RBI द्वारा तरलता पर दबाव में कमी के प्रयास | 01 Sep 2020

प्रिलिम्स के लिये:

ऑपरेशन ट्विस्ट, खुला बाज़ार परिचालन, हेल्ड-टू-मेच्योरिटी (HTM) श्रेणी

मेन्स के लिये:

आरबीआई की मौद्रिक नीति 

चर्चा में क्यों?

हाल ही में 'भारतीय रिजर्व बैंक' (Reserve Bank of India- RBI) द्वारा वित्तीय बाज़ार में तरलता बढ़ाने के लिये अनेक मौद्रिक नीति उपायों की घोषणा की गई है।

प्रमुख बिंदु:

विशेष खुला बाज़ार परिचालन (Open Market Operations-OMO):

  • आरबीआई द्वारा 'ऑपरेशन ट्विस्ट' (Operation Twist) के तहत 20,000 करोड़ रुपए की राशि की विशेष ‘खुला बाज़ार परिचालन’ (OMO) के माध्यम से सरकारी प्रतिभूतियों (G-Sec) की खरीद और बिक्री की जाएगी। 
    • ‘ऑपरेशन ट्विस्ट’ के अंतर्गत केंद्रीय बैंक दीर्घ अवधि के सरकारी ऋण पत्रों को खरीदने के लिये अल्पकालिक प्रतिभूतियों की बिक्री से प्राप्त आय का उपयोग करता है, जिससे लंबी अवधि के ऋणपत्रों पर ब्याज दरों के निर्धारण में आसानी होती है।
  • इसमें 10,000 करोड़ रुपए की दो समान अंश राशि के शामिल है। प्रथम अंश 10 सितंबर, 2020 को और दूसरी अंश राशि 17 सितंबर, 2020 की जारी की जाएगी।
  • इससे पूर्व में 27 अगस्त को आरबीआई द्वारा विशेष ‘खुला बाज़ार परिचालन’ का प्रयोग किया गया था, जिसमें 10,000 करोड़ रुपए की सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद और बिक्री एक साथ की गई थी। 

आवधिक रेपो परिचालन (Term Repo Operations):

  • आरबीआई सितंबर के मध्य में फ्लोटिंग दरों पर (प्रचलित रेपो दर पर) 1 लाख करोड़ रुपए की कुल राशि के लिये ‘आवधिक रेपो परिचालन’ का भी आयोजन करेगा। 
  • आवधिक रेपो परिचालन का उद्देश्य आरबीआई द्वारा बैंकिंग प्रणाली में तरलता को बढ़ाना है।
  • जिन बैंकों ने ‘दीर्घावधि रेपो परिचालन’ (Long-term Repo Operations- LTRO) के तहत धन का लाभ उठाया था, वे परिपक्वता से पहले इन लेनदेन को बदलने का विकल्प चुन सकते हैं।
  • बैंक, जिसने पहले LTRO  के तहत 5.15 प्रतिशत की दर पर आरबीआई से  उधार लिया था, वे इसे लौटाकर मौजूदा रेपो दर पर अर्थात 4 प्रतिशत की दर पर से उधार ले सकते हैं। 
    • इससे इन बैंकों की ब्याज देयता कम हो जाएगी।

दीर्घावधि रेपो परिचालन

(Long Term Repo Operation- LTRO):

  • LTRO, मौद्रिक नीति को क्रियान्वित करने और अर्थव्यवस्था में ऋण के प्रवाह को सुविधाजनक बनाने के लिये एक तंत्र है।
  • LTRO एक ऐसा उपकरण है जिसके तहत केंद्रीय बैंक प्रचलित रेपो दर पर बैंकों को एक से तीन वर्ष की अवधि के लिये ऋण प्रदान करता है तथा कोलेटरल के रूप में सरकारी प्रतिभूतियों को लंबी अवधि के लिये स्वीकार करेगा।
  • LTRO के माध्यम से फंड रेपो रेट पर प्रदान किया जाता है। 

हेल्ड-टू-मेच्योरिटी (HTM) प्रतिभूति:

  • परिपक्वता तक स्वामित्व रखने के लिये हेल्ड-टू-मेच्योरिटी (HTM) प्रतिभूतियों को खरीदा जाता है। उदाहरण के लिये एक कंपनी का प्रबंधन उस बॉण्ड में निवेश कर सकता है जिसे वे परिपक्वता पर रखने की योजना बनाते हैं।
  • आरबीआई ने परिपक्वता ( Held to Maturity-  HTM) श्रेणी के लिये अधिक अवसर उपलब्ध कराने की घोषणा की है। 
  • बैंक 1, सितंबर 2020 से अपने नवीन सरकारी प्रतिभूतियों (G-Sec) के अधिग्रहण को पार्क करने के लिये इसका उपयोग कर सकते हैं।
  • वर्तमान में बैंकों को अपनी 'शुद्ध मांग और समय देयता' (Net Demand and Time Liability-  NDTL) का 18 प्रतिशत या 'वैधानिक तरलता अनुपात' (Statutory Liquidity Ratio) (सरकारी प्रतिभूति और राज्य विकास ऋण सहित) के तहत बनाए रखना होता है। 
  •  वर्तमान में HTM श्रेणी में कुल 25 प्रतिशत तक निवेश किया जा सकता है। 
    • आरबीआई ने बैंकों को इस सीमा को पार करने की अनुमति दी है। 

आरबीआई द्वारा अपनाए गए उपायों का महत्त्व:

  • आरबीआई द्वारा उठाए गए कदम बाज़ार-से-बाज़ार प्रोविजनिंग की चिंताओं को संबोधित करते हैं।
  • HTM पर आरबीआई के कदम बैंकों को केंद्र सरकार तथा राज्यों को के लिये उधार कार्यक्रम में सरकारी प्रतिभूतियों (G-Sec) को स्वीकार करने को बढ़ावा देंगे।
  • हाल ही में मुद्रास्फीति के दृष्टिकोण से संबंधित चिंताओं और सरकार की राजकोषीय स्थिति के कारण बाज़ार की धारणा प्रभावित हुई है। 
  • अत: बाज़ार की स्थिति में सुधार करने और अनुकूल वित्तीय स्थितियों को सुनिश्चित करने के लिये आरबीआई द्वारा इन उपायों की घोषणा की गई है। 

निष्कर्ष:

  • मौद्रिक नीति उपायों के माध्यम से आरबीआई ने अर्थव्यवस्था में अधिक तरलता लाने और वित्तपोषण की स्थिति सुनिश्चित करने के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त की है, जो भारत की लगातार गिरती अर्थव्यवस्था में निवेशकों के विश्वास को बनाए रखने के दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है। 

स्रोत: द हिंदू