विश्व स्वास्थ्य सभा का 76वाँ सत्र | 02 Jun 2023

प्रिलिम्स के लिये:

विश्व स्वास्थ्य संगठन, विश्व स्वास्थ्य सभा, G20, आयुष्मान भारत

मेन्स के लिये:

विश्व स्वास्थ्य सभा में भारत की भागीदारी, विश्व स्वास्थ्य संगठन की कार्यप्रणाली, चिकित्सा पर्यटन में भारत का योगदान और महत्त्व

चर्चा में क्यों?  

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुख्यालय जिनेवा, स्विट्ज़रलैंड में 21 से 30 मई, 2023 तक 76वीं वार्षिक विश्व स्वास्थ्य सभा का आयोजन किया गया।

  • वर्ष 2023 की थीम है- "WHO at 75: Saving lives, driving health for all." 
  • 76वीं विश्व स्वास्थ्य सभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री की भागीदारी ने वैश्विक स्वास्थ्य के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को उजागर किया।
  • चीन और पाकिस्तान के विरोध के कारण ताइवान को WHO की बैठक से बाहर कर दिया गया था।

विश्व स्वास्थ्य सभा: 

  • परिचय: 
    • विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य सभा (WHA), WHO की निर्णय लेने वाली संस्‍था है, जिसमें WHO के सभी सदस्‍य देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने भाग लिया। 
    • यह वार्षिक रूप से WHO के मुख्यालय, जिनेवा, स्विट्ज़रलैंड में आयोजित की जाती है।
  • WHA के कार्य: 
    • संगठन की नीतियों पर निर्णय लेना।
    • WHO के महानिदेशक की नियुक्ति।
    • वित्तीय नीतियों का प्रशासन।
    • प्रस्तावित कार्यक्रम हेतु बजट की समीक्षा और अनुमोदन।

प्रमुख बिंदु: 

  • स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य के लिये वैश्विक योजना:
    • स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य के लिये एक वैश्विक कार्ययोजना विकसित करने हेतु मसौदा प्रस्ताव स्वीकार किया गया।
      • इस योजना पर वर्ष 2026 में 79वीं विश्व स्वास्थ्य सभा में विचार किया जाएगा।
    • स्थानीय लोगों के साथ परामर्श और उनकी स्वतंत्र, पूर्व एवं सूचित सहमति पर ज़ोर देना।
    • गरीबी, हिंसा, भेदभाव और स्वास्थ्य सेवा तक सीमित पहुँच जैसी चुनौतियों का समाधान करना।
    • प्रजनन, मातृ और किशोर स्वास्थ्य, कमज़ोर स्थितियों पर ध्यान देना।
    • सदस्यों से स्थानीय लोगों की विशिष्ट आवश्यकताओं की पहचान करने के लिये नैतिक डेटा एकत्र करने का आग्रह करना।
    • स्थानीय आबादी के स्वास्थ्य और कल्याण में सुधार लाना
  •  ड्राउनिंग से होने वाली मौतों की रोकथाम के लिये वैश्विक गठबंधन:   
    • 76वीं WHA बैठक के दौरान डूबने से होने वाली मौतों की रोकथाम के लिये वैश्विक गठबंधन (Global Alliance for Drowning Prevention) की स्थापना की गई।
    • वर्ष 2029 तक डूबने/ड्राउनिंग से जुड़ी वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को दूर करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
    • WHO कार्रवाई का समन्वय करेगा और ड्राउनिंग पर एक वैश्विक स्थिति रिपोर्ट तैयार करेगा।
      • ड्राउनिंग से होने वाली मौतों की 90% से अधिक घटनाएँ निम्न और मध्यम आय वाले देशों में होती हैं।
    • ड्राउनिंग से होने वाली मौतों के आधिकारिक वैश्विक अनुमान को काफी कम करके आँका जा सकता है क्योंकि इसमें बाढ़ से संबंधित जलवायु घटनाओं और जल परिवहन के दौरान होने वाली घटनाओं में डूबने वालों के आँकड़ों को शामिल नहीं किया जाता है।
  • रसायन, अपशिष्ट और प्रदूषण पर मसौदा संकल्प:
    • 76वीं विश्व स्वास्थ्य सभा के दौरान रसायन, अपशिष्ट और प्रदूषण प्रभाव पर मसौदा प्रस्ताव स्वीकार किया गया।
    • WHO ने संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के साथ अंतःस्रावी विघटनकारी रसायन रिपोर्ट को अद्यतन करने का आग्रह किया।
    • रासायनिक जोखिम और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं पर सीमित डेटा को लेकर प्रकाश डाला गया है।
    • यह प्रारूप कैडमियम, सीसा, पारा आदि जैसे खतरनाक रसायनों हेतु नियामक ढाँचे, बायोमाॅनीटरिंग और जोखिम पहचान हेतु प्रोत्साहित करता है।
    • इसमी खराब रासायनिक अपशिष्ट प्रबंधन और दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रभावों पर चिंता व्यक्त की गई है।
    • मानव स्वास्थ्य के निहितार्थ और डेटा अंतराल पर WHO रिपोर्ट हेतु अनुरोध किया गया है।
    • लिंग, आयु, विकलांगता और हानिकारक पदार्थों पर डेटा संग्रह को महत्त्व प्रदान करना।
  • WHO कार्यक्रम बजट: 
    • WHO के सदस्य देशों ने वर्ष 2024-2025 हेतु 6.83 बिलियन अमेरिकी डॉलर के बजट पर सहमति व्यक्त की, जिसमें निर्धारित योगदान में 20% की वृद्धि शामिल है।
    • पिछले कुछ वर्षों में मूल्यांकन किये गए योगदानों में गिरावट आई है, जो WHO के वित्तपोषण के एक-चौथाई से भी कम हेतु ज़िम्मेदार है।
    • शीर्ष योगदानकर्त्ताओं में जर्मनी, बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन, अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम और यूरोपीय आयोग शामिल हैं।
    • स्वैच्छिक योगदान पर WHO की निर्भरता शासन संबंधी चिंताओं को उजागर करती है और निरंतर तकनीकी सहयोग एवं लक्ष्य प्राप्ति की दिशा को प्रभावित करती है।
    • वर्ष 2023 तक सभी के स्वास्थ्य में सुधार हेतु प्रभावी तकनीकी सहयोग प्रदान करने और ट्रिपल बिलियन लक्ष्य को प्राप्त करने की WHO की क्षमता में बाधा डालने वाले कारकों पर प्रकाश डाला गया।

नोट:

ट्रिपल बिलियन लक्ष्य: ट्रिपल बिलियन लक्ष्य सरल और सुगम है। WHO का लक्ष्य वर्ष 2023 तक निम्नलिखित की प्राप्ति है:

  • 1 अरब से अधिक लोगों को सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज से लाभान्वित करना।
  • 1 अरब से अधिक लोगों को स्वास्थ्य आपात स्थितियों से बेहतर ढंग से सुरक्षित करना 
  • 1 अरब से अधिक लोगों को बेहतर स्वास्थ्य और खुशहाली प्रदान करना।
  • पुनः पूर्ति तंत्र:  
    • सदस्य राज्यों ने विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (WHO) के लिये वित्त के अनुकूल विकल्प प्रदान करने हेतु एक नए पुनः पूर्ति तंत्र को स्वीकार किया।
    • वर्तमान में विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन का अधिकांश वित्त विशिष्ट स्वैच्छिक योगदान से आता है जिससे आवश्यकतानुसार वित्त को स्थानांतरित किया जा सकता है।
    • पुनः पूर्ति तंत्र का उद्देश्य विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के आधार खंड के गैर-वित्तीय हिस्से को कवर करने और वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिये स्वैच्छिक योगदान बढ़ाना है।

WHO वित्तपोषण: 

  • निर्धारित मूल्यांकन: 
    • इसकी गणना किसी देश के सकल घरेलू उत्पाद के प्रतिशत के रूप में की जाती है
    • WHO के कुल बजट में 20% से कम हिस्सेदारी  
    • इसे विश्व स्वास्थ्य सभा में प्रत्येक दो वर्ष में अनुमोदित किया जाता है
  • स्वैच्छिक योगदान:
    • संगठन के वित्तीयन के तीन-चौथाई से अधिक के लिये खाता
    • सदस्य राज्यों और अन्य भागीदारों द्वारा
    • आगे लचीलेपन के आधार पर वर्गीकरण:
      • मूल स्वैच्छिक योगदान (CVC):  
        • यह पूर्णत: बिना शर्त और लचीलेपन के सभी स्वैच्छिक योगदानों का 4.1% प्रतिनिधित्व करता है।
      • विषयगत और रणनीतिक भागीदारी निधि:  
        • आंशिक रूप से लचीला, वर्ष 2020-2021 में सभी स्वैच्छिक योगदान के 7.9% का प्रतिनिधित्व करता है।
      • निर्दिष्ट स्वैच्छिक योगदान: 
        • सभी स्वैच्छिक योगदानों के 88% का प्रतिनिधित्व करने वाले विशिष्ट कार्यक्रम संबंधी क्षेत्रों और/या भौगोलिक स्थानों के लिये कड़ाई से निर्धारित।
  • महामारी प्रतिक्रिया अनुदान: 
    • WHO महामारी सहित वैश्विक स्वास्थ्य आपात स्थितियों की प्रतिक्रिया पर विभिन्न स्रोतों से अतिरिक्त वित्तपोषण प्राप्त करता है।
    • कोविड-19 एकजुटता प्रतिक्रिया कोष की स्थापना कोविड-19 महामारी के दौरान सरकारों, संगठनों और व्यक्तियों से योगदान प्राप्त करने के लिये की गई थी।
  • भारत की भागीदारी:  
    • इसने वैश्विक स्वास्थ्य प्रणालियों के सहयोग और लचीलेपन के महत्त्व पर बल दिया। 
    • भारत ने 100 से अधिक देशों को 300 मिलियन COVID-19 वैक्सीन वितरण में योगदान दिया।
    • योग और आयुर्वेद जैसी पारंपरिक प्रणालियों के महत्त्व पर बल दिया।  
    • WHO ने भारत में पारंपरिक चिकित्सा के लिये वैश्विक केंद्र की स्थापना का जिक्र किया। 
    • G20 थीम 'एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य' का समर्थन किया। 
    • स्वास्थ्य सेवा और आयुष्मान भारत योजना में भारत की उपलब्धियों को साझा किया।
    •  WHO के निम्न और मध्यम आय वाले सदस्य देशों का समर्थन करने की इच्छा व्यक्त की।
    • मेडिकल वैल्यू ट्रैवल और क्षय रोग उन्मूलन के प्रति प्रतिबद्धता में भारत के योगदान पर प्रकाश डाला।
    • विश्व स्तर पर आयुष उपचार को बढ़ावा देने के लिये 'हील बाय इंडिया' पहल पर बल दिया।
    • सभी के लिये समावेशी विकास और स्वास्थ्य सेवा के महत्त्व पर बल दिया।

स्रोत: डाउन टू अर्थ