उत्तर-पूर्वी क्षेत्रीय विद्युत व्‍यवस्‍था सुधार परियोजना | 18 Dec 2020

चर्चा में क्यों?

आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने उत्तर-पूर्वी क्षेत्रीय विद्युत व्‍यवस्‍था सुधार परियोजना (NERPSIP) के लिये 6,700 करोड़ रुपए के संशोधित लागत अनुमान (RCE) को मंज़ूरी दे दी है।

  • यह अंतर्राज्यीय ट्रांसमिशन और वितरण प्रणाली को मज़बूत करने तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र का आर्थिक विकास सुनिश्चित करने की दिशा में  एक महत्त्वपूर्ण कदम है।

प्रमुख बिंदु 

पृष्ठभूमि

  • इस परियोजना को दिसंबर 2014 में विद्युत मंत्रालय की एक केंद्रीय क्षेत्रक योजना के रूप में मंज़ूरी प्रदान की गई थी।

वित्तपोषण

  • इस परियोजना का वित्तपोषण भारत सरकार द्वारा विश्व बैंक की सहायता से किया जाएगा। भारत सरकार ने इस परियोजना को 50:50 प्रतिशत वहनीयता (50 प्रतिशत विश्व बैंक : 50 प्रतिशत भारत सरकार) के आधार पर शुरू करने की योजना बनाई है, किंतु इसमें क्षमता निर्माण पर होने वाला 89 करोड़ रुपए का खर्च पूरी तरह भारत सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।

क्रियान्वयन 

  • यह योजना पूर्वोत्तर के छह लाभार्थी राज्यों यथा- असम, मणिपुर, मेघालय, मिज़ोरम, नगालैंड और त्रिपुरा के सहयोग से पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (पावरग्रिड) द्वारा क्रियान्वित की जाएगी, इसे दिसंबर 2021 में शुरू किये जाने का लक्ष्य रखा गया है।
    • ‘पावरग्रिड’ विद्युत मंत्रालय के अधीन एक ‘महारत्न’ कंपनी है। यह मुख्य तौर पर विद्युत ट्रांसमिशन व्यवसाय में संलग्न है और इसे अंतर-राज्यीय ट्रांसमिशन प्रणाली (ISTS) के नियोजन, कार्यान्वयन, प्रचालन एवं अनुरक्षण का उत्तरदायित्त्व सौंपा गया है। 

रख-रखाव

  • परियोजना की शुरुआत के बाद इसके रख-रखाव का दायित्त्व और स्वामित्त्व  संबंधित राज्य सरकार की कंपनी को मिल जाएगा। 

उद्देश्य 

  • इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के समग्र आर्थिक विकास को बढ़ावा देना और इस क्षेत्र में अंतर-राज्‍यीय ट्रांसमिशन एवं वितरण संरचना को मज़बूत बनाना है।

महत्त्व

  • इस योजना के क्रियान्वयन से एक विश्वसनीय पावर ग्रिड का निर्माण किया जा सकेगा, जिससे विद्युत केंद्रों तक पूर्वोत्तर राज्यों के संपर्क और पहुँच में सुधार होगा। इस तरह पूर्वोत्तर क्षेत्र के सभी वर्गों के उपभोक्‍ताओं तक ग्रिड के माध्यम से बिजली की पहुँच सुनिश्चित की जा सकेगी।
  • इस योजना से लाभार्थी राज्‍यों में प्रति व्‍यक्ति बिजली उपभोग में भी वृद्धि की जा सकेगी, जिससे पूर्वोत्तर क्षेत्र का समग्र आर्थिक विकास सुनिश्चित हो सकेगा।
  • इस योजना में शामिल एजेंसियाँ निर्माण कार्य में स्‍थानीय मानव बल का इस्‍तेमाल कर सकेंगी और इस तरह पूर्वोत्तर क्षेत्र के कुशल और अकुशल कामगारों को रोज़गार का अवसर मिलेगा।

पूर्वोत्तर से संबंधित अन्य पहलें 

  • पूर्वोत्तर औद्योगिक विकास योजना (NEIDS)
    • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वर्ष 2018 में इस योजना को मंज़ूरी प्रदान की थी और पूर्वोत्तर राज्‍यों में रोज़गार को प्रोत्‍साहित करने के लिये सरकार इस योजना के माध्यम से मुख्यतः MSMEs क्षेत्र को बढ़ावा  दे रही है।
  • अंतर्राष्‍ट्रीय पर्यटन मार्ट (ITM)
    • यह एक वार्षिक आयोजन है, जिसका उद्देश्‍य घरेलू और अंतर्राष्‍ट्रीय बाज़ारों में पूर्वोत्तर क्षेत्र की पर्यटन संभावनाओं को उजागर करना है।
    • ज्ञात हो कि पर्यटन मंत्रालय के कुल योजना परिव्यय का तकरीबन 10 प्रतिशत हिस्सा पूर्वोत्तर के राज्यों में पर्यटन के विकास हेतु प्रयोग किया जाता है।
  • राष्ट्रीय बाँस मिशन (NBM)
    • इस मिशन के तहत क्षेत्र-आधारित (Area-Based) और क्षेत्रीय (Regionally) रूप से विभेदित रणनीति के माध्यम से बाँस क्षेत्र के समग्र विकास को बढ़ावा देने की परिकल्पना की गई है। इस योजना का उद्देश्य संपूर्ण मूल्य शृंखला बनाकर और उत्पादकों (किसानों) का उद्योग के साथ कारगर संपर्क स्थापित कर बाँस क्षेत्र का संपूर्ण विकास सुनिश्चित करना है।

स्रोत: पी.आई.बी.