AI के माध्यम से भारत के विकास पथ की पुनर्संरचना | 27 Feb 2026

यह एडिटोरियल 24/02/2026 को द हिंदू में प्रकाशित “AI for all: On the India AI Impact Summit 2026” शीर्षक वाले लेख पर आधारित है। यह एडिटोरियल इस बात का विश्लेषण करता है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता किस प्रकार शासन, कृषि, स्वास्थ्य सेवा, वित्त एवं जलवायु परिवर्तन से निपटने के माध्यम से भारत के विकास को नया आकार दे रही है। यह एक संप्रभु, समावेशी AI पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के लिये संरचनात्मक बाधाओं और नीतिगत रास्तों पर भी प्रकाश डालता है।

प्रिलिम्स के लिये: IndiaAI मिशन, BHASHINI, पैक्स सिलिका पहल, डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियमडिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना 

मेन्स के लिये: भारत के विकास के लिये AI के उपयोग में रुझान, AI शिखर सम्मेलन के परिणाम, प्रमुख मुद्दे और उपाय।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता भारत के विकास के अगले चरण को आकार देने वाली एक महत्त्वपूर्ण ‘सामान्य-उद्देश्य प्रौद्योगिकी’ के रूप में उभर चुकी है, जैसा कि ‘इंडिया AI इम्पैक्ट समिट वर्ष 2026’ में देखे गए अभूतपूर्व उत्साह से स्पष्ट होता है। विश्व की सबसे बड़ी डिजिटल रूप से संबद्ध आबादियों में से एक होने के नाते, भारत तीव्र गति से कृत्रिम बुद्धिमत्ता के केवल उपभोक्ता से आगे बढ़कर बुद्धिमान प्रणालियों के ‘विकासोन्मुख उपयोगकर्त्ता’ में रूपांतरित हो रहा है।

वर्तमान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आर्थिक परिवर्तन, शासन की दक्षता एवं सामाजिक समावेशन के संगम पर स्थित है जो सभी क्षेत्रों में उत्पादकता वृद्धि का वादा करती है। आने वाले दशक में भारत अपनी विकासात्मक यात्रा को किस दिशा में ले जाएगा, यह इस बात पर निर्णायक रूप से निर्भर करेगा कि वह कृत्रिम बुद्धिमत्ता को किस प्रकार तैनात करता है, उसका शासन करता है तथा उसे स्वदेशी स्वरूप प्रदान करता है।

भारत के विकास के लिये कृत्रिम बुद्धिमत्ता का लाभ उठाने के वर्तमान रुझान क्या हैं?

  • बहुभाषी प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण: डिजिटल विभाजन को पाटना: भारत सामान्य प्रयोजन AI को अपनाने के बजाय ‘सॉवरेन’ तथा भाषा-समावेशी डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) के निर्माण की दिशा में अग्रसर है, जो शासन एवं डिजिटल समानता में भाषाई बाधाओं को समाप्त करता है। 
    • यह संरचनात्मक एकीकरण राज्य सेवाओं का लोकतंत्रीकरण करता है, यह सुनिश्चित करते हुए कि स्थानीय विविधता अब उपेक्षित आबादी के लिये नागरिक भागीदारी या आर्थिक पहुँच में बाधा नहीं बनती है।
    • BHASHINI प्लेटफॉर्म इस बात का उदाहरण है कि AI भारत में डिजिटल इन्क्लूज़न को किस प्रकार गहरा कर रहा है, जिसमें अवधी एवं ब्रज जैसी बोलियों सहित 36 से अधिक टेक्स्ट्स और 22 से अधिक वोइस लैंग्वेज में AI भाषा मॉडल तैनात किये गए हैं। 
      • इसी क्रम में, बंगलूरू-आधारित स्टार्टअप ‘Sarvam AI’ ने भारत की बहुभाषी आवश्यकताओं के लिये विशेष रूप से डिज़ाइन किये गए दो उन्नत, स्वदेशी लार्ज लैंग्वेज मॉडल (30B और 105B पैरामीटर) प्रस्तुत किये हैं।
  • परिशुद्ध कृषि और जोखिम न्यूनीकरण: AI भारतीय कृषि को प्रतिक्रियात्मक पद्धतियों से अग्रसक्रिय सटीक मॉडलों की ओर ले जा रहा है, जो मानसून की अस्थिरता एवं संसाधन अपव्यय जैसे व्यापक आर्थिक जोखिमों को कम करते हैं। 
    • उपग्रह तथा मृदा आँकड़ों का सूक्ष्म-स्तरीय संश्लेषण ग्रामीण आपूर्ति शृंखलाओं को स्थिर करता है तथा अति-स्थानीय कृषि-हस्तक्षेपों के माध्यम से उत्पादकता को अनुकूलित करता है।
    • राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली (NPSS) AI/ML इमेज एनालिटिक्स के माध्यम से 66 फसलों को कवर करके और 432 से अधिक कीट प्रजातियों की निगरानी करके, AI-संचालित परिशुद्ध कृषि का प्रदर्शन करती है।
    • इसके अलावा, केंद्रीय बजट 2026-27 में भारत-VISTAAR नामक एक बहुभाषी AI टूल का प्रस्ताव रखा गया था, जिसका उद्देश्य एग्रीस्टैक पोर्टल और ICAR पैकेज को AI सिस्टम के साथ एकीकृत करना था।
      • YES-TECH, CROPIC और PMFBY व्हाट्सएप चैटबॉट, AI-सक्षम उपकरणों का उपयोग करके PMFBY के तहत फसल बीमा को किसानों के लिये अधिक नवीन, त्वरित एवं अधिक पारदर्शी बना रहे हैं।
  • वित्तीय समावेशन के लिये संवादात्मक AI: वॉइस-सक्षम AI जटिल दृश्य इंटरफेस को सहज, प्राकृतिक भाषा के आदेशों से बदलकर डिजिटल रूप से निरक्षर लोगों के लिये वित्तीय समावेशन को क्रांतिकारी रूप से गहरा कर रहा है।   
    • यह परिवर्तन P2P और सूक्ष्म-व्यापारी लेन-देन में आने वाली बाधाओं को दूर करता है, जिससे पहले से अलग-थलग पड़े ग्रामीण बाज़ारों में औपचारिक ऋण का प्रवाह तेज़ हो जाता है।
    • UPI 123PAY संवादात्मक AI के नेतृत्व में वित्तीय समावेशन का प्रदर्शन करता है, जिससे फीचर फोन उपयोगकर्त्ताओं के लिये वोइस बेस्ड लेन-देन संभव हो पाता है तथा ऐप साक्षरता संबंधी बाधाएँ दूर हो जाती हैं। 
  • सॉवरेन AI कंप्यूट और डेटा स्थानीयकरण: भारत बौद्धिक संपदा की सुरक्षा एवं विदेशी हाइपरस्केलर्स पर निर्भरता को रोकने के लिये सक्रिय रूप से घरेलू GPU क्लस्टर और AI-तैयार डेटा सेंटर बना रहा है।
    • यह सॉवरेन कंप्यूटिंग रणनीति सुनिश्चित करती है कि संवेदनशील राष्ट्रीय डेटासेट और सुरक्षा एल्गोरिदम पूरी तरह से भारतीय नियामक एवं भौतिक क्षेत्राधिकार के भीतर ही रहें। 
    • IndiaAI मिशन के लिये केंद्रीय बजट- 2026 में आवंटित 1,000 करोड़ रुपये के समर्थन से, सरकार ने डेटा सेंटर कर छूट को वर्ष 2047 तक बढ़ा दिया है।
  • विकेंद्रीकृत ग्रामीण शासन: AI पंचायत की कार्यवाही के दस्तावेज़ीकरण को स्वचालित करके ग्रामीण प्रशासन का पुनर्गठन कर रहा है, जिससे उन प्रशासनिक बाधाओं को दूर किया जा रहा है, जिनसे ऐतिहासिक रूप से स्थानीय विकास अवरुद्ध था। 
    • स्थानीय भाषा में स्पीच-टू-टेक्स्ट मॉडल व्यापक पारदर्शिता सुनिश्चित करते हैं, जिससे ज़मीनी स्तर पर लिये गए निर्णयों का ऑडिट एवं वास्तविक काल में बिना किसी मैन्युअल प्रशासनिक पूर्वाग्रह के संग्रह किया जा सके।   
    • वित्त वर्ष 2024-25 में, ईग्रामस्वराज पोर्टल (जिसमें SabhaSaar AI भी एकीकृत है) ने सफलतापूर्वक 2.53 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों को अपने साथ जोड़ा। 
  • AI-सक्षम स्वास्थ्य सेवा ट्राइएज़: विकेंद्रीकृत AI नेटवर्क ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित स्वास्थ्य सेवा केंद्रों में स्वचालित निदान उपकरण और कंप्यूटर विज़न को तैनात करके विशेषज्ञों की कमी को पूरा कर रहे हैं। 
    • इससे नैदानिक विशेषज्ञता का लोकतंत्रीकरण होता है और तृतीय-स्तरीय क्षेत्रों में त्वरित अस्पताल अवसंरचना के बिना ही प्रारंभिक रोग-पहचान तथा मातृ-जोखिम आकलन संभव होता है। 
    • सुमन सखी चैटबॉट AI-सक्षम मातृ स्वास्थ्य सेवा का प्रदर्शन करता है, जो व्हाट्सएप के माध्यम से प्रसव पूर्व देखभाल, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना जैसी योजनाओं पर 24×7 हिंदी मार्गदर्शन प्रदान करता है, जिससे ग्रामीण महिलाओं के लिये स्वास्थ्य अभिगम्यता की बाधाएँ कम होती हैं।
    • इसके साथ ही, ASHA कार्यकर्त्ता ‘Shishu Maapan’ जैसे AI-संचालित उपकरणों का उपयोग कर 15-सेकंड के स्मार्टफोन वीडियो से नवजात शिशुओं के मानक माप (वज़न, लंबाई, सिर की परिधि) को रिकॉर्ड कर रही हैं। 
  • जलवायु- सहिष्णुता और भू-स्थानिक निगरानी: भारत चरम मौसम का पूर्वानुमान लगाने और पारिस्थितिक संपत्तियों की निगरानी करने के लिये उच्च-विश्वसनीयता वाली मशीन लर्निंग को लागू कर रहा है, जिससे राष्ट्रीय रणनीति को पुनर्प्राप्ति से निवारक शमन की ओर स्थानांतरित किया जा रहा है। 
    • ये भू-स्थानिक मॉडल जटिल डेटा को संसाधित करके पारंपरिक नियतात्मक प्रणालियों की तुलना में स्थानीय बाढ़ या सूखे की अधिक सटीक पूर्वानुमान करते हैं, जिससे कमज़ोर तटीय अर्थव्यवस्थाओं की रक्षा होती है। 
    • उदाहरण के लिये, भूप्रहारी (BhuPRAHARI ) मंच, MGNREGA के तहत निर्मित संपत्तियों की निगरानी के लिये AI और भू-स्थानिक प्रौद्योगिकियों को एकीकृत करता है। अब इस मंच का उपयोग विकसित भारत-रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM G) के तहत निर्मित संपत्तियों की निगरानी के लिये किया जाएगा।
    • भारत पूर्वानुमान प्रणाली (BharatFS) जलवायु परिवर्तन के प्रति समुत्थानशीलता के लिये कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रदर्शन करती है, जो गाँवों के स्तर पर 6 किलोमीटर के रिज़ॉल्यूशन के साथ 10 दिन पहले तक की वर्षा का पूर्वानुमान प्रदान करती है। 
  • AI-संचालित कौशल विकास और मानव पूंजी: संस्थागत ढाँचे AI-संचालित व्यक्तिगत शिक्षण का उपयोग करके राष्ट्रीय कार्यबल को गहन तकनीकी मांगों के अनुरूप बना रहे हैं, जिससे द्वितीय और तृतीय स्तर के शहरों में कौशल अंतर को कम किया जा रहा है। 
    • यह सक्रिय रणनीति सुनिश्चित करती है कि भारत का जनांकिकीय लाभांश आर्थिक अप्रचलन का सामना करने के बजाय विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्द्धी, AI-कुशल प्रतिभा भंडार बन जाए। 
    • केंद्रीय बजट 2025-26 में बढ़ते GCC इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिये शिक्षा में AI के उत्कृष्टता केंद्र के लिये ₹500 करोड़ आवंटित किये गए हैं।
      • इसके अलावा, बजट 2026 में शिक्षा, रोज़गार एवं उद्यम सृजन के बीच संबंध को मज़बूत करने के लिये एक उच्च-शक्तिशाली 'शिक्षा से रोज़गार और उद्यम' स्थायी समिति के गठन का प्रस्ताव रखा गया था।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिये रणनीतिक सहयोग: भारत ने महत्त्वपूर्ण खनिजों से लेकर उन्नत अर्द्धचालक निर्माण तक, संपूर्ण कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रौद्योगिकी स्टैक को सह-सुरक्षित करने के लिये अमेरिका के नेतृत्व वाली पैक्स सिलिका पहल में औपचारिक रूप से शामिल हो गया है।
    • यह कदम गुटनिरपेक्षता से हटकर 'विश्वसनीय व्यापार' प्रतिमान की ओर एक परिवर्तन का प्रतीक है, जो यह सुनिश्चित करता है कि भारत न केवल एक उपभोक्ता है बल्कि वैश्विक सिलिकॉन आपूर्ति शृंखला में एक प्राथमिक विनिर्माण केंद्र भी है।

इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 से मुख्य निष्कर्ष

  • वैश्विक भागीदारी और सहमति: 88 देशों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर नई दिल्ली घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर किये। 
    • हस्ताक्षरकर्त्ताओं में अमेरिका, चीन और फ्राँस जैसी प्रमुख AI शक्तियाँ शामिल थीं।
      • घोषणा-पत्र में निम्नलिखित बातों पर बल दिया गया है:
        • स्वैच्छिक, गैर-बाध्यकारी प्रतिबद्धताएँ
        • कृत्रिम बुद्धिमत्ता का 'लोकतांत्रिक प्रसार'
        • आर्थिक संवृद्धि और सामाजिक कल्याण के लिये AI का उपयोग
    • यह शिखर सम्मेलन उस शृंखला की अगली कड़ी है जो वर्ष 2023 में बैलेचली पार्क डिक्लेरेशन (UK) में शुरू हुई थी, जिसके बाद सियोल (2024) और पेरिस (2025) में इसका आयोजन किया गया।  
      • भारत के प्रधानमंत्री ने फ्राँस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन के साथ मिलकर वर्ष 2025 के पेरिस सम्मेलन की सह-अध्यक्षता की।
  • नई दिल्ली घोषणा: इस घोषणा में कई संस्थागत तंत्रों की रूपरेखा दी गई है:
    • ग्लोबल AI इम्पैक्ट कॉमन्स: AI के उपयोग के मामलों का एक साझा डेटाबेस, जिसे देश के द्वारा स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अपनाया जा सके।
    • ट्रस्टेड AI कॉमन्स: सुरक्षित AI सिस्टम के लिये बेंचमार्क, टूल और सर्वोत्तम प्रथाओं का भंडार।
    • विज्ञान संस्थानों के लिये AI का अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क: अनुसंधान सहयोग के लिये वैश्विक तकनीकी संस्थानों को जोड़ना।
    • AI कार्यबल विकास प्लेबुक: पुनर्कौशल प्रदान करने और भविष्य के कार्यबल को तैयार करने के लिये ढाँचा।
    • सामाजिक सशक्तीकरण के लिये AI प्लेटफॉर्म: समावेशन और विकासात्मक अनुप्रयोगों पर केंद्रित।
  • निवेश घोषणाएँ
    • कुल प्रतिबद्धताएँ: AI में कुल निवेश के रूप में 250 बिलियन डॉलर
      • अत्याधुनिक गहन प्रौद्योगिकी अनुसंधान के लिये 20 अरब डॉलर
  • भारत की घरेलू स्थिति: भारत को AI अवसंरचना और नवोन्मेष केंद्र के रूप में प्रस्तुत किया गया।
    • मुख्य क्षेत्र: स्वास्थ्य सेवा, कृषि, शिक्षा
    • सर्वम AI द्वारा भारत के पहले स्वदेशी रूप से प्रशिक्षित मल्टी-बिलियन पैरामीटर LLM मॉडल का शुभारंभ।

अन्य प्रमुख AI शिखर सम्मेलन

  • AI एक्शन समिट, पेरिस (फरवरी 2025): इसने विकासशील देशों को 'डिजिटल नव-उपनिवेशवाद' से बचाते हुए सॉवरेन कंप्यूटिंग क्षमता विकसित करने में सहायता करने के लिये 'सार्वजनिक हित AI प्लेटफॉर्म' का सफलतापूर्वक शुभारंभ किया।
  • AI सियोल शिखर सम्मेलन, दक्षिण कोरिया (मई 2024): पिछले सुरक्षा ढाँचों पर आधारित इस शिखर सम्मेलन ने सुरक्षा के साथ-साथ 'नवोन्मेष और समावेशिता' को प्राथमिकता दी, जिसके परिणामस्वरूप ऐतिहासिक 'सियोल घोषणा' हुई।
  • GPAI नई दिल्ली शिखर सम्मेलन, भारत (दिसंबर 2023): भारत ने इस शिखर सम्मेलन का उपयोग 'डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर' (DPI) को लोकतांत्रिक AI पहुँच के प्राथमिक साधन के रूप में स्थापित करने के लिये किया।
  • AI सुरक्षा शिखर सम्मेलन, ब्लेचली पार्क (नवंबर 2023): ऐतिहासिक 'बैलेचली पार्क डिक्लेरेशन' के साथ, जिसमें यह स्वीकार किया गया कि उन्नत AI 'अस्तित्वगत जोखिम' उत्पन्न करता है जिसके लिये वैश्विक निगरानी की आवश्यकता है। 

भारत को अपनी विकास यात्रा में AI का लाभ उठाने में किन प्रमुख मुद्दों का सामना करना पड़ रहा है? 

  • कंप्यूटर अवसंरचना की भारी कमी: AI उपभोक्ता से AI निर्माता बनने की भारत की महत्त्वाकांक्षा उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटर अवसंरचना की भारी कमी के कारण गंभीर रूप से बाधित है। 
    • एक मज़बूत, सॉवरेन हार्डवेयर इकोसिस्टम के बिना, राष्ट्र को दीर्घकालिक डिजिटल उपनिवेशीकरण और वैश्विक हाइपरस्केलर्स के हाथों तकनीकी स्वायत्तता खोने का खतरा है। 
    • उदाहरण के लिये, विश्व की लगभग 20% डेटा खपत उत्पन्न करने के बावजूद, भारत में वर्तमान में ग्लोबल डेटा सेंटर क्षमता का 5% से भी कम हिस्सा है। 
  • AI कार्यबल कौशल अंतर की गंभीर समस्या: उद्यम क्षेत्रों में AI के तीव्र एकीकरण ने मानव की तकनीकी तत्परता को स्पष्ट रूप से अप्रासंगिक बना दिया है, जिससे घरेलू श्रम बाज़ार में रोज़गार की दृष्टि से एक गंभीर अंतर उत्पन्न हो गया है। 
    • हालाँकि भारत में पारंपरिक IT स्नातकों की संख्या काफी अधिक है, लेकिन शैक्षणिक पाठ्यक्रम में संरचनात्मक रूप से उन्नत मशीन लर्निंग और मूलभूत मॉडल विकास के लिये आवश्यक व्यावहारिक, डोमेन-विशिष्ट प्रशिक्षण का अभाव है।
    • उद्योग जगत के अनुमानों से संकेत मिलता है कि भारत का AI क्षेत्र वर्ष 2027 तक 23 लाख से अधिक रोज़गार के अवसर का सृजन करेगा, फिर भी योग्य प्रतिभाओं की संख्या केवल 12 लाख तक ( बैन एंड कंपनी द्वारा जारी शोध आँकड़ों के अनुसार) पहुँचने की उम्मीद है।
  • ऊर्जा की बढ़ती मांग और ग्रिड पर बढ़ता दबाव: AI-युक्त, उच्च घनत्व वाले डेटा केंद्रों के प्रबल विस्तार से भारत के राष्ट्रीय विद्युत ग्रिड और नाज़ुक पर्यावरणीय संसाधनों पर गंभीर दबाव पड़ रहा है। 
    • उन्नत AI मॉडल को प्रशिक्षित करने और संचालन के लिये भारी मात्रा में बिजली एवं शीतलन हेतु जल की आवश्यकता होती है, जो देश के आक्रामक डीकार्बोनाइज़ेशन तथा स्थिरता लक्ष्यों के साथ सीधे तौर पर विरोधाभास उत्पन्न करता है। 
    • भारतीय डेटा केंद्रों से बिजली की खपत में वर्ष 2024 में 10-15 TWh से बढ़कर वर्ष 2030 तक 40-45 TWh तक भारी वृद्धि होने का अनुमान है।
      • महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे उच्च विकास वाले डिजिटल कॉरिडोर में प्रत्येक में 2-3 गीगावाट की चरम मांग जुड़ने की उम्मीद के साथ, AI बुनियादी ढाँचे के विकास की गति नए स्वच्छ बिजली उत्पादन की तुलना में तीव्रता से बढ़ रही है।
  • डीपफेक और सूचना की सत्यता का क्षरण: जनरेटिव AI के लोकतंत्रीकरण ने अत्यधिक यथार्थवादी कृत्रिम मीडिया में वृद्धि को उत्प्रेरित किया है, जो मौलिक रूप से लोकतांत्रिक अखंडता, व्यक्तिगत निजता और सार्वजनिक विश्वास के लिये खतरा है। 
    • डीपफेक, वॉयस क्लोन और जाली दस्तावेज़ों का प्रसार पारंपरिक कंटेंट मॉडरेशन से कहीं आगे निकल चुका है, जिसका दुष्प्रभाव विशेषतः संवेदनशील वर्गों पर वित्तीय धोखाधड़ी एवं गैर-सहमति वाली छवियों के रूप में पड़ता है। 
    • हालिया ऑनलाइन सर्वेक्षणों के अनुसार 75% से अधिक भारतीयों ने डीपफेक देखे हैं तथा कम-से-कम 38% किसी न किसी डीपफेक घोटाले का लक्ष्य बने हैं (McAfee)। 
    • इस संकट को कम करने के लिये सख्त मध्यस्थ दायित्व लागू करने और स्टार्टअप्स द्वारा निर्भर ओपन-सोर्स नवोन्मेष पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित करने के बीच एक अत्यंत सूक्ष्म नियामक संतुलन की आवश्यकता है। 
  • स्थानीय भाषा के डेटा की कमी और भाषाई पूर्वाग्रह: भारत के विशाल भाषाई परिदृश्य में उच्च गुणवत्ता वाले, डिजिटलीकृत प्रशिक्षण डेटा की गंभीर कमी के कारण वास्तव में स्वतंत्र AI मॉडल विकसित करना बहुत मुश्किल है।
    • क्योंकि मूलभूत वैश्विक मॉडल मुख्य रूप से पश्चिमी, अंग्रेज़ी-केंद्रित डेटासेट पर प्रशिक्षित होते हैं, इसलिये भारत में उनके अनुप्रयोग के परिणामस्वरूप प्रायः प्रासंगिक भ्रांतियाँ और गहन ‘कॉन्टेक्स्चुअल हैल्यूसिनेशन’ उत्पन्न होते हैं। 
      • परिणामस्वरूप, यदि इन पूर्वाग्रहों को दूर नहीं किया जाता है, तो क्षेत्रीय बोलियों का उपयोग करने वाली उपेक्षित आबादी को डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे तथा उभरती डिजिटल अर्थव्यवस्थाओं से एल्गोरिदम के माध्यम से अपवर्जित किये जाने का खतरा है। 
    • यद्यपि सर्वम AI ने भारतीय भाषाओं पर प्रशिक्षित 30 बिलियन और 105 बिलियन पैरामीटर वाले स्वदेशी LLM का निर्माण किया, फिर भी डिजिटाइज्ड स्थानीय भाषा के डेटा की विशाल मात्रा अंग्रेज़ी रिपॉजिटरी से काफी पीछे है। 
      • तृतीय स्तर के और ग्रामीण उपयोगकर्त्ताओं के लिये सटीक एल्गोरिदम तर्क सुनिश्चित करने के लिये डेवलपर्स को क्षेत्रीय डेटासेट को मैन्युअल रूप से क्यूरेट करने, क्लीन करने तथा डिजिटाइज़ करने में अत्यधिक उच्च लागत तथा लंबी समय-सीमा का सामना करना पड़ता है।
  • वेंचर कैपिटल का संकेंद्रण और फंडिंग असंतुलन: भारत का AI स्टार्टअप इकोसिस्टम फंडिंग में भारी असंतुलन से ग्रस्त है, जहाँ वेंचर कैपिटल कुछ चुनिंदा हाई-प्रोफाइल जनरेटिव AI फर्मों के बीच अत्यधिक केंद्रित है, जबकि प्रारंभिक चरण के स्टार्टअप संघर्ष कर रहे हैं। 
    • यह वित्तीय अड़चन छोटे नवप्रवर्तकों को अपने प्रोटोटाइप का विस्तार करने से रोकती है, जिससे घरेलू AI परिदृश्य पर प्रभावी रूप से एकाधिकार हो जाता है तथा विविध तकनीकी प्रगति विफल हो जाती है। 
    • इसके अलावा, बजट 2026 में भारत AI मिशन के लिये आवंटन को इस वित्तीय वर्ष के 2,000 करोड़ रुपये से घटाकर सत्र 2026-27 में 1,000 करोड़ रुपये करने के निर्णय ने देश के AI को बढ़ावा देने के प्रयासों पर चिंताएँ बढ़ा दी हैं।
  • हार्डवेयर पर निर्भरता और भू-राजनीतिक भेद्यता: कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिये भारत की व्यापक आर्थिक रणनीति उन्नत सेमीकंडक्टर चिप्स और विशेष एक्सेलरेटर्स के लिये अत्यधिक एकाधिकार वाली वैश्विक आपूर्ति शृंखला पर गंभीर रूप से निर्भर है। 
    • भारत वर्तमान में अपने तेज़ी से विस्तृत होते इलेक्ट्रॉनिक्स बाज़ार की ज़रूरतों को पूरा करने के लिये चीन, ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों से या उनके माध्यम से अपने अर्द्धचालकों का लगभग 90-95% आयात करता है।
    • घरेलू स्तर पर उच्च स्तरीय ग्राफिक प्रोसेसिंग यूनिट (GPU) का निर्माण करने में असमर्थता देश को अंतर्राष्ट्रीय निर्यात नियंत्रणों, भू-राजनीतिक प्रतिबंधों एवं सक्रिय मूल्य निर्धारण की गतिशीलता के प्रति संवेदनशील बनाती है। 
      • हार्डवेयर सॉवरेनिटी की इस मूलभूत असमर्थता का अर्थ है कि— भारत प्रमुख AI प्रौद्योगिकी का निवल आयातक बना हुआ है, जिससे वैश्विक मंच पर इसकी रणनीतिक स्वायत्तता गंभीर रूप से कमज़ोर हो गई है। 
  • नियामक मुद्दे और अनुपालन संबंधी बाधाएँ: कल्याण वितरण (DPI) के लिये सरकारी निर्णय लेने में AI के एकीकरण में 'एक्सप्लेनेबल AI' (XAI) की कमी है, जिससे 'एल्गोरिदम एक्सक्लूशन' की उच्च दर होती है, जहाँ अपारदर्शी कोड वैध लाभार्थियों को सहायता से वंचित कर देता है।
    • इसके अलावा, एक एकीकृत, पूर्वानुमानित विधिक ढाँचे के अभाव में, बहुराष्ट्रीय और घरेलू कंपनियों को उच्च अनुपालन लागत तथा मुकदमेबाज़ी के जोखिमों का सामना करना पड़ता है, जिससे संभावित विदेशी प्रत्यक्ष निवेश पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। 
    • डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) अधिनियम के लागू होने के साथ-साथ सिंथेटिक मीडिया के लिये वर्ष 2026 के नए IT नियमों के सख्त होने से डेवलपर्स के लिये अनुपालन का बोझ काफी बढ़ गया है। 
    • वर्ष 2026 में तकनीकी उद्योग से जुड़े संगठन डेटा स्वामित्व और बौद्धिक संपदा अंतरण से संबंधित गंभीर अस्पष्टताओं को दूर करने के लिये स्पष्ट विधायी सुरक्षित प्रावधानों तथा एक केंद्रीकृत राष्ट्रीय AI नियामक ढाँचे के लिये सक्रिय रूप से याचिका दायर कर रहे हैं।
  • छद्म-नवोन्मेष- 'इम्पोर्ट-एंड-रीब्रांड' संकट: भारत एक बढ़ती हुई चुनौती का सामना कर रहा है जहाँ शैक्षणिक संस्थान वास्तविक गहन-तकनीकी अनुसंधान एवं विकास की तुलना में ऑप्टिकल 'फर्स्ट' और मात्रा-आधारित मापदंडों को प्राथमिकता देते हैं, जिससे तैयार विदेशी प्रौद्योगिकी को घरेलू नवोन्मेष के रूप में रीब्रांड किया जा रहा है। 
    • 'छद्म-नवोन्मेष (Pseudo-Innovation)' की यह प्रवृत्ति आत्मनिर्भरता का एक भ्रामक नैरेटिव गढ़ती है, जबकि वास्तविक इंजीनियरिंग क्षमताओं को बाधित करती है तथा भारत के बढ़ते 'मेक इन इंडिया' AI पारिस्थितिकी तंत्र की अखंडता को क्षीण करती है।
    • उदाहरण के लिये, फरवरी 2026 में, गलगोटिया यूनिवर्सिटी को AI समिट एक्सपो से हटने का आदेश दिया गया, जब यह सामने आया कि चीनी-निर्मित ‘Unitree Go2’ रोबोटिक कुत्ते को ‘Orion’ नाम देकर स्वदेशी विकास के रूप में प्रस्तुत किया गया था।

भारत के विकास के लिये कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रभावी ढंग से उपयोग करने के लिये किन उपायों की आवश्यकता है? 

  • फेडरेटेड GPU क्लस्टर्स के माध्यम से सॉवरेन कंप्यूटिंग का लोकतंत्रीकरण: भारत को विकेंद्रीकृत सार्वजनिक–निजी भागीदारी पर आधारित संघीकृत कंप्यूटिंग क्लस्टर स्थापित करने चाहिये, ताकि डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिये पूंजीगत अवरोध समाप्त किये जा सकें।
    • यह मॉडल हार्डवेयर लागतों का सामाजिककरण करता है और आंशिक GPU एक्सेस के माध्यम से स्वदेशी उद्यमों को विदेशी मॉडलों पर निर्भरता से मुक्त करते हुए सॉवरेन एल्गोरिदमिक विकास की ओर संक्रमण में सक्षम बनाता है।  
  • भाषाई समानता के लिये विकेंद्रीकृत स्थानीय डेटा ट्रस्टों को अनिवार्य बनाना: समुदाय-स्वामित्व वाले, क्रिप्टोग्राफिक रूप से सुरक्षित डेटा ट्रस्ट्स को परिचालन में लाने से भाषाई पूर्वाग्रहों का समाधान होगा, क्योंकि ये मज़बूत बौद्धिक संपदा संरक्षण के साथ उच्च-गुणवत्ता वाले क्षेत्रीय डेटासेट्स का संकलन करते हैं। 
    • स्थानीय भाषा डेटा को सार्वजनिक हित के रूप में मान्यता देने से ग्रामीण आबादी के लिये एल्गोरिदमिक तर्क की शुद्धता सुनिश्चित होगी तथा वैश्विक प्रशिक्षण की शोषणकारी प्रवृत्तियों पर अंकुश लगेगा।
  • एल्गोरिदम ऑडिटिंग के लिये एजाइल रेगुलेटरी सैंडबॉक्स की स्थापना: बड़े पैमाने पर AI अनुप्रयोगों को लागू करने से पहले, क्षेत्र-विशिष्ट रेगुलेटरी सैंडबॉक्स को तैनात किया जाना चाहिये ताकि उच्च जोखिम वाले AI अनुप्रयोगों की गतिशील ऑडिटिंग एवं स्ट्रेस-टेस्टिंग को लागू किया जा सके। 
    • यह अनुकूली शासन मॉडल अंतर्निहित पक्षपातों को पूर्व-स्तर पर ही निष्प्रभावी करता है और घरेलू स्टार्टअप पारितंत्र की दक्षता को बाधित किये बिना संवैधानिक समानता सुनिश्चित करता है।  
  • मुख्य व्यावसायिक ढाँचों में AI माइक्रो-क्रेडेंशियलिंग को एकीकृत करना: राष्ट्रीय कौशल ढाँचों को अति-मॉड्यूलर AI माइक्रो-क्रेडेंशियल्स की ओर उन्मुख होना चाहिये, जिनका फोकस ‘प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग’ और ‘ह्यूमन-इन-द-लूप’ कार्यप्रवाहों पर हो।
    • यह निरंतर संज्ञानात्मक कौशल-उन्नयन एल्गोरिद्मिक अप्रचलन की संभावना को कम करता है और जनांकिकीय लाभांश को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्द्धी तथा AI-सक्षम प्रतिभा-भंडार में रूपांतरित करता है।
  • ग्रिड-अनुकूल अवसंरचना के लिये हरित AI जनादेश लागू करना: सभी AI डेटा केंद्रों के लिये तरल शीतलन दक्षता और कैप्टिव नवीकरणीय ऊर्जा को अनिवार्य करने से डिजिटल विकास को तीव्र पारिस्थितिक एवं ग्रिड दबाव से अलग किया जा सकेगा। 
    • गणनात्मक रूप से कुशल, कम-पैरामीटर वाले मॉडलों को प्राथमिकता देकर, भारत जल संसाधनों एवं राष्ट्रीय डी-कार्बोनाइज़ेशन लक्ष्यों को जोखिम में डाले बिना अपने सॉवरेन कंप्यूटिंग क्षमता का विस्तार कर सकता है।
  • ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा ट्राइएज के लिये एज AI प्रोटोकॉल का मानकीकरण: अंतर-संचालनीय एज AI आर्किटेक्चर का मानकीकरण शून्य कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों में प्वाइंट-ऑफ-केयर उपकरणों पर विशेषज्ञ-स्तरीय निदान में सहायता करता है।
    • संगणना को उपकरण-स्तर पर स्थानांतरित करने से ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं का लोकतंत्रीकरण होता है तथा प्रतिक्रियात्मक उपचार एक एल्गोरिदमिक-समर्थित, सक्रिय सुरक्षा-संजाल में परिवर्तित होता है।
  • जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता बढ़ाने के लिये ओपन-एक्सेस जियोस्पेशियल API का उपयोग: राज्य द्वारा अनुरक्षित, ओपन-एक्सेस वाले जियोस्पेशियल मशीन-लर्निंग API उपलब्ध कराने से स्थानीय प्रशासकों को  मौसम संबंधी असामान्यताओं पर वास्तविक-काल में पूर्वानुमानित जानकारी प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।
    • यह लोकतांत्रिक विश्लेषण क्षमता राष्ट्रीय जलवायु रणनीति को महँगी आपदा-पश्चात पुनर्प्राप्ति से हटाकर सटीक, एल्गोरिदमिक-निर्देशित अग्रिम समुत्थानशीलता की ओर ले जाती है।  
  • डीप-टेक के लिये संप्रभु मिश्रित वित्त वाहनों की संरचना: भारत को कृषि विज्ञान और शिक्षा जैसे हार्डवेयर-प्रधान, कम मार्जिन वाले AI क्षेत्रों के लिये धैर्यशील पूंजी (Patient Capital) उपलब्ध कराने हेतु संप्रभु मिश्रित वित्त वाहनों को तैनात करना चाहिये। 
    • राज्य समर्थित निधियों का उपयोग करके लंबे विकास चक्रों के जोखिम को कम करने से निजी संस्थागत निवेश आकर्षित होता है तथा AI क्षेत्र में एकाधिकारवादी ठहराव को रोका जा सकता है।

निष्कर्ष: 

भारत की AI यात्रा एक रणनीतिक परिवर्तन है, जो इसे 'डिजिटल पिछड़ा वर्ग' से 'एक संप्रभु तकनीकी महाशक्ति' में परिणत करती है, जैसा कि नई दिल्ली घोषणा 2026 से स्पष्ट है। सार्वजनिक डिजिटल अवसंरचना और स्थानीय भाषाओं में AI को एकीकृत करके, देश ग्लोबल साउथ के लिये समावेशी विकास को पुनर्परिभाषित कर रहा है। हालाँकि इस दृष्टिकोण की दीर्घकालिक सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि तीव्र नवोन्मेष नैतिक शासन को पीछे न छोड़ दे। अंततः, भारत के जनांकिकीय लाभांश और एल्गोरिदम बुद्धिमत्ता के बीच संतुलन बनाने की क्षमता ही वैश्विक प्रौद्योगिकी के अग्रणी निर्माता के रूप में उसकी स्थिति का निर्धारण करेगी।

दृष्टि मेन्स प्रश्न 

“भारत की 'सॉवरेन AI' रणनीति तकनीकी स्वायत्तता की दिशा में एक आवश्यक कदम है, लेकिन हार्डवेयर और ऊर्जा अवसंरचना में गंभीर बाधाओं का सामना कर रही है।” IndiaAI मिशन- 2026 के संदर्भ में इस कथन का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिये।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1. विकास में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की क्या भूमिका है?
उत्पादकता, समावेशिता और शासन की दक्षता को बढ़ाता है।

प्रश्न 2. संप्रभु कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्यों महत्त्वपूर्ण है?
यह तकनीकी निर्भरता और डेटा की असुरक्षा को रोकता है।

प्रश्न 3. AI ग्रामीण भारत की किस प्रकार सहायता करता है?
परिशुद्ध कृषि, स्वास्थ्य सेवा प्राथमिक उपचार और स्थानीय शासन के माध्यम से।

प्रश्न 4. भारत के लिये मुख्य बाधा क्या है?
कंप्यूटर इंफ्रास्ट्रक्चर, कौशल की कमी और ऊर्जा संकट।

प्रश्न 5. नीति की प्राथमिकता क्या है?
कंप्यूटर का लोकतंत्रीकरण, डेटा की समानता और अनुकूली विनियमन।


UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ) 

प्रिलिम्स 

प्रश्न 1. विकास की वर्तमान स्थिति में, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence), निम्नलिखित में से किस कार्य को प्रभावी रूप से कर सकती है? (2020)

  1. औद्योगिक इकाइयों में विद्युत की खपत कम करना 
  2. सार्थक लघु कहानियों और गीतों की रचना 
  3. रोगों का निदान 
  4. टेक्स्ट से स्पीच (Text- to- Speech) में परिवर्तन 
  5. विद्युत ऊर्जा का बेतार संचरण

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये —

(a) केवल 1, 2, 3 और 5

(b) केवल 1, 3 और 4

(c) केवल 2, 4 और 5

(d) 1, 2, 3, 4 और 5

उत्तर: (d) 


मेन्स

प्रश्न 1. कृत्रिम बुद्धि (AI) की अवधारणा का परिचय दीजिये। AI क्लिनिकल निदान में कैसे सहायता करता है? क्या आप स्वास्थ्य सेवा में AI के उपयोग में व्यक्ति की निजता को कोई खतरा महसूस करते हैं?  (2023)