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चार नए रामसर स्थल | 14 Aug 2021 | अंतर्राष्ट्रीय संबंध

प्रिलिम्स के लिये:

मैंग्रोव, प्रवाल भित्ति, रामसर अभिसमय

मेन्स के लिये:

वर्तमान में आर्द्रभूमि क्षेत्रों के समक्ष प्रमुख खतरे, वैश्विक आर्द्रभूमि संरक्षण पहल

चर्चा में क्यों?   

हाल ही में  चार और भारतीय स्थल जिनमें दो हरियाणा और दो गुजरात में स्थित है, को रामसर अभिसमय (Ramsar Convention) के तहत अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की आर्द्रभूमियों  (Wetlands) के रूप में मान्यता दी गई है।

प्रमुख बिंदु

आर्द्रभूमियों के बारे में:

नए रामसर स्थल/साइट  

शहरी आर्द्रभूमि की भूमिका:

आर्द्रभूमि के लिये प्रमुख खतरे:

शहरीकरण

  • शहरी केंद्रों के पास आर्द्रभूमि आवासीय, औद्योगिक और वाणिज्यिक सुविधाओं के विकासात्मक दबाव में वृद्धि कर रही है। 

मानवजनित गतिविधियाँ

  • अनियोजित शहरी और कृषि विकास, उद्योगों, सड़क निर्माण, इंपाउंडमेंट, संसाधन निष्कर्षण और जल निकासी संबंधी समस्या के कारण, आर्द्रभूमियों की स्थिति खराब हुई है, जिससे लंबी अवधि में पर्याप्त आर्थिक व पारिस्थितिक नुकसान हुआ है।

कृषि गतिविधियाँ

  • 1970 के दशक की हरित क्रांति के बाद आर्द्रभूमि के विशाल हिस्सों को धान के खेतों में बदल दिया गया है। 
  • सिंचाई के लिये बड़ी संख्या में जलाशयों, नहरों और बाँधों के निर्माण ने संबंधित आर्द्रभूमि के जल विज्ञान को महत्त्वपूर्ण रूप से बदल दिया है।

जल विज्ञान संबंधी गतिविधियाँ

  • सिंचाई के लिये निचले शुष्क क्षेत्रों में पानी पहुँचाने हेतु नहरों के निर्माण और नदियों और नदियों के मोड़ ने जल निकासी पैटर्न को बदल दिया है तथा क्षेत्र की आर्द्रभूमि को काफी हद तक खराब कर दिया है।
  • केवलादेव घाना अभयारण्य, लोकटक झील, चिल्का झील, वेम्बनाड कोले उन स्थलों में से हैं जो पानी और गाद प्रवाह को प्रभावित करने वाले बाँधों से गंभीर रूप से प्रभावित हैं।

वनोन्मूलन

  • जलग्रहण क्षेत्र में वनस्पति को हटाने से मिट्टी का क्षरण और गाद जमा होती है।

प्रदूषण

  • उद्योगों से सीवेज और ज़हरीले रसायनों के अप्रतिबंधित डंपिंग ने कई मीठे पानी की आर्द्रभूमि को प्रदूषित कर दिया है।

लवणीकरण

  • भूजल के अत्यधिक दोहन से लवणीकरण में वृद्धि हो रही है।

मत्स्य पालन

  • झींगा और मछलियों की मांग ने मछली पालन व जलीय कृषि तालाबों को विकसित करने के लिये आर्द्रभूमि एवं मैंग्रोव वनों को परिवर्तित करने हेतु आर्थिक प्रोत्साहन प्रदान किया है।

नई प्रजातियाँ

  • भारतीय आर्द्रभूमि को जलकुंभी और साल्विनिया जैसी विदेशी पौधों की प्रजातियों से खतरा है। वे जलमार्गों को रोकते हैं तथा देशी वनस्पतियों के साथ प्रतिस्पर्द्धा करते हैं।

जलवायु परिवर्तन

  • हवा के तापमान में वृद्धि; वर्षा में बदलाव; तूफान, सूखा और बाढ़ की आवृत्ति में वृद्धि; वायुमंडलीय कार्बन डाइऑक्साइड एकाग्रता में वृद्धि; समुद्र के स्तर में वृद्धि भी आर्द्रभूमि को प्रभावित कर सकती है।

आर्द्रभूमि संरक्षण संबंधी मुद्दे:

वैश्विक आर्द्रभूमि संरक्षण पहल

भारत द्वारा संरक्षण उपाय

आगे की राह

स्रोत: डाउन टू अर्थ