विश्व क्षयरोग रिपोर्ट 2022: WHO | 29 Oct 2022

प्रिलिम्स के लिये:

तपेदिक, विश्व TB रिपोर्ट, विश्व स्वास्थ्य संगठन, पीएम TB मुक्त भारत अभियान, बीसीजी वैक्सीन, डीआर-TB, एमडीआर-TB

मेन्स के लिये:

विश्व तपेदिक/क्षयरोग रिपोर्ट में भारत का प्रदर्शन, TB को खत्म करने की चुनौतियाँ, TB को खत्म करने में भारत की प्रगति

चर्चा में क्यों?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने हाल ही में विश्व क्षयरोग रिपोर्ट 2022 जारी की, जिसमें दुनिया भर में तपेदिक/क्षयरोग (TB) के निदान, उपचार और बीमारी के बोझ पर कोविड-19 महामारी के प्रभाव को बताया गया है।

  • वर्ष 2022 की रिपोर्ट में WHO के सभी 194 सदस्य राज्यों सहित 215 देशों और क्षेत्रों से बीमारी के रुझान और महामारी की प्रतिक्रिया पर डेटा शामिल है।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष:

  • वैश्विक स्तर पर निदान और मृत्यु दर:
    • वर्ष 2021 में दुनिया भर में लगभग 6 मिलियन लोगों के क्षयरोग का निदान किया गया था, जो वर्ष 2020 की तुलना में 4.5% अधिक था, जबकि इस बीमारी से पीड़ित 1.6 मिलियन रोगियों की मृत्यु हो गई थी।
    • TB से होने वाली कुल मौतों में 187,000 मरीज़ एचआईवी (ह्यूमन इम्युनोडेफिशिएंसी वायरस) पॉजिटिव थे।
      • एचआईवी निगेटिव लोगों में वैश्विक TB से होने वाली मौतों में से लगभग 82% अफ्रीकी और दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रों में हुईं।
    • TB से पीड़ित रिपोर्ट की गई लोगों की संख्या वर्ष 2019 के 7.1 मिलियन से घटकर वर्ष 2020 में 5.8 मिलियन हो गई।
      • वर्ष 2021 में आंशिक रिकवरी 6.4 मिलियन थी, लेकिन यह अभी भी पूर्व-महामारी के स्तर से काफी नीचे थी।

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  • भारत और TB:
    • 28% मामलों के साथ भारत उन आठ देशों में शामिल था, जहाँ कुल TB रोगियों की संख्या के दो-तिहाई (68.3%) से अधिक थे।
      • अन्य देशों में इंडोनेशिया (9.2%), चीन (7.4%), फिलीपींस (7%), पाकिस्तान (5.8%), नाइजीरिया (4.4%), बांग्लादेश (3.6%) और डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (2.9%) शामिल थे।
    • एचआईवी निगेटिव लोगों में वैश्विक TB से संबंधित मौतों का 36% हिस्सा भारत का है।
    • भारत उन तीन देशों (इंडोनेशिया और फिलीपींस के साथ) में से एक था, जिसने वर्ष 2020 में इस रोग में सबसे अधिक कमी (वैश्विक का 67%) और 2021 में आंशिक रिकवरी की।
    • रिपोर्ट पर भारत का रुख: भारत ने समय के साथ अन्य देशों की तुलना में प्रमुख मीट्रिक्स पर बेहतर प्रदर्शन किया है।
      • वर्ष 2021 में भारत में TB मरीज़ों की संख्या प्रति 100,000 जनसंख्या पर 210 रही जो कि वर्ष 2015 में ( प्रति 100,000 जनसंख्या पर 256 थी)।
      • इस संबंध में भारत में 18% की गिरावट (7 अंक) हुई है; घटना दर के मामले में भारत का 36वाँ स्थान, 11% के वैश्विक औसत से बेहतर है।
  • TB उन्मूलन के लिये प्रमुख चुनौतियाँ:
    • दवा प्रतिरोधी TB में वृद्धि:
      • दवा प्रतिरोधी TB (डीआर-TB) का दबाव वर्ष 2020 और 2021 के बीच वैश्विक स्तर पर 3% बढ़ गया, वर्ष 2021 में रिफैम्पिसिन-प्रतिरोधी TB (आरआर-TB) के 450,000 नए मामले सामने आए।
    • कोविड-19 के कारण व्यवधान:
      • कई वर्षों में यह पहली बार है कि TB और डीआर-TB दोनों ही में लोगों की संख्या में वृद्धि हुई है। विशेषज्ञ इस प्रवृत्ति का कारण कोविड-19 महामारी को मानते हैं।
      • वर्ष 2021 में कोविड-19 के कारण कई सेवाएँ बाधित हुईं लेकिन TB प्रतिक्रिया पर इसका प्रभाव विशेष रूप से गंभीर रहा है।
    • कम रिपोर्ट दर्ज होना मुख्य चिंता:
      • TB के अनुमानित मरीज़ों की संख्या और बीमारी से पीड़ित लोगों की रिपोर्ट की गई संख्या के बीच वैश्विक अंतर का 75% सामूहिक रूप से दस देशों का है। इस अंतर का कारण हैैं:
      • कम रिपोर्टिंग (TB से पीड़ित लोगों की)।
      • अंडरडायग्नोसिस (TB वाले लोग स्वास्थ्य देखभाल तक पहुँचने में असमर्थ होते हैं या ब वे ऐसा करते हैं तो उनका निदान नहीं किया जाता है)।
      • भारत में कम रिपोर्टिंग एक समस्या है; भारत शीर्ष पाँच योगदानकर्त्ताओं में शामिल है - भारत (24%), इंडोनेशिया (13%), फिलीपींस (10%), पाकिस्तान (6.6%) और नाइजीरिया (6.3%)
    • निदान और व्यय में गिरावट:
      • रिपोर्ट किये गए TB के मामलों में कमी से पता चलता है कि गैर-निदान और अनुपचारित TB वाले लोगों की संख्या में वृद्धि हुई है।
      • वर्ष 2019 और 2020 के बीच RR-TB एवं मल्टीड्रग-रेसिस्टेंट TB (MDR-TB) के इलाज के लिये उपलब्ध कराए गए लोगों की संख्या में भी गिरावट आई है।
        • वर्ष 2021 में RR-TB के लिये उपचार प्राप्त करने वाले लोगों की संख्या 161,746 थी, जो कि ज़रूरतमंद लोगों में से तीन में से केवल एक है।
      • रिपोर्ट में आवश्यक TB सेवाओं पर वैश्विक खर्च वर्ष 2019 के 6 बिलियन अमेरिकी डॉलर से गिरकर वर्ष 2021 में  4 बिलियन अमेरिकी डॉलर होने का भी उल्लेख किया गया है, जो वर्ष 2022 तक सालाना 13 बिलियन अमेरिकी डॉलर के वैश्विक लक्ष्य के आधे से भी कम है।

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तपेदिक (Tuberculosis-TB):

  • परिचय:
    • TB माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक जीवाणु के कारण होता है, जो लगभग 200 सदस्यों वाले माइकोबैक्टीरियासी परिवार से संबंधित है।
    • मनुष्यों में TB सबसे अधिक फेफड़ों (फुफ्फुसीय TB) को प्रभावित करता है, लेकिन यह अन्य अंगों (अतिरिक्त-फुफ्फुसीय TB) को भी प्रभावित कर सकता है। यह हवा के ज़रिये एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है।
    • बीमारी विकसित होने वाले अधिकांश लोग वयस्क हैं- 2021 में TB के बोझ में पुरुषों ने 56.5%, वयस्क महिलाओं ने 32.5% और बच्चों ने 11% का योगदान था।
    • TB को रोका जा सकता है और इसका इलाज किया जा सकता है, लगभग 85% लोग जो इस बीमारी को विकसित करते हैं, उनका 4/6-महीने की दवा के साथ सफलतापूर्वक इलाज किया जा सकता है।
  • TB उन्मूलन हेतु भारत की पहल:
    • प्रधानमंत्री TB मुक्त भारत अभियान के तहत भारत का लक्ष्य वर्ष 2025 तक देश से TB को खत्म करना है (2030 के वैश्विक लक्ष्य से 5 साल पहले)।
      • नि-क्षय मित्र इस पहल का एक घटक है जो TB के इलाज के लिये अतिरिक्त निदान, पोषण और व्यावसायिक सहायता सुनिश्चित करता है।
    • भारत देश में TB के वास्तविक बोझ का आकलन करने के लिये अपना स्वयं का राष्ट्रीय TB प्रसार सर्वेक्षण आयोजित करता है जो कि दुनिया का अब तक का सबसे बड़ा ऐसा सर्वेक्षण है।
    • वर्तमान में TB के लिये दो टीके VPM (Vakzine Projekt Management) 1002 और MIP (Mycobacterium Indicus Pranii) विकसित और पहचाने गए हैं, जिनका नैदानिक परीक्षण चल रहा है।

नोट:

  • TB के विनाशकारी स्वास्थ्य, सामाजिक और आर्थिक परिणामों के बारे में जागरूकता फैलाने और विश्व स्तर पर TB महामारी को समाप्त करने के प्रयास के लिये 24 मार्च को विश्व तपेदिक (TB) दिवस मनाया जाता है।
  • बैसिल कैलमेट-गुएरिन (बीसीजी) वैक्सीन वर्तमान में TB की रोकथाम के लिये उपलब्ध एकमात्र टीका है।

आगे की राह

  • रिपोर्ट में देशों से आवश्यक TB सेवाओं तक पहुँच बहाल करने के लिये तत्काल उपाय करने के आह्वान को दोहराया गया है।
    • इसमें TB महामारी और उसके सामाजिक आर्थिक प्रभाव को प्रभावित करने वाले व्यापक निर्धारकों को संबोधित करने के लिये निवेश बढ़ाने, बहु-क्षेत्रीय कार्रवाई के साथ-साथ नए निदान, दवाओं और टीकों की आवश्यकता का भी आह्वान किया गया है।
  • TB शमन रणनीति को प्रभावी बनाने के लिये, बीमारी के बारे में लोगों की जागरूकता के स्तर को बढ़ाना और यह सुनिश्चित करना महत्त्वपूर्ण है कि TB से प्रभावित लोग अपनी सामाजिक असुरक्षाओं को दूर करें तथा TB देखभाल तक पहुँच बनाएँ।

स्त्रोत: हिंदुस्तान टाइम्स