9वाँ हिंद महासागर सम्मेलन | 14 Apr 2026

स्रोत: द हिंदू  

मॉरिशस में आयोजित 9वें हिंद महासागर सम्मेलन में भारत ने वर्ष 2026 में बढ़ते पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच नागरिकों, बुनियादी ढाँचे और वाणिज्यिक शिपिंग को निशाना बनाने के अपने विरोध की पुष्टि की, साथ ही शांति और स्थिरता का आह्वान किया।

  • मालदीव से कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ, क्योंकि चागोस द्वीप समूह से संबंधित क्षेत्रीय मतभेदों के कारण मॉरिशस और मालदीव के बीच राजनयिक संबंध निलंबित कर दिये गए हैं। इस बीच बांग्लादेश ने क्षेत्रीय सहयोग को मज़बूत करने के लिये "सार्क को पुनरुज्जीवित करने" की आवश्यकता पर बल दिया।
  • हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) पर प्रभाव: भारत ने हिंद महासागर क्षेत्र में ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और उर्वरक आपूर्ति शृंखलाओं पर पश्चिम एशिया संघर्ष के गंभीर आर्थिक निहितार्थों पर प्रकाश डाला और सुरक्षित तथा निर्बाध समुद्री नेविगेशन बनाए रखने की पूर्ण आवश्यकता पर बल दिया।
  • भारत-मॉरीशस ऊर्जा समझौता: क्षेत्रीय अस्थिरता से सुरक्षा के लिये भारत मॉरिशस को तेल और गैस की आपूर्ति करने के एक समझौते को अंतिम रूप दे रहा है, जिससे द्वीपीय देश की ऊर्जा सुरक्षा को रणनीतिक रूप से मज़बूत किया जाएगा।
  • हिंद महासागर सम्मेलन: इसकी शुरुआत वर्ष 2016 में इंडिया फाउंडेशन द्वारा क्षेत्रीय थिंक टैंकों के सहयोग से की गई थी। अब यह एक प्रमुख परामर्शदात्री मंच बन चुका है, जिसमें 40 से अधिक देशों की भागीदारी होती है।
  • हिंद महासागर क्षेत्र (IOR): यह 7 करोड़ (70 मिलियन) वर्ग किमी. से अधिक में फैला एक विशाल समुद्री क्षेत्र है, जो अफ्रीका से ऑस्ट्रेलिया तक विस्तृत है और पृथ्वी की जल सतह के लगभग 20% हिस्से को कवर करता है।
    • यह एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण वैश्विक व्यापार केंद्र है, जहाँ से विश्व के लगभग आधे कंटेनर जहाज़, एक-तिहाई बल्क कार्गो (थोक माल) और दो-तिहाई तेल शिपमेंट का आवागमन होता है।
    • यह क्षेत्र 35 से अधिक तटीय देशों को आपस में जोड़ता है और विश्व की लगभग 40% आबादी का निवास स्थल है, जो इसके विशाल रणनीतिक और आर्थिक महत्त्व को स्पष्ट करता है।
    • भारत हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में एक प्रमुख सुरक्षा प्रदाता और मुख्य स्थिरता लाने वाली शक्ति के रूप में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जो क्षेत्र में सभी के लिये सुरक्षा और विकास' (SAGAR) दृष्टिकोण से प्रेरित है।

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