पर्द्धा करके और पारिस्थितिक तंत्र में बदलाव लाकर गंभीर पर्यावरणीय क्षति पहुँचाते हैं।

2. आर्कटिक अब आक्रामक प्रजातियों के प्रति अधिक संवेदनशील क्यों है?
तेज़ जलवायु परिवर्तन और मानव हस्तक्षेप में वृद्धि के कारण वे प्राकृतिक अवरोध कमजोर पड़ रहे हैं, जो पहले गैर-स्थानीय प्रजातियों को पनपने से रोकते थे।

3. आक्रामक विदेशी प्रजातियाँ हानिकारक क्यों हैं?
ये स्थानीय जैव विविधता को कम करती हैं, पारिस्थितिक संतुलन को बिगाड़ती हैं और आर्कटिक टुंड्रा जैसे नाज़ुक आवासों में स्थायी परिवर्तन ला सकती हैं।


UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQs)

प्रिलिम्स

प्रश्न. ‘मीथेन हाइड्रेट’ के निक्षेपों के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?  (2019)

भूमंडलीय तापन के कारण इन निक्षेपों से मीथेन गैस का निर्मुक्त होना प्रेरित हो सकता है। 

मीथेन हाइड्रेट के विशाल निक्षेप उत्तरी ध्रुवीय टुंड्रा में तथा समुद्र अधस्तल के नीचे पाए जाते हैं।

वायुमंडल के अंदर मीथेन एक या दो दशक के बाद कार्बन डाइऑक्साइड में ऑक्सीकृत हो जाती है।

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 2 और 3

(c) केवल 1 और 3

(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (d)

प्रश्न 2. निम्नलिखित देशों पर विचार कीजिये: (2014)

डेनमार्क 

जापान 

रशियन फेडरेशन 

यूनाइटेड किंगडम

यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका

उपर्युक्त में से कौन-से 'आर्कटिक काउंसिल' के सदस्य हैं?

(a) 1, 2 और 3

(b) 2, 3 और 4

(c) 1, 4 और 5

(d) 1, 3 और 5

उत्तर: (d)