उत्तराखंड नए आपराधिक कानूनों के कार्यान्वयन में प्रथम | 12 Mar 2026
चर्चा में क्यों?
उत्तराखंड ने अंतर-संचालनीय आपराधिक न्याय प्रणाली (ICJS) 2.0 के माध्यम से नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन में संपूर्ण देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है।
मुख्य बिंदु:
- रैंकिंग: राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो (NCRB) के CCTNS/ICJS प्रगति डैशबोर्ड के अनुसार उत्तराखंड ने 93.46 अंक प्राप्त किये, जो देश के सभी राज्यों में सर्वाधिक हैं।
- शीर्ष पाँच राज्य: राष्ट्रीय रैंकिंग में उत्तराखंड प्रथम स्थान पर है, इसके बाद हरियाणा (93.41), असम (93.16), सिक्किम (91.82) तथा मध्य प्रदेश (90.55) का स्थान है।
- नए आपराधिक कानूनों का क्रियान्वयन: राज्य के इस प्रदर्शन में भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) तथा भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) के प्रभावी कार्यान्वयन की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है।
- ICJS 2.0 के तहत ‘एक डेटा, एक प्रविष्टि’ सिद्धांत अपनाया गया है, जिसके माध्यम से पुलिस (CCTNS), ई-कोर्ट, ई-जेल, ई-अभियोजन और ई-फॉरेंसिक के बीच वास्तविक समय में निर्बाध डेटा साझा करना संभव हो सका है। इससे कागज़ी कार्यवाही में कमी आई है तथा मामलों के निपटारे की प्रक्रिया अधिक तीव्र हुई है।
- प्रौद्योगिकी एकीकरण: पारदर्शिता और दक्षता को बढ़ाने के लिये अपराध स्थलों की वीडियोग्राफी तथा ई-साक्ष्य ऐप के माध्यम से डिजिटल साक्ष्यों का सुरक्षित भंडारण अनिवार्य किया गया है। साथ ही न्याय श्रुति प्लेटफॉर्म के माध्यम से वर्चुअल अदालतों की सुनवाई को भी समर्थन प्रदान किया जा रहा है।
- नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये राज्य में 23,000 से अधिक पुलिस कर्मियों को इन प्रावधानों तथा उनके व्यावहारिक उपयोग के संबंध में व्यापक प्रशिक्षण प्रदान किया गया है।
- मान्यता: उत्तराखंड की डिजिटल न्याय वितरण और स्मार्ट पुलिस व्यवस्था में दक्षता को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री सहित प्रमुख नेताओं की सराहना शामिल है।
|
और पढ़ें: नए आपराधिक कानून, राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो (NCRB) |