विश्व दिवस 2026 | 05 Mar 2026

चर्चा में क्यों?

विश्व वन्यजीव दिवस प्रतिवर्ष 3 मार्च को मनाया जाता है, ताकि जंगली जीव-जंतु और वनस्पतियों का संरक्षण किया जा सके तथा जैव विविधता की सुरक्षा की आवश्यकता के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाई जा सके।

मुख्य बिंदु:

  • प्रस्तावना: यह दिवस संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) द्वारा वर्ष 2013 में घोषित किया गया था, जो वर्ष 1973 में अपनाए गए विनिर्देशित प्रजातियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार सम्मेलन (CITES) को चिह्नित करता है।
  • 3 मार्च क्यों?: यह तिथि जंगली जीव-जंतु और पौधों की अंतर्राष्ट्रीय व्यापार संधि (CITES) के हस्ताक्षर को स्मरण करती है, जो यह सुनिश्चित करने के लिये एक वैश्विक समझौता है कि जंगली जानवरों और पौधों का अंतर्राष्ट्रीय व्यापार उनकी जीवित रहने की क्षमता को खतरे में न डाले।
  • थीम: विश्व वन्यजीव दिवस 2026 की आधिकारिक थीम है – "औषधीय और सुगंधित पौधे: स्वास्थ्य, धरोहर एवं आजीविका का संरक्षण (Medicinal and Aromatic Plants: Conserving Health, Heritage and Livelihoods)"।
  • उच्च प्राथमिकता वाली अति-संवेदनशील प्रजातियाँ (2026 फोकस): हालाँकि संरक्षण समग्र है, वर्ष 2026 की रिपोर्ट में कुछ विशेष ‘फ्लैगशिप प्रजातियाँ’ को उजागर किया गया है, जो पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य का संकेत देती हैं:

    • एशियाई हाथी (Elephas maximus): दक्षिण एशिया में मानव-वन्यजीव संघर्ष (HWC) और आवासीय विखंडन का सामना कर रहे हैं। इसका फोकस ‘हाथी गलियारों’ पर है।
    • ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB): गंभीर रूप से संकटग्रस्त, केवल 150 से भी कम व्यक्ति शेष। संरक्षण प्रयास राजस्थान और गुजरात में ‘पावर लाइन राहत’ पर केंद्रित हैं।
    • स्नो लेपर्ड (Panthera uncia): ‘घोस्ट ऑफ माउंटेन्स’ कहलाने वाला यह प्राणी हिमालयी अल्पाइन पारिस्थितिकी तंत्र पर जलवायु परिवर्तन के खतरे में है। 
    • गिद्ध (Gyps प्रजातियाँ): स्वच्छता के लिये महत्त्वपूर्ण; ध्यान डाइक्लोफेनाक को समाप्त करने और ‘गिद्ध सुरक्षा क्षेत्रों’ का निर्माण करने पर है।
    • डुगोंग (समुद्री गाय): भारत का पहला डुगोंग संरक्षण क्षेत्र पाल्क खाड़ी में स्थित है, जो समुद्री जैव विविधता के लिये महत्त्वपूर्ण है।
  • महत्त्व: 15,000 औषधीय पादप प्रजातियों से समृद्ध भारत ने अपनी 'हरित संपदा' का प्रदर्शन करते हुए इस दिवस का आयोजन किया, जिसमें हिमालय और पश्चिमी घाट जैसे क्षेत्रों में राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (NMPB) के संरक्षण प्रयासों पर विशेष बल दिया गया।
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