MoSPI ने बिहार में SDG और लैंगिक सांख्यिकी कार्यशाला का आयोजन किया | बिहार | 23 Mar 2026
चर्चा में क्यों?
सतत विकास लक्ष्यों (SDGs), पर्यावरण लेखांकन और लैंगिक सांख्यिकी के निगरानी ढाँचों पर दो दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला बिहार के पटना में आयोजित की गई।
मुख्य बिंदु:
- आयोजन प्राधिकरण: यह कार्यशाला सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय द्वारा बिहार सरकार और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के सहयोग से आयोजित की गई।
- मुख्य थीम: कार्यशाला में तीन प्रमुख क्षेत्रों—SDG निगरानी ढाँचे, पर्यावरण लेखांकन और लैंगिक सांख्यिकी पर ध्यान केंद्रित किया गया।
- उद्देश्य: प्रभावी नीतिगत निर्माण और विकास परिणामों की निगरानी के लिये समयबद्ध, सुदृढ़ और पृथक (डिसएग्रीगेटेड) डेटा संग्रह पर ज़ोर दिया गया।
- जारी की गई रिपोर्टें:
- पर्यावरण लेखांकन व्याख्या शृंखला: परागण सेवाएँ
- प्लैनेट इन फोकस: SDGs के तहत पर्यावरणीय स्थिरता को आगे बढ़ाना
- बड़े पैमाने पर समृद्धि प्रदान करना: SDGs के माध्यम से भारत का आर्थिक रूपांतरण
- SDG निगरानी पहलें: इसमें राष्ट्रीय संकेतक ढाँचा, पंचायत उन्नति सूचकांक और पूर्वोत्तर क्षेत्र (NER) जिला SDG सूचकांक के साथ-साथ वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाएँ शामिल हैं।
- लैंगिक सांख्यिकी: महिलाओं के कार्य, गतिशीलता, लैंगिक डेटा अंतराल और लैंगिक-संवेदनशील नीतिनिर्माण के साथ अंतर्राष्ट्रीय अनुभवों को उजागर किया गया।
- पर्यावरण लेखांकन: पर्यावरणीय स्थिरता से जुड़े प्रमुख विषयों भारत में पर्यावरण लेखांकन ढाँचों का कार्यान्वयन, वन पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं का मूल्यांकन और राज्य स्तर पर वन लेखांकन के अनुभव पर चर्चा की गई। साथ ही जैव विविधता और परागण सेवाओं के आर्थिक मूल्यांकन पर भी विचार किया गया।
- पर्यावरणीय सांख्यिकी तंत्र को सुदृढ़ करने के लिये राज्य स्तर की पहलों तथा TEEB परियोजना के अंतर्गत जैविक खेती और कृषि वानिकी के आर्थिक मूल्यांकन का भी अध्ययन किया गया।
- TEEB (द इकोनॉमिक्स ऑफ इकोसिस्टम्स एंड बायोडायवर्सिटी): यह एक वैश्विक पहल है, जो जैव विविधता के आर्थिक मूल्य को रेखांकित करती है और नीतिनिर्माण एवं व्यावसायिक निर्णयों में पारिस्थितिकी तंत्र के पहलुओं को शामिल करने का समर्थन करती है।
- महत्त्व: यह कार्यशाला डेटा-आधारित शासन, सतत विकास और समावेशी वृद्धि के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जो ‘विकसित भारत 2047’ के दृष्टिकोण के अनुरूप है।