पश्चिम बंगाल में पुलिस में बड़ा फेरबदल: पीयूष पांडे को कार्यवाहक DGP नियुक्त किया | 02 Feb 2026
चर्चा में क्यों?
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से कुछ महीने पहले किये गए एक महत्त्वपूर्ण प्रशासनिक फेरबदल में राज्य सरकार ने वरिष्ठ IPS अधिकारी पीयूष पांडेय को राजीव कुमार के स्थान पर कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक (DGP) नियुक्त किया है।
मुख्य बिंदु:
- DGP नियुक्ति नियम: प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ (2006) के निर्णय के अनुसार—
- चयन: राज्यों को पात्र वरिष्ठ अधिकारियों की सूची UPSC को भेजनी होती है।
- संक्षिप्त सूची: UPSC योग्यता और वरिष्ठता के आधार पर तीन अधिकारियों का एक पैनल तैयार करता है।
- कार्यकाल: सेवानिवृत्ति की तिथि चाहे जो भी हो, DGP का न्यूनतम कार्यकाल दो वर्ष होना चाहिये।
- कार्यवाहक DGP: सर्वोच्च न्यायालय ने बार-बार ‘कार्यवाहक DGP’ नियुक्त करने की प्रथा को हतोत्साहित किया है और इस तर्क पर ज़ोर दिया है कि वर्तमान पदाधिकारी के सेवानिवृत्त होने से पहले स्थायी नियुक्ति अंतिम कर ली जानी चाहिये।
- चुनाव-पूर्व तैयारी: 52 वरिष्ठ अधिकारियों का तबादला-पुनर्नियोजन विधानसभा चुनावों से पहले प्रशासनिक निरंतरता सुनिश्चित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिये एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है।
- ‘कार्यवाहक’ DGP की प्रवृत्ति: यह नियुक्ति अंतरिम व्यवस्थाओं की परंपरा को आगे बढ़ाती है। चयन पैनल को लेकर राज्य सरकार और UPSC के बीच चल रहे कानूनी विवादों के कारण पश्चिम बंगाल में दिसंबर 2023 से कोई स्थायी DGP नहीं रहा है।
- कानूनी अड़चनें: स्थायी नियुक्ति से संबंधित मामला दिल्ली उच्च न्यायालय में विचाराधीन है।
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और पढ़ें: प्रकाश सिंह केस (2006), सर्वोच्च न्यायालय |