आकाश-NG मिसाइल | 08 Jan 2026

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने आकाश-NG (नेक्स्ट जेनरेशन) के उपयोगकर्त्ता मूल्यांकन परीक्षण (User Evaluation Trials- UET) सफलतापूर्वक पूरे कर लिये हैं, जिससे भारतीय वायुसेना (IAF) में इसे शामिल करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

  • DRDO द्वारा विकसित प्रणालियों का विकास चक्र सामान्यतः तीन चरणों–विकासात्मक परीक्षण, विभिन्न परिस्थितियों में उपयोगकर्त्ता सहायता प्राप्त परीक्षण तथा उपयोगकर्त्ता मूल्यांकन परीक्षण (UET) में होता है।
    • उपयोगकर्त्ता मूल्यांकन परीक्षण (UET) के सफलतापूर्वक पूर्ण होने से प्रणाली के शामिल होने का मार्ग प्रशस्त हो जाता है, जिसके बाद उपयोगकर्त्ता द्वारा आवश्यकता की स्वीकृति जारी की जाती है। आकाश-NG के मामले में यह उपयोगकर्त्ता भारतीय वायुसेना (IAF) है।

सारांश

  • DRDO ने आकाश-NG के उपयोगकर्त्ता मूल्यांकन परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे कर लिये हैं, जिससे इसके भारतीय वायुसेना में शामिल होने का मार्ग प्रशस्त हुआ है और यह भारत की स्वदेशी वायु रक्षा क्षमता में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।
  • आकाश-NG मूल आकाश प्रणाली की तुलना में हल्की, अधिक दूरी तक मार करने में सक्षम और अधिक घातक उन्नत संस्करण है, जिसे उच्च गति तथा कम रडार परावर्तन क्षेत्र (Low-RCS) वाले हवाई खतरों का मुकाबला करने व आत्मनिर्भर भारत के तहत भारत की बहु-स्तरीय वायु रक्षा प्रणाली को सशक्त बनाने हेतु डिज़ाइन किया गया है।

आकाश-NG के संबंध में मुख्य तथ्य क्या हैं?

  • परिचय: यह सतह-से-हवा में मार करने वाली मिसाइल है, जिसे भारतीय वायुसेना (IAF) के लिये विकसित किया गया है। यह उच्च गति, वहनीय सुगमता तथा कम रडार क्रॉस सेक्शन (RCS) वाले हवाई खतरों, जैसे– विमान, ड्रोन और क्रूज़ मिसाइलों को अवरोधित करने में सक्षम है। इसकी मारक क्षमता 70 किमी. तक है और प्रतिक्रिया समय भी तेज़ है।
  • विकास एवं उत्पादन: यह प्रणाली DRDO द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित की गई है (जिसमें 96% घटक स्वदेशी हैं) और इसका उत्पादन भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) तथा भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) द्वारा किया जाता है, जिससे रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत के प्रयासों को मज़बूती मिलती है।
  • प्रदर्शन विशेषताएँ: मिसाइल आकाश-NG मैक 2.5 की गति से उड़ान भर सकती है, लगभग 60–70 किमी. की दूरी पर स्थित लक्ष्य को भेद सकती है, 20 किमी. से अधिक ऊँचाई पर संचालन कर सकती है तथा लगभग 90% की विनाश संभावना (किल प्रॉबेबिलिटी) प्राप्त करती है, जिससे यह अपने पूर्ववर्ती संस्करणों की तुलना में कहीं अधिक घातक बन जाती है।
    • आकाश-NG मिसाइल को सील किये गए कंटेनरों में संगृहीत और लॉन्च किया जाता है, जो परिवहन तथा भंडारण को सुगम बनाता है, साथ ही इसकी शेल्फ लाइफ (मिसाइल की सुरक्षित और प्रभावी रहने की अवधि) व संचालन तैयारियों में वृद्धि होती है।
  • प्रौद्योगिकीगत उन्नति: इसमें अंतर्निर्मित इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-काउंटर मेज़र्स (ECCM) मौजूद हैं, अर्थात ऐसे ऑनबोर्ड तंत्र जो खोज प्रणाली को भ्रमित या निष्क्रिय करने का प्रयास करने वाली शत्रु इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों का प्रभावी ढंग से मुकाबला कर सकते हैं।
    • इसमें स्वदेशी रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) सीकर, डुअल-पल्स सॉलिड रॉकेट मोटर तथा पूरी तरह से स्वदेशी रडार और कमांड-एंड-कंट्रोल सिस्टम शामिल हैं, जो कम रडार क्रॉस सेक्शन (Low-RCS) और उच्च गतिशील लक्ष्यों पर सटीक हमले को सक्षम बनाते हैं।
  • संचालनात्मक क्षमताएँ: यह मिसाइल मोबाइल प्लेटफॅार्म से प्रक्षेपित की जा सकती है, एक साथ कई लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है तथा निम्न ऊँचाई, सीमा के निकट और उच्च ऊँचाई पर लंबी दूरी से आने वाले खतरों का प्रभावी ढंग से मुकाबला कर सकती है।
  • रणनीतिक महत्त्व: आकाश को वर्ष 2014 में भारतीय वायुसेना (IAF) में और इसके बाद भारतीय सेना में शामिल किया गया था। वर्तमान में वायुसेना तथा सेना (थल सेना) क्रमशः कई स्क्वाड्रन एवं मिसाइल समूहों का संचालन कर रही हैं।
    • आकाश-NG मिसाइल भारत की बहु-स्तरीय वायु रक्षा प्रणाली को और अधिक सशक्त बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है, आकाश-NG भारत की बहु-स्तरीय वायु रक्षा संरचना को आवश्यक रूप से सुदृढ़ करती है, आधुनिक हवाई खतरों के खिलाफ तैयारी में वृद्धि करती है तथा महत्त्वपूर्ण मिसाइल प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भर भारत को सशक्त बनाती है।
    • दिसंबर 2020 में भारत ने आकाश मिसाइल के निर्यात को मंज़ूरी दी, बाद में अर्मेनिया, फिलीपींस, वियतनाम, मिस्र और ब्राज़ील सहित कई देशों ने इसकी खरीद में रूचि दिखाई, जो भारत की स्वदेशी रक्षा प्रणालियों की वैश्विक स्वीकृति को दर्शाता है।
      • आकाश का निर्यात संस्करण भारतीय सशस्त्र बलों में सेवारत संस्करणों से भिन्न होगा।
  • पूर्ववर्ती आकाश से अंतर: मूल आकाश मिसाइल की तुलना में आकाश-NG मिसाइल अधिक हल्की है (अब 350 किग्रा., पहले 700 किग्रा.), इसकी मारक क्षमता अधिक है (अब 70 किमी. तक, पहले लगभग 30 किमी.), इसमें रैमजेट प्रणोदन के स्थान पर ठोस रॉकेट मोटर का उपयोग किया गया है तथा यह बेहतर गतिशीलता (Mobility) व उत्तरजीविता (Survivability) प्रदान करती है।
    • DRDO ने आकाश प्राइम मिसाइल भी विकसित की है, जो आकाश मिसाइल का उन्नत संस्करण है। इसकी मारक क्षमता मूल आकाश मिसाइल के समान ही है, लेकिन इसमें स्वदेशी एक्टिव RF सीकर लगाया गया है, जिससे हवाई लक्ष्यों के मुकाबले सटीकता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम (IGMDP)

  • एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम (IGMDP) (1983-2012) की शुरुआत ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के नेतृत्व में मिसाइल प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के उद्देश्य से की गई थी। इसके अंतर्गत 5 मिसाइलों (P-A-T-N-A: पृथ्वी-आकाश-त्रिशूल-नाग-अग्नि) का विकास किया गया:
    • पृथ्वी (अल्प दूरी की सतह-से-सतह पर मार करने वाली मिसाइल), आकाश (मध्यम दूरी की सतह-से-वायु में मार करने वाली निर्देशित मिसाइल), त्रिशूल (अल्प दूरी की सतह-से-वायु में मार करने वाली निर्देशित मिसाइल), नाग (तृतीय पीढ़ी की एंटी-टैंक मिसाइल) तथा अग्नि-I (कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल)।
    • पृथ्वी शृंखला में पृथ्वी-I (150 किमी की मारक क्षमता, अब सेवामुक्त), पृथ्वी-II (250-350 किमी. की मारक क्षमता, तरल-ईंधन चालित, परमाणु-सक्षम) तथा पृथ्वी-III (हल्के पेलोड के साथ 750 किमी. तक की मारक क्षमता) शामिल हैं; धनुष इसका नौसैनिक संस्करण है।
    • त्रिशूल की मारक क्षमता 12 किमी. थी, जिसका उपयोग बिंदु वायु रक्षा (Point Air Defence) के लिये किया जाना था, जबकि आकाश 30 किमी. अवरोधन क्षमता के साथ एक प्रमुख मध्यम दूरी की सतह-से-वायु में मार करने वाली निर्देशित मिसाइल (SAM) के रूप में उभरी।
  • रणनीतिक महत्त्व के कारण अग्नि मिसाइल कार्यक्रम को बाद में IGMDP से अलग कर स्वतंत्र रूप से विस्तारित किया गया, जो भारत की रणनीतिक प्रतिरोधक क्षमता (Strategic Deterrence Capability) में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि सिद्ध हुआ।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. आकाश-NG क्या है?
आकाश-NG एक अगली पीढ़ी की सतह-से-वायु में मार करने वाली निर्देशित मिसाइल (SAM) है, जिसे उच्च गति, सशक्त गतिशीलता (High-Manoeuvring) तथा निम्न RCS वाले हवाई खतरों को 70 किमी. तक की दूरी पर अवरोधित करने के लिये अभिकल्पित किया गया है।

2. उपयोगकर्त्ता मूल्यांकन परीक्षण (UET) क्यों महत्त्वपूर्ण हैं?
सफल UET वास्तविक परिचालन परिस्थितियों में प्रणाली की संचालनात्मक तत्परता की पुष्टि करते हैं और इसे भारतीय वायुसेना (IAF) में शामिल किये जाने की स्वीकृति प्रदान करते हैं।

3. आकाश-NG मिसाइल मूल आकाश मिसाइल से किस प्रकार भिन्न है?
आकाश-NG अधिक हल्की है (350 किग्रा. बनाम 700 किग्रा.), इसकी मारक क्षमता अधिक है, इसमें डुअल-पल्स ठोस रॉकेट मोटर का उपयोग किया गया है तथा यह बेहतर गतिशीलता और उत्तरजीविता प्रदान करती है।

4. आकाश-NG मिसाइल का विकास किसने किया और इसका उत्पादन कौन करता है?
इसका विकास DRDO ने किया है तथा इसका उत्पादन भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) द्वारा किया जाता है।

5. IGMDP क्या है और इसका महत्त्व क्या है?
एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम (IGMDP), जिसे ए पी.जे. अब्दुल कलाम के नेतृत्व में संचालित किया गया, ने पृथ्वी, आकाश, नाग और अग्नि जैसी स्वदेशी मिसाइल प्रणालियों की नींव रखी तथा भारत की रणनीतिक आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ किया।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ) 

प्रश्न 1. कभी-कभी समाचारों में उल्लिखित ‘टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस’ (THAAD) क्या है? (2018)

(a) इज़रायल की एक रडार प्रणाली

(b) भारत का घरेलू मिसाइल प्रतिरोधी कार्यक्रम

(c) अमेरिकी मिसाइल प्रतिरोधी प्रणाली

(d) जापान और दक्षिण कोरिया के बीच एक रक्षा सहयोग

उत्तर: (c)


प्रश्न 2. अग्नि-IV बैलिस्टिक मिसाइल के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (2014)

  1. यह धरातल-से-धरातल तक मार करने वाला बैलिस्टिक है। 
  2. इसमें केवल द्रव नोदक ईंधन के रूप में इस्तेमाल होता है। 
  3. यह एक टन नाभिकीय वारहेड को 7500 किमी. दूरी तक फेंक सकता है।

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1

(b) केवल 2 और 3

(c) केवल 1 और 3

(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a)