IBSA और डिजिटल गवर्नेंस रिफॉर्म | 11 Mar 2023

प्रिलिम्स के लिये:

IBSA फोरम, दक्षिण-दक्षिण सहयोग का संयुक्‍त राष्ट्र कार्यालय (UNOSSC), भारत की आधार बायोमेट्रिक आईडी प्रणाली, भारत की G-20 अध्यक्षता।

मेन्स के लिये:

ग्लोबल डिजिटल गवर्नेंस से संबंधित प्रमुख मुद्दे, IBSA ग्रुप की पहल।

चर्चा में क्यों?

जिनेवा स्थित डिप्लो फाउंडेशन के अनुसार, भारत, ब्राज़ील और दक्षिण अफ्रीका ने मिलकर त्रिपक्षीय IBSA फोरम का गठन किया है, जो डिजिटल गवर्नेंस में सुधार की प्रक्रिया में प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं।

IBSA क्या है?

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  • परिचय:
    • IBSA दक्षिण-दक्षिण सहयोग और विनिमय को बढ़ावा देने के लिये भारत, ब्राज़ील एवं दक्षिण अफ्रीका के बीच एक त्रिपक्षीय, विकासात्मक पहल है।
  • संघटन:
    • जब 6 जून, 2003 को ब्रासीलिया (ब्राज़ील) में तीन देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई और ब्रासीलिया घोषणापत्र जारी किया गया, तब इस समूह को औपचारिक रूप दिया गया तथा इसका नाम IBSA डायलॉग फोरम रखा गया।
  • सहयोग:
    • संयुक्त नौसेना अभ्यास:
    • IBSA कोष:
      • 2004 में स्थापित IBSA कोष (भारत, ब्राज़ील और दक्षिण अफ्रीका में गरीबी एवं भूख के उन्मूलन के लिये सुविधा) एक अनूठा कोष है जिसके माध्यम से सहयोगी विकासशील देशों में IBSA निधिकरण के साथ विकास परियोजनाओं को क्रियान्वित किया जाता है।
      • कोष का प्रबंधन दक्षिण-दक्षिण सहयोग के संयुक्‍त राष्ट्र कार्यालय (UNOSSC) द्वारा किया जाता है।

IBSA वैश्विक डिजिटल गवर्नेंस में कैसे योगदान दे सकता है?

  • IBSA की क्षमता:
    • डिजिटल समावेशन:
      • डिजिटलीकरण IBSA अर्थव्यवस्थाओं में विकास को गति दे रहा है।
      • तीनों देशों ने नागरिकों तक सस्ती पहुँच को प्राथमिकता देकर, डिजिटल कौशल के लिये प्रशिक्षण का समर्थन करके और छोटे डिजिटल उद्यमों के विकास के लिये एक कानूनी ढाँचा बनाकर डिजिटल समावेशन का नेतृत्व किया है। जीवंत डिजिटल अर्थव्यवस्था के साथ भारत सबसे आगे है।
    • डेटा गवर्नेंस:
      • भारत की G-20 अध्यक्षता का उद्देश्य व्यावहारिक पहलों जैसे कि राष्ट्रों के डेटा गवर्नेंस आर्किटेक्चर का स्व-मूल्यांकन, नागरिकों की आवाज़ और वरीयताओं को नियमित रूप से शामिल करने के लिये राष्ट्रीय डेटा सिस्टम का आधुनिकीकरण तथा डेटा को नियंत्रित करने हेतु पारदर्शिता के साथ सिद्धांतों का रणनीतिक नेतृत्त्व करना है।
      • IBSA राष्ट्र जिनकी आबादी काफी अधिक है, वे भी डेटा को एक राष्ट्रीय संसाधन के रूप में देखते हैं।
  • मुद्दे :
    • भू राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता:
    • संप्रभुता बनाम एकता:
      • बुनियादी तौर पर यह माना जाता है कि कई देशों को वैश्विक अर्थव्यवस्था में डेटा संप्रभुता और उसके एकीकरण को संतुलित करना होगा।
      • छोटे और निर्यातोन्मुख अर्थव्यवस्थाओं के लिये डेटा का मुक्त प्रवाह आवश्यक होगा।

डिजिटल गवर्नेंस में भारत की प्रगति:

  • आधार: भारत के आधार कार्यक्रम द्वारा उपयोग की जाने वाली बायोमेट्रिक आईडी प्रणाली को व्यापक रूप से डिजिटल पहचान बनाने में एक अग्रणी प्रयास माना जाता है जो अन्य देशों की प्रणालियों के समान है।
  • MyGov प्लेटफॉर्म: इसने एक साझा डिजिटल प्लेटफार्म प्रदान कर देश में नागरिक संलग्नता एवं भागीदारी शासन की सुदृढ़ नींव रखी है, जहाँ नागरिक सरकारी कार्यक्रमों एवं योजनाओं के संबंध में अपने विचार साझा कर सकते हैं।
  • यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI): यूपीआई एक रीयल-टाइम भुगतान प्रणाली है जिसे वर्ष 2016 में पेश किया गया, यह मोबाइल डिवाइस का उपयोग करके बैंक खातों के बीच तत्काल धन हस्तांतरण को सक्षम बनाता है।
  • UPI ने भारत में भुगतान के तरीके को बदल कर इसे तीव्र, अधिक सुविधाजनक और अधिक सुरक्षित बना दिया है। UPI की सफलता ने अन्य देशों को भारत के साथ गठजोड़ करने तथा समान भुगतान प्रणाली को अपनाने के लिये प्रेरित किया है।
  • डिजिटल इंडिया अधिनियम: भारत सरकार ने डिजिटल इंडिया अधिनियम 2023 का प्रस्ताव दिया है, जिसका उद्देश्य सुरक्षा, विश्वास और जवाबदेही के मामले में भारतीय नागरिकों की रक्षा करते हुए अधिक नवाचार एवं स्टार्टअप को सक्षम कर भारतीय अर्थव्यवस्था हेतु उत्प्रेरक के रूप में कार्य करना है।

आगे की राह

  • अन्य देशों और संगठनों के साथ सहयोग: IBSA देशों को डिजिटल गवर्नेंस, डेटा सुरक्षा और साइबर सुरक्षा हेतु वैश्विक मानक विकसित करने के लिये अन्य देशों एवं अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ मिलकर काम करना चाहिये।
  • साझा रणनीति का विकास: IBSA देशों को डिजिटल गवर्नेंस पर एक आम रणनीति विकसित करनी चाहिये, साथ ही वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था के साझा दृष्टिकोण की दिशा में काम करना चाहिये जो डिजिटल समावेशन, डेटा गोपनीयता एवं सुरक्षा को प्राथमिकता देता है।
    • यह रणनीति उनके साझा मूल्यों और सिद्धांतों जैसे- मानवाधिकारों, लोकतंत्र एवं कानून के शासन पर आधारित होनी चाहिये।

स्रोत: द हिंदू