उत्तर प्रदेश के एनसीआर ज़िलों में पटाखों पर प्रतिबंध | उत्तर प्रदेश | 30 Aug 2025
चर्चा में क्यों?
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) ज़िलों में पटाखों के निर्माण, भंडारण, बिक्री और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।
मुख्य बिंदु
- प्रतिबंध के बारे में:
- यह प्रतिबंध दिल्ली-NCR क्षेत्र के अंतर्गत आठ ज़िलों पर लागू होता है, जिनमें मेरठ, गाज़ियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, बुलंदशहर, हापुड़, बागपत, शामली और मुज़फ्फरनगर शामिल हैं।
- प्रतिबंध का क्रियान्वयन दशहरा और दीपावली जैसे त्योहारों से पूर्व सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप किया गया है, ताकि NCR में प्रदूषण स्तर को नियंत्रित किया जा सके।
- पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 15 के तहत उल्लंघन करने पर पाँच वर्ष तक का कारावास और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
- धारा 15 केंद्र सरकार को किसी भी प्राधिकरण या अधिकारी को पर्यावरण संरक्षण के लिये कार्य करने का निर्देश देने का अधिकार देती है।
- बार-बार अपराध करने पर, अनुपालन होने तक प्रतिदिन 5,000 रुपए का अतिरिक्त जुर्माना लगाया जाएगा।
- प्रतिबंध के उद्देश्य:
- वायु प्रदूषण नियंत्रण: इस प्रतिबंध का उद्देश्य त्योहारों के समय वायु प्रदूषण में होने वाली वृद्धि, विशेष रूप से पटाखों के उपयोग के कारण होने वाली वृद्धि को रोकना है।
- सार्वजनिक स्वास्थ्य संरक्षण: इस उपाय का उद्देश्य सार्वजनिक स्वास्थ्य को वायु प्रदूषण के हानिकारक प्रभावों से बचाना है, विशेष रूप से उच्च प्रदूषण वाले महीनों के दौरान।
पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986
- पृष्ठभूमि:
- संसद ने इस अधिनियम को भोपाल गैस त्रासदी के बाद पारित किया, जिसने पर्यावरण और जन-स्वास्थ्य संरक्षण हेतु एक समग्र कानून की तात्कालिक आवश्यकता को रेखांकित किया।
- संवैधानिक आधार:
- यह अधिनियम संविधान के अनुच्छेद 253 के अंतर्गत पारित किया गया, जो संसद को अंतर्राष्ट्रीय समझौतों को लागू करने हेतु कानून बनाने का अधिकार देता है। इसे 1972 के स्टॉकहोम सम्मेलन में भारत द्वारा की गई अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिये लागू किया गया।
- यह अधिनियम केंद्र सरकार को पर्यावरण प्रदूषण को रोकने, नियंत्रित करने और उसका प्रत्युत्तर देने का अधिकार देता है।
- इसके अंतर्गत केंद्र सरकार को मानक निर्धारित करने, उत्सर्जन विनियमित करने, प्रदूषणकारी उद्योगों को बंद करने तथा आवश्यक सेवाओं को नियंत्रित करने का अधिकार है।
- संवैधानिक प्रावधान:
- अनुच्छेद 48A राज्य को पर्यावरण, वन और वन्य जीवन की रक्षा करने का निर्देश देता है।
- अनुच्छेद 51A (g) प्रत्येक नागरिक का यह कर्त्तव्य है कि वह प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा करें और उसे सुधारने का प्रयास करें।
विश्व जल सप्ताह 2025 | उत्तर प्रदेश | 30 Aug 2025
चर्चा में क्यों?
24-28 अगस्त, 2025 को स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में विश्व जल सप्ताह का आयोजन किया गया।
मुख्य बिंदु
- विश्व जल सप्ताह के बारे में:
- वर्ष 1991 में स्थापित, यह कार्यक्रम स्टॉकहोम अंतर्राष्ट्रीय जल संस्थान (SIWI) द्वारा आयोजित किया जाता है तथा जल प्रबंधन से संबंधित ज्ञान, समाधान और प्रतिबद्धताओं के आदान-प्रदान के लिये एक महत्त्वपूर्ण मंच प्रदान करता है।
- वर्ष 2025 संस्करण, जो अपने 35वें वर्ष को चिह्नित करता है, ' जलवायु कार्रवाई हेतु जल' विषय पर केंद्रित था, जिसमें जलवायु परिवर्तन से निपटने और सतत् विकास प्राप्त करने में जल की भूमिका पर प्रकाश डाला गया।
- भारत की भूमिका:
- विश्व जल सप्ताह 2025 के दौरान, NMCG ‘नदी शहरों की पुनर्कल्पना: जलवायु-स्मार्ट और बेसिन-केंद्रित शहरी विकास’ सत्र का हिस्सा था, जिसमें जलवायु-लचीले शहरों को सुनिश्चित करने में नदी-केंद्रित शहरी विकास की भूमिका पर प्रकाश डाला गया।
- सत्र में सतत् शहरी नियोजन के लाभों और बेसिन-केंद्रित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर ज़ोर दिया गया, जिसमें संपूर्ण नदी पारिस्थितिकी तंत्र पर विचार किया गया।
- सत्र का नेतृत्व NMCG, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स (NIUA) और डॉयचे गेसेलशाफ्ट फर इंटरनेशनेल ज़ुसामेनरबीट (GIZ) ने किया।
नमामि गंगे मिशन
- यह गंगा नदी और इसकी सहायक नदियों के पुनर्जीवन हेतु एक प्रमुख कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य प्रदूषण को कम करना, जल की गुणवत्ता में सुधार करना तथा नदी के पारितंत्र को पुनर्स्थापित करना है।
- कार्यान्वयन: हाइब्रिड-एन्यूटी-मॉडल (HAM) के तहत चयनित बोलीदाता द्वारा गठित विशेष प्रयोजन निकाय (SPV) शोधन संयंत्रों (STP) के विकास, संचालन और अनुरक्षण की ज़िम्मेदारी संभालता है।
- लागत का 40% निर्माण के बाद तथा शेष 60% परियोजना की पूरी अवधि के दौरान प्रदान किया जाता है।
भारत जल सप्ताह (IWW)
- भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय ने वर्ष 2012 में भारत जल सप्ताह की संकल्पना की और इसे प्रारंभ किया, जिसे अब प्रत्येक दो वर्ष में आयोजित किया जाता है।
- इसका उद्देश्य जल प्रबंधन से संबंधित महत्त्वपूर्ण चुनौतियों का समाधान करना तथा जल-संबंधी प्रौद्योगिकियों और प्रक्रियाओं में नवाचार को प्रोत्साहित करना है।
- IWW वैश्विक जल कूटनीति का एक महत्त्वपूर्ण मंच बन चुका है, जो जल-संबंधी प्रमुख चुनौतियों पर संवाद, नवाचार और ज्ञान के आदान-प्रदान को सुगम बनाता है।
AI संचालित यूपी स्किल गैप डैशबोर्ड | उत्तर प्रदेश | 30 Aug 2025
चर्चा में क्यों?
उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (UPSDM) ने राज्य में रोज़गार-क्षमता बढ़ाने हेतु AI संचालित यूपी स्किल गैप डैशबोर्ड नामक एक अभिनव उपकरण की शुरुआत की है।
मुख्य बिंदु
- डैशबोर्ड के बारे में:
- यह पहली बार है जब उत्तर प्रदेश में ज़िलावार कौशल आवश्यकताओं का आकलन करने के लिये AI का उपयोग किया जा रहा है, जिससे स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसर सृजित करने में सहायता मिलेगी।
- विशेषताएँ:
- AI और डेटा एनालिटिक्स एकीकरण: डैशबोर्ड ज़िला-विशिष्ट क्षेत्रों और रोज़गार डेटा का विश्लेषण करने के लिये उन्नत मशीन लर्निंग एल्गोरिदम तथा डेटा एनालिटिक्स का उपयोग करता है।
- यह प्रमुख क्षेत्रों और उद्योगों के लिये ज़िलावार आँकड़े प्राप्त करता है तथा प्रशिक्षण भागीदारों से व्यापार-विशिष्ट मांगे भी प्राप्त करता है।
- ज़िला-विशिष्ट कौशल मूल्यांकन: यह विभिन्न ज़िलों में कौशल अंतराल की पहचान करने में मदद करता है तथा एक व्यापक कौशल मूल्यांकन प्रदान करता है।
- यह प्रत्येक ज़िले में क्षेत्र-विशिष्ट विकास और रोज़गार आवश्यकताओं के आधार पर आवश्यक प्रशिक्षण की सिफारिश करता है।
- लाभ:
- ज़िला स्तरीय कौशल विकास: डैशबोर्ड वैज्ञानिक विश्लेषण के माध्यम से उन क्षेत्रों की पहचान करता है जहाँ प्रशिक्षित जनशक्ति की ज़रूरत है।
- इससे स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर प्रशिक्षण लक्ष्यों का बेहतर आवंटन संभव होगा और प्रत्येक ज़िले में रोज़गार-क्षमता में वृद्धि होगी।
- नौकरी छोड़ने की प्रवृत्ति में कमी: स्थानीय रोज़गार बाज़ार से प्रशिक्षण को संरेखित कर यह सुनिश्चित किया जाता है कि उम्मीदवारों को अन्य ज़िलों में नौकरी खोजने के लिये पलायन न करना पड़े।
- प्रशिक्षण भागीदार के रूप में उद्योगों की भागीदारी: पहली बार कौशल विकास प्रक्रिया में उद्योगों को प्रशिक्षण भागीदार के रूप में शामिल किया गया है।
- अब 45 से अधिक उद्योग, उद्योग-विशिष्ट प्रशिक्षण प्रयासों में सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं।
- प्रशिक्षण लक्ष्य आवंटन के लिये AI संचालित अंतर्दृष्टि: डैशबोर्ड क्षेत्रवार प्रशिक्षण लक्ष्यों को प्रोजेक्ट करने के लिये वास्तविक समय डेटा स्क्रैपिंग और प्राथमिक अनुसंधान का उपयोग करता है।
- शीर्ष प्रदर्शन करने वाले भागीदारों को प्रशिक्षण लक्ष्य आवंटित किये जाते हैं जिससे यह सुनिश्चित होता है कि अभ्यर्थियों को उच्च गुणवत्ता वाला प्रशिक्षण प्रदान किया जाए।
- प्रशिक्षण साझेदार मूल्यांकन: प्रशिक्षण साझेदारों का मूल्यांकन प्रशिक्षण और प्लेसमेंट में उनके पिछले प्रदर्शन के आधार पर किया जाता है।
- यह प्रत्येक ज़िले में शीर्ष उद्योगों, नौकरी भूमिकाओं और कौशल अंतराल का मानचित्रण करता है जिससे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिये सटीक तथा अद्यतन जानकारी सुनिश्चित होती है।
- एकीकरण:
- यह प्रणाली UPSDM के लिये इंटरैक्टिव समर्थन प्रदान करने के लिये लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) संचालित चैटबॉट के साथ एकीकृत किया गया है।
- AI आधारित उपकरण वास्तविक समय सहायता प्रदान करता है, प्रक्रिया के माध्यम से उपयोगकर्त्ताओं का मार्गदर्शन करता है और प्रशिक्षण व रोज़गार से संबंधित प्रश्नों का उत्तर देता है।