बांध पुनर्वास और सुधार परियोजना | 31 Oct 2020

प्रिलिम्स के लिये:

आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति, बांध पुनर्वास और सुधार परियोजना (DRIP)

मेन्स के लिये:

मौजूदा बांधों और संबंधित परिसंपत्तियों की सुरक्षा और प्रदर्शन में स्थायी रूप से सुधार हेतु बांध पुनर्वास और सुधार परियोजना का महत्त्व।

चर्चा में क्यों ?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (The Cabinet Committee on Economic Affairs) ने विश्व बैंक और एशियाई अवसंरचना निवेश बैंक (Asian Infrastructure Investment Bank) द्वारा वित्तीय सहायता प्राप्त बांध पुनर्वास और सुधार परियोजना (Dam Rehabilitation and Improvement Project) के चरण-II और चरण-III को मंज़ूरी दे दी है। 

प्रमुख बिंदु:

  • इस परियोजना की लागत 10,211 करोड़ रुपए है।
  • इस परियोजना को लागू करने की अवधि 10 वर्ष (अप्रैल, 2021 से मार्च, 2031) है और इसमें दो चरण शामिल हैं। प्रत्येक चरण छह वर्षों का होगा। जिसमें दो वर्षों की ओवरलैपिंग (Overlapping) अवधि शामिल है। 
  •  कुल परियोजना लागत में बाहरी वित्तीय निधि 7,000 करोड़ रुपए है और शेष 3,211 करोड़ रुपए, संबंधित कार्यान्वयन एजेंसियों (Implementing Agencies) द्वारा वहन किये जाएंगे।
  • केंद्र सरकार का योगदान ऋण देयता के रूप में 1,024 करोड़ रुपए है और केंद्रीय घटक के हिस्से के रूप में प्रतिपक्ष निधि  (Counter-Part Funding) के अंतर्गत 285 करोड़ रुपए की धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी।

उद्देश्य:

  • चयनित मौजूदा बांधों और संबंधित परिसंपत्तियों की सुरक्षा और प्रदर्शन में स्थायी रूप से सुधार करना। 
  • भाग लेने वाले राज्यों के साथ-साथ केंद्रीय स्तर पर बांध सुरक्षा से संबंधित संस्थागत व्यवस्था को मज़बूत करना, और
  • कुछ चयनित बांधों में वैकल्पिक साधनों का पता लगाना, ताकि बांध के स्थायी संचालन और रख-रखाव के लिये अतिरिक्त राजस्व की प्राप्ति हो सके।

प्रमुख घटक:

  • बांधों और संबंधित आश्रयों का पुनर्वास और सुधार
  • प्रतिभागी राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों में बांध सुरक्षा संबंधित संस्थागत मज़बूती
  • कुछ चयनित बांधों में वैकल्पिक साधनों का पता लगाना, ताकि बांध के स्थायी संचालन और रख-रखाव के लिये अतिरिक्त राजस्व की प्राप्ति की जा सके, और
  • परियोजना प्रबंधन।

आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति

प्रधानमंत्री इस समिति के प्रमुख होते हैं। विभिन्न मंत्रालयों के कैबिनेट मंत्री इसके सदस्य होते हैं। इसके महत्त्वपूर्ण कार्य इस प्रकार हैं:

(i) आर्थिक क्षेत्र में सरकारी गतिविधियों का निर्देशन और समन्वय करना।

(ii) देश में आर्थिक रुझानों की समीक्षा करना और सुसंगत तथा एकीकृत नीतिगत ढाँचा विकसित करना।

(iii) छोटे और सीमांत किसानों से संबंधित तथा ग्रामीण विकास से संबंधित गतिविधियों की प्रगति की समीक्षा करना।

(iv) संयुक्त क्षेत्र के उपक्रमों की स्थापना के लिये मंत्रालयों के प्रस्तावों को शामिल कर औद्योगिक लाइसेंसिंग मामलों का निपटारा करना।

(v) विनिवेश से संबंधित मुद्दों पर विचार करना।

समिति को आवंटित अन्य कार्य इस प्रकार हैं:

(i) विश्व व्यापार संगठन से संबंधित मुद्दों पर विचार और फैसला करना है।

(ii) भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण से संबंधित मुद्दों पर विचार करना।

(iii) सामान्य कीमतों की निगरानी करना, आवश्यक और कृषि वस्तुओं की उपलब्धता और निर्यात का आकलन करना तथा कुशल सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिये कदम उठाना।

बांध पुनर्वास और सुधार परियोजना

  • मूल रूप से DRIP की कुल लागत 2100 करोड़ रुपए थी जिसमें राज्य का हिस्सा 1968 करोड़ रुपए और केंद्र का हिस्सा 132 करोड़ रुपए था।
  • प्रारंभ में यह परियोजना 6 वर्ष की अवधि के लिये थी। यह 18 अप्रैल, 2012 को प्रारंभ हुई और इसकी समाप्ति अवधि 30 जून, 2018 थी।
  • केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय तथा विश्व बैंक द्वारा वर्ष 2017 में सैद्धांतिक रूप से परियोजना क्रियान्वयन को दो वर्षों का विस्तार देते हुए परियोजना समाप्ति की संशोधित तिथि को 30 जून, 2020 कर दिया गया।

स्रोत: PIB