बजट 2026-27 में सतत पर्यटन को बढ़ावा | 27 Feb 2026
प्रिलिम्स के लिये: केंद्रीय बजट 2026-27, बौद्ध सर्किट, स्वदेश दर्शन योजना, पूर्वी घाट, पश्चिमी घाट, टर्टल ट्रेल, पुलीकट झील, ग्लोबल बिग कैट एलायंस, लोथल, धौलावीरा, स्वदेश दर्शन 2.0, प्रसाद, आयुष, उड़ान योजना, देखो अपना देश।
मेन्स के लिये: केंद्रीय बजट 2026-27 में पर्यटन विकास के लिये नवीन पहलों की घोषणा, भारत में पर्यटन विकास से संबंधित चुनौतियाँ और आगे की राह।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय बजट 2026-27 में पर्यटन मुख्य केंद्र बिंदु के रूप में उभरा है, जिसमें सरकार ने इस क्षेत्र को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिये एक विकास के रणनीतिक चालक के रूप में स्थापित किया गया है।
- पर्यटन मंत्रालय के 'इंडिया टूरिज़्म डेटा कॉम्पेंडियम 2025' के अनुसार, भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में पर्यटन क्षेत्र की हिस्सेदारी 5.22% है, जिसमें प्रत्यक्ष हिस्सेदारी 2.72% है, जबकि यह कुल रोज़गार का 13.34% है।
सारांश
- बजट 2026-27 बौद्ध सर्किट, ईको-ट्रेल, ग्लोबल बिग कैट समिट, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी, गाइड करने वालों के कौशल विकास, विरासत स्थलों, मेडिकल हब और पूर्वोदय विकास के साथ पर्यटन को बढ़ावा देता है।
- इस क्षेत्र को बुनियादी ढाँचे की कमी, अत्यधिक भीड़ (गोवा में 1.1 करोड़ पर्यटक) की सुरक्षा, स्वच्छता, वीज़ा संबंधी समस्याओं और विदेशी आवक की कमी (थाईलैंड के 3.5 करोड़ के मुकाबले भारत में 1 करोड़) जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।
- यह बुनियादी ढाँचा (उड़ान योजना), इंक्रेडिबल इंडिया 2.0, टूरिज्म-रेडी सर्टिफिकेट, कृषि-पर्यटन, सामुदायिक भागीदारी और ग्रीन सर्टिफिकेशन पर केंद्रित है।
केंद्रीय बजट 2026-27 में पर्यटन विकास के लिये किन नई पहलों की घोषणा की गई है?
- पूर्वोत्तर क्षेत्र में बौद्ध सर्किट का विकास: पूर्वोत्तर भारत (अरुणाचल प्रदेश, असम, सिक्किम, मणिपुर, मिज़ोरम, त्रिपुरा) में बौद्ध सर्किट विकसित करने के लिये एक समर्पित योजना की घोषणा की गई है, जिसमें तीर्थयात्रियों के लिये इंटरप्रेटेशन सेंटर, बेहतर कनेक्टिविटी तथा अन्य सुविधाएँ और बुनियादी ढाँचा शामिल है।
- यह पहल स्वदेश दर्शन योजना (2014-15 में शुरू) पर आधारित है, जिसके तहत 76 परियोजनाएँ स्वीकृत की गई थीं, हालाँकि इसमें 75 पूरी हो चुकी हैं।
- ईको-ट्रेल्स और सतत पर्यटन पहल: बजट में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, पूर्वी घाट में अराकू घाटी और पश्चिमी घाट में पोथिगई मलई में पारिस्थितिक रूप से माउंटेन और नेचर ट्रेल्स के विकास का प्रस्ताव दिया गया है।
- ओडिशा, कर्नाटक और केरल के तटीय क्षेत्रों में प्रमुख नेस्टिंग साइट्स पर टर्टल ट्रेल और आंध्र प्रदेश में पुलीकट झील के किनारे बर्ड-वॉचिंग ट्रेल्स की भी घोषणा की गई है।
- ग्लोबल बिग कैट समिट 2026: भारत वर्ष 2026 में पहली बार ग्लोबल बिग कैट समिट की मेज़बानी करेगा, जिसमें संरक्षण, आवासन सुरक्षा, वैज्ञानिक सहयोग और सतत वन्यजीव पर्यटन पर विचार-विमर्श करने के लिये 95 देशों के प्रमुखों और मंत्रियों को आमंत्रित किया जाएगा।
- यह पहल ईको-टूरिज़्म और अंतर्राष्ट्रीय वन्यजीव सहयोग में भारत की भूमिका को बढ़ाने के सरकार के आशय को दर्शाती है। विश्व की सात 'बिग कैट' प्रजातियों में से पाँच भारत में पाई जाती हैं: बाघ, शेर, तेंदुआ, हिम तेंदुआ और चीता।
- राष्ट्रीय आतिथ्य संस्थान: नेशनल काउंसिल फॉर होटल मैनेजमेंट एंड कैटरिंग टेक्नोलॉजी, नोएडा (उत्तर प्रदेश) को उन्नत कर राष्ट्रीय आतिथ्य संस्थान (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी) बनाया जाएगा, जिसका उद्देश्य उच्च गुणवत्ता वाली व्यावसायिक शिक्षा प्रदान करना है। यह संस्थान शिक्षा जगत, उद्योग और सरकार के बीच एक सेतु के रूप में भी कार्य करेगा, कौशल की कमी को दूर करेगा तथा शैक्षणिक प्रशिक्षण को उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने में सहायक होगा।
- टूरिस्ट गाइड अपस्किलिंग प्रोग्राम: 20 प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों पर 10,000 पर्यटन गाइडों के कौशल संवर्द्धन के लिये एक प्रायोगिक योजना की घोषणा की गई है। यह 12 सप्ताह के हाइब्रिड प्रशिक्षण मॉडल पर आधारित होगी, जिसमें कक्षा प्रशिक्षण, फील्ड प्रशिक्षण और डिजिटल मॉड्यूल शामिल होंगे।
- नेशनल डेस्टिनेशन डिजिटल नॉलेज ग्रिड: संपूर्ण भारत में सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और विरासत स्थलों का दस्तावेज़ीकरण करने के लिये एक डिजिटल प्लेटफॉर्म का निर्माण किया जाएगा, जो शोधकर्त्ताओं, कंटेंट क्रिएटरों, इतिहासकारों और पर्यटन क्षेत्र के लिये संसाधन उपलब्ध कराएगा।
- अनुभवात्मक सांस्कृतिक स्थल: बजट में 15 पुरातात्त्विक स्थलों को जीवंत अनुभवात्मक सांस्कृतिक स्थलों के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव किया गया है। इनमें लोथल, धौलावीरा, राखीगढ़ी, सारनाथ, हस्तिनापुर और लेह पैलेस शामिल हैं। यह स्वदेश दर्शन 2.0 और प्रसाद जैसी मौजूदा योजनाओं का पूरक होगा।
- क्षेत्रीय चिकित्सा केंद्र: भारत को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य पर्यटन के वैश्विक गंतव्य के रूप में बढ़ावा देने के उद्देश्य से, राज्यों को पाँच क्षेत्रीय चिकित्सा केंद्र स्थापित करने में सहायता देने हेतु एक योजना शुरू की गई है। इन केंद्रों में उन्नत स्वास्थ्य सेवाएँ, आयुष केंद्र और मेडिकल वैल्यू टूरिज़्म फैसिलिटेशन सेंटर्स एकीकृत होंगे।
- पूर्वोदय राज्यों में पर्यटन विकास: बजट में एक एकीकृत विकास ढाँचे के अंतर्गत प्रत्येक पूर्वोदय राज्य में एक पर्यटन स्थल (कुल पाँच) विकसित करने का प्रस्ताव है, जिनमें से प्रत्येक पूर्वोदय राज्य - बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और आंध्र प्रदेश में एक पर्यटन स्थल होगा, जिसका केंद्र दुर्गापुर (पश्चिम बंगाल) होगा।
- इसके साथ ही, इन क्षेत्रों में यात्रियों के लिये बेहतर कनेक्टिविटी, स्वच्छ परिवहन और सुगम पहुँच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 4,000 इलेक्ट्रिक बसों का प्रावधान किया गया है।
भारत में पर्यटन संबंधी पहल
भारत में पर्यटन विकास से जुड़ी चुनौतियाँ क्या हैं?
- अपर्याप्त अवसंरचना: परिवहन नेटवर्क की कमज़ोरियाँ और अंतिम छोर तक पहुँचने में कठिनाई के कारण अपर्याप्त अवसंरचना एक प्रमुख बाधा बनी हुई है। उदाहरण के लिये, वर्ष 2025 में, व्यास घाटी (उत्तराखंड) में पर्यटकों की संख्या एक दशक में 200 से बढ़कर 30,000 हो गई। हालाँकि, स्थानीय बुनियादी ढाँचा इस आकस्मिक वृद्धि का सामना नहीं कर सका, जिसके कारण क्षमता पर अत्यधिक दबाव पड़ा और पर्यटकों के अनुभव में कमी आई।
- पर्यावरण को नुकसान: संवेदनशील क्षेत्रों में अत्यधिक जनसंख्या वृद्धि से प्रदूषण, अपशिष्ट संचय और जैव विविधता प्रभावित होती है।
- वर्ष 2017 के 68.9 लाख घरेलू पर्यटकों से बढ़कर 2025 तक गोवा में कुल पर्यटकों की संख्या लगभग 1.1 करोड़ हो गई, इस भारी वृद्धि के कारण सड़कों पर भीड़भाड़, कचरे के ढेर और समुद्र तट के कटाव जैसी समस्याएँ उत्पन्न हुई हैं, जिसने राज्य की वहन क्षमता की सीमा निर्धारित करने की मांग को आवश्यक बना दिया है।
- वर्ष 2025 की चार धाम यात्रा में चार मिलियन से अधिक तीर्थयात्री शामिल हुए, जिससे पहाड़ी क्षेत्रों में पर्यावरणीय दबाव और बढ़ गया।
- सुरक्षा संबंधी चिंताएँ: लगातार बनी हुई सुरक्षा संबंधी समस्याएँ, विशेष रूप से महिलाओं और अकेले यात्रा करने वाले यात्रियों के लिये, पर्यटन को लगातार प्रभावित कर रही हैं। अमेरिका और ब्रिटेन द्वारा जारी की गई यात्रा संबंधी सलाह इस चिंता को और बढ़ाती हैं। इसके अलावा, विदेशी पर्यटकों से जुड़ी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएँ एक नकारात्मक धारणा को मज़बूत करती हैं, जिसके परिणामस्वरूप यात्री दक्षिण- पूर्व एशिया के प्रतिस्पर्द्धी पर्यटन स्थलों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
- स्वच्छता और सेवा की गुणवत्ता: स्वच्छता मानकों में असंगति सीधे तौर पर आगंतुकों की संतुष्टि को प्रभावित करती है। इसी कारण, अंतर्राष्ट्रीय यात्री अक्सर केवल बहुराष्ट्रीय लग्ज़री होटलों तक ही सीमित रह जाते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि स्थानीय समुदायों को होने वाले आर्थिक लाभ सीमित हो जाते हैं।
- वीज़ा और नियामक जटिलताएँ: ई-वीज़ा विस्तार के बावजूद प्रसंस्करण में देरी बनी हुई है। बजट 2025-26 में विदेश में पर्यटन प्रचार के लिये आवंटन ₹33 करोड़ से घटाकर ₹3.07 करोड़ कर दिया गया, जिससे थाईलैंड और वियतनाम जैसे वीज़ा-ऑन-अराइवल गंतव्यों के साथ प्रतिस्पर्द्धा करना कठिन हो गया।
- वैश्विक प्रतिस्पर्द्धा में अंतर: भारत ने वर्ष 2024 में केवल 1 करोड़ विदेशी पर्यटकों को आकर्षित किया, जबकि थाईलैंड में 3.5 करोड़, मलेशिया में 2.5 करोड़ और वियतनाम में 1.7 करोड़ पर्यटक आए। वर्ष 2023 के दौरान भारतीय यात्रियों ने विदेशी पर्यटन पर लगभग 33 बिलियन डॉलर व्यय किये, इसके पीछे कारण बेहतर मूल्य, सेवाएँ और विदेश में पारदर्शिता बताई गई।
भारत में पर्यटन विकास को बढ़ावा देने हेतु किन कदमों की आवश्यकता है?
- बुनियादी ढाँचा और कनेक्टिविटी सुदृढ़ करना: हाई-स्पीड रेल, बहु-माध्यमीय गलियारों और UDAN योजना के तहत क्षेत्रीय हवाई अड्डों सहित परिवहन नेटवर्क में निवेश को प्राथमिकता दी जाए, ताकि प्रमुख महानगरों से आगे भी पर्यटन का समान और व्यापक प्रसार सुनिश्चित हो सके।
- पुनर्गठित "इनक्रेडिबल इंडिया 2.0" अभियान: सामान्य प्रचार से आगे बढ़ते हुए डेटा-आधारित और अत्यधिक वैयक्तीकृत वैश्विक विपणन अपनाया जाए, जिसमें मिलेनियल्स, लग्ज़री पर्यटक और साहसिक पर्यटन प्रेमियों जैसे विशिष्ट वर्गों को लक्षित किया जाए।
- ‘देखो अपना देश’ के माध्यम से घरेलू प्रचार का विस्तार करें, ताकि कम-प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों की खोज और भ्रमण को प्रोत्साहन मिल सके।
- पर्यटन स्थलों के लिये “टूरिज़्म-रेडी” प्रमाणन की स्थापना करना: स्वच्छता, सुरक्षा, पहुँच और स्थिरता जैसे मानकों के आधार पर अनिवार्य मान्यता कार्यक्रम विकसित किया जाए, जिससे राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्द्धा पैदा हो तथा पर्यटन मानकों में सुधार हो।
- पर्यटन को ग्रामीण विकास से एकीकृत करना: कृषि-पर्यटन और ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा दिया जाए, जिसमें सक्रिय कृषि फार्म और ग्रामीण समुदायों को शहरी एवं अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों से जोड़ा जाए। इससे प्रामाणिक सांस्कृतिक अनुभव मिलेंगे और किसानों की आय में भी महत्वपूर्ण वृद्धि सुनिश्चित करेगी।
- पर्यटन मित्र और पर्यटन दीदी जैसे कार्यक्रमों के तहत स्थानीय समुदायों को शामिल किया जाए, ताकि ग्रामीण, आदिवासी और वंचित क्षेत्रों तक पर्यटन के लाभ समान रूप से पहुँच सकें।
- आतिथ्य उद्योग में हरित प्रमाणन को प्रोत्साहन देना: इसके लिये एक राष्ट्रीय कार्यक्रम का शुभारंभ किया जाना चाहिये। इसके अंतर्गत जल संरक्षण, अपशिष्ट न्यूनीकरण और नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने वाले होटलों, रिसॉर्ट्स और होमस्टे को पुरस्कृत किया जाए। साथ ही 'ग्रीन की' (Green Key) प्रमाणित संपत्तियों को वैश्विक स्तर पर पर्यावरण के प्रति जागरूक यात्रियों को आकर्षित करने हेतु विशेष विपणन सहायता प्रदान की जाए।
निष्कर्ष
केंद्रीय बजट 2026–27 ने बौद्ध सर्किट, ईको-ट्रेल्स, ग्लोबल बिग कैट समिट और आतिथ्य अवसंरचना उन्नयन जैसी लक्षित पहलों के माध्यम से भारतीय पर्यटन के लिये एक परिवर्तनकारी दृष्टि प्रस्तुत की है। हालाँकि अवसंरचना की कमी, पर्यावरणीय चुनौतियों तथा वैश्विक प्रतिस्पर्द्धात्मक चुनौतियों का समाधान सतत प्रथाओं एवं सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से किया जाना ही इस क्षेत्र की सफलता व इसे एक वास्तविक आर्थिक विकास चालक बनाने का निर्धारक होगा।
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दृष्टि मेन्स प्रश्न प्रश्न. भारतीय पर्यटन क्षेत्र के समक्ष आने वाली प्रमुख चुनौतियों का परीक्षण कीजिये। भारत में सतत पर्यटन विकास के लिये एक समग्र ढाँचा सुझाइये। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. भारत की अर्थव्यवस्था में पर्यटन का आर्थिक योगदान क्या है?
‘इंडिया टूरिज़्म डाटा कंपेंडियम 2025’ के अनुसार इस क्षेत्र का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में कुल योगदान 5.22 प्रतिशत और प्रत्यक्ष हिस्सा 2.72 प्रतिशत है। यह कुल रोज़गार के 13.34 प्रतिशत हिस्से को समर्थन प्रदान करता है।
2. किन पुरातात्त्विक स्थलों को अनुभवात्मक सांस्कृतिक स्थलों के रूप में विकसित किया जा रहा है?
बजट में लोथल, धौलावीरा, राखीगढ़ी, सारनाथ, हस्तिनापुर और लेह पैलेस सहित 15 पुरातात्त्विक स्थलों को जीवंत अनुभवजन्य सांस्कृतिक पर्यटक स्थलों के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव भी किया गया है। इसके तहत क्यूरेटेड वॉकवे (विशेष रूप से तैयार पैदल मार्ग), इंटरप्रिटेशन सेंटर, पर्यटक सुविधाएँ और विरासत संरक्षण अवसंरचना का निर्माण किया जाएगा।
3. नेशनल डेस्टिनेशन डिजिटल नॉलेज ग्रिड क्या है?
यह भारत की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और विरासत स्थलों का दस्तावेज़ीकरण करने के लिये एक डिजिटल मंच है, जो शोधकर्त्ताओं, सामग्री निर्माताओं और पर्यटन हितधारकों को डेटा-संचालित निर्णय लेने में सहायता के लिये संसाधन प्रदान करता है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न
मेन्स:
प्रश्न 1. पर्वत पारिस्थितिकी तंत्र को विकास पहलों और पर्यटन के ऋणात्मक प्रभाव से किस प्रकार पुनःस्थापित किया जा सकता है? (2019)
प्रश्न 2. पर्यटन की प्रोन्नति के कारण जम्मू और काश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के राज्य अपनी पारिस्थितिक वाहन क्षमता की सीमाओं तक पहुँच रहे हैं? समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिये। (2015)
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