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हिंद-प्रशांत देशों के साथ संबंध आसान नहीं | 10 Jun 2022 | अंतर्राष्ट्रीय संबंध

यह एडिटोरियल 09/06/2022 को ‘द हिंदू’ में प्रकाशित “Dealing with the Indo-Pacific is not Easy” लेख पर आधारित है। इसमें हिंद-प्रशांत क्षेत्र की प्रमुख भू-राजनीतिक चुनौतियों के बारे में चर्चा की गई है।

हाल के समय में प्रमुख विश्व शक्तियों ने अपना ध्यान संघर्ष के अन्य क्षेत्रों से हिंद-प्रशांत महासागर क्षेत्र की ओर स्थानांतरित किया है। इसका सबसे प्रमुख कारण दक्षिण चीन सागर में चीन की आक्रामकता है जहाँ वह स्थापित संयुक्त राष्ट्र अभिसमयों और अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानूनों को धता बताते हुए संपूर्ण समुद्री क्षेत्र पर हावी होने की अपनी मंशा प्रकट कर रहा है। 

हिंद-प्रशांत क्षेत्र का वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य क्षेत्र को अस्थिर करने वाले प्रमुख अड़चनों से भरा हुआ है। भविष्य के गहन एकीकरण हेतु आधार तैयार करने और अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत एक अधिकार के रूप में सभी देशों के लिये वैश्विक कल्याण तक एकसमान पहुँच सुनिश्चित करने हेतु साझा मानक स्थापित करने की आवश्यकता है। 

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में हाल की भू-राजनीतिक प्रगति 

क्यों महत्त्वपूर्ण है हिंद-प्रशांत? 

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में मौजूद प्रमुख चुनौतियाँ  

हिंद-प्रशांत की स्थिरता के लिये क्या आवश्यक है? 

अभ्यास प्रश्न:वर्तमान में भारत की भागीदारी रणनीतिक हितों और एक नए सुरक्षा वातावरण के अभिसरण पर निर्मित है। इस रूप में हिंद-प्रशांत क्षेत्र वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति और भूमिका को बढ़ावा देने का अवसर प्रदान कर रहा है।’’ टिप्पणी कीजिये