भारत के विद्युत वितरण क्षेत्र में सुधार | 14 Feb 2026

प्रिलिम्स के लिये: विद्युत वितरण कंपनियाँ, उज्ज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना, रीवैंप्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम

मेन्स के लिये: विद्युत क्षेत्र सुधार और वित्तीय अनुशासन, उपयोगिताओं के सुधार में नियामक संस्थाओं की भूमिका, सेवा वितरण में शासन संबंधी चुनौतियाँ

स्रोत: द हिंदू 

चर्चा में क्यों?

हाल ही में संघीय सरकार के वित्तीय वर्ष 2024-25 के आँकड़े वितरण कंपनियों (DISCOM) में वित्तीय सुधार को दर्शाते हैं, जिसमें कर के बाद लाभ में वृद्धि और क्षेत्रीय सुधारों के बाद समग्र तकनीकी और वाणिज्यिक (AT&C) हानियों में कमी आई है।

सारांश

  • हालिया सुधारों के परिणामस्वरूप बिजली वितरण कंपनियों (DISCOM) ने वित्तीय और परिचालन दोनों स्तरों पर सुधार दिखाया है, जिसमें समग्र तकनीकी एवं वाणिज्यिक हानियों (AT&C Losses) में कमी, वास्तविक लागत और एवरेज रिकवरी रेट (ACS-ARR) के अंतर में संकुचन तथा भुगतान अनुशासन में सुधार शामिल हैं।
  • इन उपलब्धियों के बावजूद, राज्यीय अनुदानों पर निरंतर निर्भरता, लागत-संशोधित नहीं किये गए टैरिफ, और बिना मीटर वाले कृषि आपूर्ति प्रमुख संरचनात्मक चुनौतियाँ बनी हुई हैं।
  • DISCOM की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिये टैरिफ रेशनलाइज़ेशन, नियामकीय क्षमता सुदृढ़ीकरण, नवीकरणीय ऊर्जा का समावेश तथा बेहतर शासन जैसे सतत सुधार आवश्यक हैं।

DISCOM प्रदर्शन में प्रमुख विकास क्या है? 

  • हालिया वित्तीय सुधार: वितरण कंपनियों (DISCOMs) ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में ₹2,701 करोड़ का कर पश्चात लाभ (Profit After Tax- PAT) दर्ज किया, जो वित्तीय वर्ष 2013-14 की ₹67,962 करोड़ की हानि से महत्त्वपूर्ण सुधार को दर्शाता है। यह आँकड़ा DISCOM के वित्तीय पुनरुद्धार का स्पष्ट संकेत है।
  • समग्र तकनीकी एवं वाणिज्यिक (AT&C) हानियों में कमी: AT&C हानियाँ 22.62% से घटकर लगभग 15.04% पर आ गई हैं, जो परिचालन दक्षता में सुधार को दर्शाती हैं। हालाँकि, कई राज्यों में हानियाँ अभी भी उच्च स्तर पर बनी हुई हैं।
  • राज्य सरकार के समर्थन पर निर्भरता: वित्तीय सुधार टैरिफ सब्सिडी और नुकसान का सीधे राज्य सरकार द्वारा वहन करने का परिणाम है, जो दीर्घकालिक स्थायित्व पर प्रश्न उठाता है।
  • भुगतान अनुशासन में सुधार: लेट पेमेंट सरचार्ज (LPS) नियमों के लागू होने से पुरानी देनदारियाँ काफी कम हुई हैं और भुगतान चक्र में सुधार हुआ है, जिससे विद्युत मूल्य शृंखला में तरलता मज़बूत हुई है।
  • मांग और लागत का दबाव: बढ़ती विद्युत मांग और ईंधन लागत में उतार-चढ़ाव बिजली खरीद खर्च पर लगातार दबाव डाल रहे हैं।
  • नवीनीकृत वितरण क्षेत्र योजना (RDSS) के माध्यम से सुधार कार्यान्वयन: RDSS के तहत प्रदर्शन-आधारित वित्तीय सहायता ने संचालन में सुधार और जवाबदेही बढ़ाने में योगदान दिया है।

राज्य DISCOMs का समर्थन करने के लिये सरकारी पहल

  • उज्ज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना (UDAY): यह योजना वर्ष 2015 में बढ़ते हुए DISCOM कर्ज़  को हल करने के लिये शुरू की गई थी। UDAY के तहत राज्यों को DISCOM देनदारियों का 75% हिस्सा कम ब्याज वाले बॉन्ड के माध्यम से अपने पास लेने की अनुमति दी गई। इसका उद्देश्य AT&C नुकसान कम करना, बिलिंग दक्षता सुधारना, स्मार्ट मीटरिंग को बढ़ावा देना तथा संचालन की जवाबदेही बढ़ाना था।
  • नवीनीकृत वितरण क्षेत्र योजना (RDSS): यह योजना वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 के लिये ₹3,03,758 करोड़ के बजट के साथ शुरू की गई है। RDSS का उद्देश्य AT&C नुकसान को 12–15% तक कम करना और ACS-ARR अंतर को समाप्त करना है। योजना के तहत फंडिंग प्रदर्शन-आधारित सुधारों तथा मापनीय संचालन सुधारों से जोड़ी गई है, जिससे वितरण क्षेत्र में वित्तीय स्थिरता और विश्वसनीयता सुनिश्चित होती है।
  • एकीकृत विद्युत विकास योजना (IPDS): शहरी बिजली वितरण अवसंरचना को सुदृढ़ बनाने पर केंद्रित, IPDS का उद्देश्य सप्लाई विश्वसनीयता सुधारना, तकनीकी नुकसान कम करना और शहरी क्षेत्रों में ग्राहक सेवा बेहतर बनाना है।
  • लेट पेमेंट सरचार्ज (LPS) नियम: वित्तीय अनुशासन लागू करने के लिये ये नियम लागू किये गए, जिससे DISCOMs को पुरानी देनदारियों को अधिकतम 48 समतुल्य मासिक किस्तों (EMIs) में चुकाने की सुविधा मिली। इसके परिणामस्वरूप जून 2022 के ₹1,39,947 करोड़ से जनवरी 2026 तक ₹4,927 करोड़ तक देनदारियाँ घट गईं, जिससे बिजली मूल्य शृंखला में तरलता तथा भुगतान चक्र में सुधार हुआ।
  • DISCOMs का एकीकृत रेटिंग: वार्षिक रेटिंग वित्तीय और संचालन प्रदर्शन का आकलन करती है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ती है। हाल की रेटिंग में AT&C नुकसान में कमी और भुगतान अनुशासन में सुधार को प्रमुखता से दर्शाया गया।

विद्युत वितरण कंपनियों के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ क्या हैं?

  • राज्य सरकारों की सब्सिडी पर निर्भरता: अनेक वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति में सुधार मुख्यतः राज्य सरकारों द्वारा प्रदत्त प्रशुल्क (टैरिफ) सहायिकी तथा प्रत्यक्ष हानि-वहन के कारण हुआ है। इस तरह के वित्तीय समर्थन के बिना कई कंपनियाँ भारी नुकसान की स्थिति में हो सकती हैं, जिससे दीर्घकालिक संधारणीयता को लेकर चिंताएँ बढ़ जाती हैं।
  • दीर्घकालिक वित्तीय तनाव और पूर्वकालिक ऋण: ऐतिहासिक रूप से उच्च समेकित तकनीकी एवं वाणिज्यिक (AT&C) हानियाँ, औसत आपूर्ति लागत (ACS) और औसत प्राप्ति राजस्व (ARR) के मध्य बढ़ता अंतर संचयी घाटों एवं ऋण-भार में वृद्धि का कारण बना है।  हालाँकि हाल में कुछ सुधार हुए हैं, फिर भी पुनः राजस्व घाटे की स्थिति उत्पन्न होने का खतरा बना हुआ है।
  • प्रशुल्क युक्तीकरण और राजनीतिक अर्थव्यवस्था संबंधी बाधाएँ: लागत-अनुरूप न होने वाले शुल्क और राज्य द्वारा सब्सिडी के विलंबित भुगतान ने ऐतिहासिक रूप से विद्युत वितरण कंपनियों के वित्त को प्रभावित किया है। प्रशुल्कों में संशोधन करने या मुफ्त बिजली योजनाओं को वापस लेने के प्रति राजनीतिक अनिच्छा एक संरचनात्मक चुनौती बनी हुई है।
  • निजीकरण के प्रति कर्मचारियों का प्रतिरोध: सार्वजनिक क्षेत्र की वितरण कंपनियों के कर्मचारी प्रायः नौकरी छूटने, छँटनी और सेवा-शर्तों में बदलाव के डर से निजीकरण का विरोध करते हैं। दिल्ली की स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना जैसे पिछले उदाहरण नौकरी की सुरक्षा और वित्तीय स्थिरता को लेकर चिंताओं को दर्शाते हैं।
  • कृषि क्षेत्र में बिना मीटर वाली विद्युत आपूर्ति और आँकड़ों का अभाव: कई राज्यों में, कृषि क्षेत्र को बिना मीटर वाली विद्युत आपूर्ति वास्तविक खपत के आँकड़ों को विकृत करती है और सब्सिडी के अनुमान को जटिल बनाती है, जिससे प्रभावी वित्तीय योजना सीमित हो जाती है।

विद्युत वितरण कंपनियों के सशक्तीकरण हेतु कौन-से उपाय आवश्यक हैं?

  • वित्तीय अनुशासन का सुदृढ़ीकरण: विलंबित भुगतान अधिभार नियमों का कड़ाई से प्रवर्तन और बकाया राशि का समय पर निपटान जारी रहना चाहिये ताकि पूर्व के ऋणों की पुनरावृत्ति को रोका जा सके और विद्युत मूल्य शृंखला में सुचारु नकदी प्रवाह सुनिश्चित किया जा सके।
  • लागत-अनुरूप प्रशुल्क: ईंधन की लागत और मुद्रास्फीति के अनुरूप स्वचालित और समय पर टैरिफ संशोधनों को संस्थागत रूप देना ACS-ARR अंतराल को बढ़ने से रोकने और दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिये आवश्यक है।
  • लक्षित सब्सिडी वितरण: विद्युत सब्सिडी के लिये प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) की ओर बढ़ने से पारदर्शिता बढ़ सकती है, वितरण कंपनियों पर वित्तीय दबाव कम हो सकता है और सुभेद्य उपभोक्ताओं को सहायता की वास्तविक प्रदायगी सुनिश्चित हो सकती है।
  • फीडर पृथक्करण का विस्तार: जिन राज्यों में कृषि क्षेत्र की खपत अधिक है, वहाँ फीडर पृथक्करण अपनाना चाहिये, ताकि कृषि उपभोग का सटीक मापन हो सके और बिना मीटर वाली आपूर्ति से उत्पन्न अकार्यक्षमता कम हो।
  • कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा को प्रोत्साहन: कृषि में सौर पंपों का विस्तार तथा विकेंद्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने से दीर्घकाल में विद्युत क्रय लागत में कमी लाई जा सकती है और सब्सिडी के बोझ को घटाया जा सकता है। इससे ऊर्जा आत्मनिर्भरता, लागत-दक्षता तथा पर्यावरणीय स्थिरता को सुदृढ़ आधार प्राप्त होगा।
  • विनियामक सुदृढ़ीकरण: राज्य विद्युत विनियामक आयोगों को इस प्रकार सशक्त किया जाना आवश्यक है कि वे पारदर्शी टैरिफ निर्धारण सुनिश्चित कर सकें, कार्यकुशलता को प्रोत्साहित कर सकें तथा उपभोक्ता हितों का प्रभावी संरक्षण कर सकें। इससे विद्युत क्षेत्र में उत्तरदायित्व, प्रतिस्पर्द्धात्मकता और दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित होगी।

निष्कर्ष

वितरण कंपनियों (DISCOMs) के प्रदर्शन में हालिया सुधार लक्षित सुधारात्मक उपायों तथा राजकोषीय अनुशासन के सकारात्मक प्रभाव को परिलक्षित करते हैं। तथापि, इस प्रगति की निरंतरता इस बात पर निर्भर करेगी कि सब्सिडी-निर्भरता में क्रमिक रूप से कमी लाई जाए, विनियामक तंत्र को सुदृढ़ किया जाए तथा सुशासन की व्यवस्थाओं को सशक्त बनाया जाए, ताकि विद्युत वितरण क्षेत्र की दीर्घकालिक वित्तीय व्यवहार्यता सुनिश्चित की जा सके।

दृष्टि मेन्स प्रश्न

प्रश्न.वितरण कंपनियों (DISCOMs) की वित्तीय स्थिति को सुदृढ़ बनाना राजकोषीय विवेकशीलता और ऊर्जा सुरक्षा के दृष्टिकोण से अनिवार्य है। हाल में की गई सुधारात्मक पहल, सतत चुनौतियों और भविष्य की दिशा का विश्लेषण कीजिये।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. DISCOM क्या हैं? 
ये विद्युत् वितरण कंपनियाँ हैं, जो उपभोक्ताओं को बिजली की आपूर्ति हेतु उत्तरदायी हैं।

2. हाल ही में DISCOM की वित्तीय स्थिति में सुधार के मुख्य कारण क्या है? 
सुधारों, सब्सिडी सहायता और विलंबित भुगतान अधिभार नियमों ने भुगतान अनुशासन में सुधार किया और हानि को कम किया।

3. DISCOM को अभी भी समस्याओं का सामना क्यों करना पड़ रहा है? 
राज्य की सब्सिडी पर निर्भरता, मुफ्त बिजली योजनाएँ और बिना मीटर वाली कृषि आपूर्ति दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता को प्रभावित करती रहती हैं।

4. UDAY क्या है?
 वर्ष 2015 में शुरू की गई उज्ज्वल डिस्कॉम आश्वासन योजना ने राज्यों को कम ब्याज वाले बॉण्डों के माध्यम से DISCOM के 75% ऋण का अधिग्रहण करने की अनुमति दी और इसका उद्देश्य हानि को कम करना और बिलिंग दक्षता में सुधार करना था।

5. IPDS क्या है? 
एकीकृत विद्युत विकास योजना शहरी विद्युत वितरण अवसंरचना को मज़बूत करती है ताकि विश्वसनीयता में सुधार हो और तकनीकी हानियों को कम किया जा सके।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न 

प्रिलिम्स:

प्रश्न. निम्नलिखित में से कौन-सा सरकार की एक योजना 'उदय' (UDAY) का उद्देश्य है? (2016)

(a) ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों के क्षेत्र में स्टार्टअप उद्यमियों को तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करना।
(b) वर्ष 2018 तक देश के हर घर में विद्युत पहुँचाना।
(c) कोयला आधारित विद्युत संयंत्रों को समय के साथ प्राकृतिक गैस, परमाणु, सौर, पवन और ज्वारीय विद्युत संयंत्रों से बदलना।
(d) विद्युत वितरण कंपनियों के बदलाव और पुनरुद्धार के लिये वित्त प्रदान करना।

उत्तर: (d)