वेनेज़ुएला में अमेरिकी दखल और पुनः प्रतिपादित मुनरो सिद्धांत | 06 Jan 2026

प्रिलिम्स के लिये: वेनेजुएला, मुनरो सिद्धांत, बहुपक्षवाद, संयुक्त राष्ट्र चार्टर

मेन्स के लिये: मुनरो सिद्धांत और 21वीं सदी में इसकी प्रासंगिकता, ग्लोबल साउथ पर बड़ी शक्तियों की प्रतिद्वंद्विता का प्रभाव

स्रोत: इकॉनोमिक टाइम्स 

चर्चा में क्यों? 

संयुक्त राज्य अमेरिका ने वेनेजुएला में 'ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिज़ॉल्व' नामक एक सैन्य अभियान चलाया, जिसके परिणामस्वरूप राष्ट्रपति निकोलस मादुरो, उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को हिरासत में ले लिया गया। इस कार्रवाई को मुनरो सिद्धांत (1823) के ‘ट्रंप कोरोलरी’ के तहत उचित ठहराया गया, जो लैटिन अमेरिका में अमेरिकी हस्तक्षेपवाद में एक तीव्र वृद्धि का संकेत है।

सारांश

  • वेनेज़ुएला में अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की हिरासत मुनरो सिद्धांत के पुनरुत्थान का संकेत देते हैं, जो पश्चिमी गोलार्द्ध में प्रतिद्वंद्वी शक्तियों का सामना करने और रणनीतिक हितों, विशेष रूप से ऊर्जा संसाधनों की सुरक्षा के लिये अमेरिकी हस्तक्षेपवाद की नवीन प्रवृत्ति को दर्शाता है।
  • भारत के लिये, न्यूनतम व्यापार और तेल आयात में कमी के कारण इस संघर्ष का आर्थिक प्रभाव सीमित है, लेकिन यह रणनीतिक स्वायत्तता, वैश्विक संप्रभुता मानदंडों और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की स्थिरता पर चिंता व्यक्त करता है।

मुनरो सिद्धांत क्या है?

  • परिचय: मुनरो सिद्धांत, जिसे वर्ष 1823 में राष्ट्रपति जेम्स मुनरो द्वारा स्पष्ट किया गया था, निम्नलिखित सिद्धांत स्थापित करता है:
    • औपनिवेशीकरण का विरोध: यूरोपीय शक्तियों को अमेरिकी महाद्वीपों में नवीन उपनिवेश स्थापित नहीं करने चाहिये।
    • हस्तक्षेप का विरोध: पश्चिमी गोलार्द्ध के देशों पर किसी भी बाहरी शक्ति द्वारा प्रभाव डालने या हस्तक्षेप करने के प्रयास को संयुक्त राज्य अमेरिका अपने प्रति शत्रुतापूर्ण कार्रवाई के रूप में देखेगा।
    • यूरोप में अमेरिकी संयम: अमेरिका यूरोपीय युद्धों या आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगा।
  • विकास:
    • रूज़वेल्ट कोरोलरी (1904): राष्ट्रपति थियोडोर रूज़वेल्ट ने मुनरो सिद्धांत का विस्तार करते हुए लैटिन अमेरिकी देशों में पुरानी गलतियों, अस्थिरता या शासन की विफलताओं को दूर करने के लिये ‘अंतर्राष्ट्रीय पुलिस शक्ति’ का प्रयोग करने के अमेरिकी अधिकार की पुष्टि की, जिससे प्रत्यक्ष अमेरिकी हस्तक्षेप को उचित ठहराया गया।
    • शीतयुद्ध काल: क्यूबा, मध्य अमेरिका और दक्षिण अमेरिका में सोवियत प्रभाव का सामना करने के लिये इसका आह्वान किया गया।
    • शीतयुद्धोत्तर काल: बहुपक्षवाद के रूप में इसे काफी हद तक कम महत्त्व दिया गया, जब तक कि हाल में इसका पुनरुत्थान नहीं हुआ।
    • समकालीन चरण: पश्चिमी गोलार्द्ध में अमेरिका के रणनीतिक वर्चस्व को स्थापित करने के उद्देश्य से इस सिद्धांत को चयनात्मक रूप से पुनरुज्जी वित किया गया है, जैसा कि हाल के वर्षों में वेनेज़ुएला के प्रति अपनाई गई नीतियों और कार्रवाइयों में देखा जा सकता है।
      • मुनरो सिद्धांत के लिये ‘ट्रंप कोरोलरी’ को अमेरिकी शक्ति और रणनीतिक प्राथमिकताओं की पुनर्स्थापना के रूप में प्रक्षेपित किया गया है, जिसका उद्देश्य पश्चिमी गोलार्द्ध में अमेरिकी सुरक्षा हितों की रक्षा करना है।

अमेरिका ने वेनेज़ुएला में हस्तक्षेप क्यों किया?

  • नार्को-आतंकवाद और सुरक्षा विमर्श: अमेरिका ने मादुरो तथा वरिष्ठ अधिकारियों पर नार्को-आतंकवाद एवं मादक पदार्थों की तस्करी के आरोप लगाए हैं।अमेरिका ने इस शासन को अपने लिये प्रत्यक्ष सुरक्षा खतरा बताते हुए इसे देश में जारी 'फेंटानिल संकट' (Fentanyl Crisis) से जोड़ा है, जिससे उनके विरुद्ध किसी भी कार्रवाई के लिये एक कानूनी और राजनीतिक औचित्य प्राप्त हो सके।
  • तेल और संसाधन भू-राजनीति: वेनेज़ुएला के पास विश्व के सबसे बड़े प्रमाणित कच्चे तेल का भंडार हैं (300 अरब बैरल से अधिक, यानी वैश्विक प्रमाणित तेल भंडार का लगभग पाँचवा  हिस्सा), फिर भी यह वैश्विक तेल उत्पादन के 1% से भी कम का योगदान देता है।
    • अमेरिकी प्रतिबंधों, आर्थिक संकट और बुनियादी ढाँचे के क्षरण के वर्षों ने उत्पादन को गंभीर रूप से सीमित कर दिया है।
    • अमेरिका वेनेज़ुएला की  तेल अवसंरचना पर नियंत्रण को ऊर्जा सुरक्षा, मूल्य स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों में रणनीतिक प्रभाव के लिये अत्यंत महत्त्वपूर्ण मानता है।
  • क्षेत्रीय बाहरी शक्तियों का मुकाबला: वेनेज़ुएला के चीन, रूस और ईरान के साथ बढ़ते संबंधों को अमेरिका ने पश्चिमी गोलार्द्ध में अपनी प्रभुसत्ता के लिये चुनौती माना, जिससे वॉशिंगटन ने पुनरुज्जीवित मुनरो शैली के ढाँचे के तहत अपनी प्रधानता को दोबारा स्थापित करने का कदम उठाया।
    • हालाँकि अमेरिका–वेनेज़ुएला संघर्ष ने मेक्सिको, कोलंबिया और क्यूबा में गंभीर चिंता उत्पन्न कर दी है, जो इस क्षेत्र में अमेरिकी हस्तक्षेपवाद के नए दौर का संकेत देता है।
      • यह सैन्य दबाव, प्रतिबंधों और नशीली दवाओं व सुरक्षा के नाम पर दिये जाने वाले औचित्यों के माध्यम से संप्रभुता के ह्रास के डर को सामने लाता है।

अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत सैन्य बल का प्रयोग

  • सामान्य प्रतिबंध: संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) के तहत, राज्य किसी अन्य राज्य की क्षेत्रीय अखंडता या राजनीतिक स्वतंत्रता के खिलाफ सैन्य बल का प्रयोग या धमकी देने से वर्जित हैं।
  • आत्मरक्षा: संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत, बल का प्रयोग केवल सशस्त्र हमले के जवाब में किया जा सकता है और यह आवश्यकता तथा अनुपात के अनुसार होना चाहिये। साथ ही की गई कार्रवाई से  UN सुरक्षा परिषद को सूचित करना  अनिवार्य है।
  • पूर्व शत्रु राज्य: संयुक्त राष्ट्र चार्टर का अनुच्छेद 107 कभी द्वितीय विश्वयुद्ध के शत्रु राज्यों के खिलाफ बल प्रयोग की अनुमति देता था, लेकिन अब यह अप्रचलित है।
  • सामूहिक सुरक्षा: अनुच्छेद 24 और 25 के तहत, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को अंतर्राष्ट्रीय शांति के खतरों से निपटने के लिये सामूहिक सैन्य कार्रवाई की अनुमति होती है।
  • मानवीय अभियान: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद शांति स्थापना या मानवीय मिशनों में सीमित बल के उपयोग की अनुमति दे सकती है।

अमेरिका-वेनेजुएला संघर्ष का भारत पर क्या असर होगा?

  • न्यूनतम व्यापार प्रभाव: ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार, यह संघर्ष भारत के व्यापार को लगभग प्रभावित नहीं करेगा, क्योंकि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण द्विपक्षीय वाणिज्य पहले ही बड़े पैमाने पर बंद हो चुका है
    • भारत के वेनेज़ुएला को निर्यात का मूल्य FY 2025 में केवल 95.3 मिलियन अमेरिकी डॉलर था, जिसमें मुख्य रूप से दवा उद्योग का योगदान था।
  • ऊर्जा पर सीमित निर्भरता: भारत का वेनेज़ुएला से कच्चे तेल का आयात FY 2025 में 81.3% घटकर 255.3 मिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया, जबकि FY 2024 में यह 1.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर था।
    • इसका परिणाम यह है कि वर्तमान संघर्ष संक्षिप्त अवधि में भारत की ऊर्जा सुरक्षा को महत्त्वपूर्ण रूप से प्रभावित नहीं करेगा
    • यदि वेनेज़ुएला पर प्रतिबंधों में छूट या संशोधन किया गया तो वहनीय वेनेज़ुएला कच्चा तेल वैश्विक बाज़ार में फिर से आ सकता है, जिससे भारत की दीर्घकालीन कच्चे तेल की आपूर्ति विविधता और खरीद में लचीलापन मज़बूत होगा।
    • इससे भारत की पश्चिम एशियाई आपूर्तिकर्त्ताओं के साथ सौदेबाज़ी  की क्षमता बढ़ेगी और रूसी तेल पर निर्भरता कम करने के लिये अमेरिकी दबाव के बीच एक विकल्प भी उपलब्ध होगा।
  • रणनीतिक स्वतंत्रता: भारत ने लगातार बाहरी सैन्य हस्तक्षेप के बजाय लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के माध्यम से शासन परिवर्तन और गैर-हस्तक्षेप का समर्थन किया है।
    • अमेरिका की कार्रवाई भारत के लिये संतुलन बनाए रखने की चुनौती बन गई है, क्योंकि उसे हस्तक्षेप के खिलाफ ग्लोबल साउथ और अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी के बीच संतुलन बनाए रखना है।

वेनेज़ुएला

  • स्थिति एवं सीमाएँ: वेनेज़ुएला दक्षिण अमेरिका के उत्तरी छोर पर स्थित एक देश है। इसकी तटरेखा कैरिबियन सागर तथा अटलांटिक महासागर से लगी हुई है। इसकी स्थल सीमाएँ पूर्व में गुयाना, दक्षिण में ब्राज़ील तथा दक्षिण-पश्चिम और पश्चिम में कोलंबिया से मिलती हैं।
  • राजनीतिक व्यवस्था एवं राजधानी: यह एक संघीय बहुदलीय गणराज्य है, जिसमें एक सदनीय विधायिका है। कराकास इसकी राजधानी है।
  • प्राकृतिक संसाधन एवं अर्थव्यवस्था: वेनेज़ुएला संसाधन-समृद्ध देश है, जहाँ पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, लौह अयस्क, सोना, बॉक्साइट और हीरे पाए जाते हैं। इसकी अर्थव्यवस्था ऐतिहासिक रूप से तेल पर आधारित रही है।
    • अभी तक का प्रमाणित कच्चे तेल का सबसे बड़ा भंडार वेनेज़ुएला के पास है और यह OPEC का संस्थापक सदस्य भी है, जिससे यह वैश्विक ऊर्जा भू-राजनीति में रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्त्वपूर्ण बन जाता है।
  • भौतिक भूगोल: वेनेज़ुएला में विविध स्थलरूप पाए जाते हैं, जिनमें एंडीज़ पर्वत, मराकाइबो झील, लानोस के मैदान, गुयाना हाइलैंड्स तथा ओरिनोको नदी तंत्र शामिल हैं, जो इसकी पारिस्थितिकी और अर्थव्यवस्था को आकार देते हैं।
    • देश का सर्वोच्च शिखर पिको बोलिवार है और विश्व का सबसे ऊँचा जलप्रपात एंजेल फॉल्स गुयाना हाइलैंड्स में स्थित है।
    • इसकी प्रमुख नदियों में ओरिनोको और रियो नेग्रो शामिल हैं, जबकि मराकाइबो झील दक्षिण अमेरिका की सबसे बड़ी झील है।
  • सांस्कृतिक एवं पारिस्थितिक महत्त्व: वेनेज़ुएला में कैनाइमा राष्ट्रीय उद्यान और एंजेल फॉल्स जैसे यूनेस्को-मान्यता प्राप्त स्थल स्थित हैं, जो इसकी पारिस्थितिक और प्राकृतिक धरोहर को दर्शाते हैं।
  • द्वीप एवं क्षेत्रीय विवाद: यह मार्गरीटा और लॉस रोकेस जैसे कई कैरिबियन द्वीपों का प्रशासन करता है। इसके अतिरिक्त, एसेक्विबो क्षेत्र को लेकर गुयाना के साथ लंबे समय से क्षेत्रीय विवाद चला आ रहा है तथा कोलंबिया के साथ समुद्री विवाद भी मौजूद हैं।

निष्कर्ष

अमेरिका का हस्तक्षेप मुनरो सिद्धांत के एक साहसिक पुनरुत्थान को दर्शाता है, जिसके माध्यम से बाह्य प्रभावों का सामना करने और उभरती वैश्विक बहुध्रुवीय व्यवस्था को चुनौती देने हेतु अमेरिकी प्रभुत्व को पुनः स्थापित करने का प्रयास किया गया है। यद्यपि इसका उद्देश्य लोकतंत्र की बहाली बताया जाता है, फिर भी यह एकतरफा कार्रवाई लैटिन अमेरिका में अस्थिरता बढ़ा सकती है और ग्लोबल साउथ में संप्रभुता से संबंधित गंभीर समस्या उत्पन्न कर सकती है।

दृष्टि मेन्स प्रश्न:

प्रश्न: 21वीं सदी में मुनरो सिद्धांत का पुनरुत्थान उभरती बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के लिये एक चुनौती प्रस्तुत करता है। चर्चा कीजिये।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. मुनरो सिद्धांत क्या है?
यह 1823 की अमेरिकी विदेश नीति का सिद्धांत है, जो पश्चिमी गोलार्द्ध में यूरोपीय उपनिवेशीकरण या  हस्तक्षेप का विरोध करता है और क्षेत्र में अमेरिकी सुरक्षा हितों को सुनिश्चित करता है।

2. मुनरो सिद्धांत में ‘ट्रंप कॉरोलेरी’ क्या है?
यह एक समकालीन व्याख्या है, जो लैटिन अमेरिका में प्रतिद्वंद्वी शक्तियों और प्रतिकूल शासन के विरुद्ध अमेरिकी राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य प्रभुत्व को स्थापित करने की धारणा प्रस्तुत करती है।

3. अमेरिका ने वेनेज़ुएला में हस्तक्षेप क्यों किया?
अमेरिका ने नार्को-आतंकवाद के आरोप, ऊर्जा सुरक्षा संबंधी चिंताएँ और वेनेज़ुएला के चीन, रूस और ईरान से संबंधों को मुख्य औचित्य के रूप में प्रस्तुत किया।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)

प्रिलिम्स 

प्रश्न. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:  (2024)

कथन-I: हाल ही में, वेनेजुएला अपने आर्थिक संकट से तेज़ी से उबरने में सफल हुआ है और अपने लोगों को दूसरे देशों में पलायन/प्रवास करने से रोकने में सफल हुआ है।

कथन-II: वेनेजुएला के पास विश्व के सबसे बड़े तेल भंडार हैं।

उपर्युक्त कथनों के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन-सा सही है ?

(a) कथन-I और कथन-II दोनों सही हैं तथा कथन-II, कथन-I की व्याख्या करता है।

(b) कथन-I और कथन-II दोनों सही हैं, किंतु कथन-II, कथन-I की व्याख्या नहीं करता है।

(c) कथन-I सही है, किंतु कथन-II सही नहीं है।

(d) कथन-I सही नहीं है, किंतु कथन-II सही है।

उत्तर: D