भारत की GARBH-INi पहल: समय से पहले जन्म का शीघ्र पूर्वानुमान | 27 Mar 2026
चर्चा में क्यों?
भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) का प्रमुख कार्यक्रम GARBH-INi (जन्म परिणामों पर उन्नत अनुसंधान के लिये अंतर्विषयक समूह) मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य अनुसंधान में उन्नत विज्ञान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डेटा-आधारित दृष्टिकोणों के एकीकरण के माध्यम से महत्त्वपूर्ण परिवर्तन ला रहा है, जिससे समयपूर्व जन्म जैसे प्रतिकूल जन्म परिणामों की भविष्यवाणी तथा रोकथाम संभव हो रही है।
मुख्य बिंदु:
- पृष्ठभूमि: भारत में समयपूर्व जन्म (प्रिटर्म बर्थ) का बोझ वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक में से एक है, जो नवजात और बाल मृत्यु दर तथा दीर्घकालिक स्वास्थ्य जटिलताओं में महत्त्वपूर्ण योगदान देता है।
- अध्ययन: GARBH-INi पहल के तहत भारत का सबसे बड़ा गर्भावस्था कोहोर्ट अध्ययन लगभग 12,000 गर्भवती महिलाओं को ट्रैक करता है, जिसका उद्देश्य उन्नत अनुसंधान के माध्यम से समयपूर्व जन्म को रोकना है।
- यह पहल कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित पूर्वानुमान मॉडल विकसित करने पर केंद्रित है, जिनमें भारतीय जनसंख्या के अनुरूप गर्भावस्था डेटिंग टूल शामिल हैं, जिससे समयपूर्व जन्म के जोखिम वाली महिलाओं की शीघ्र पहचान संभव हो सके।
- GARBH-INi: यह पहल क्लिनिकल एपिडेमियोलॉजी, मल्टी-ओमिक्स अनुसंधान (जीनोमिक्स, प्रोटिओमिक्स, माइक्रोबायोम अध्ययन) और AI-आधारित पूर्वानुमान मॉडलिंग को एकीकृत कर गर्भावस्था के दौरान प्रारंभिक जोखिम पहचान तथा व्यक्तिगत हस्तक्षेप के लिये व्यापक उपकरण विकसित करती है।
- उद्देश्य: इस कार्यक्रम का लक्ष्य त्वरित निदान उपकरण विकसित करना है, जिनमें माइक्रोबायोम-आधारित बायोथेरैप्यूटिक्स तकनीक शामिल है, जिसे अनुसंधान और क्लिनिकल सेटिंग्स में स्थानांतरित तथा व्यापक स्तर पर लागू किया जा सके।
- डेटा-साझाकरण प्लेटफॉर्म: GARBH-INi-DRISHTI नामक एक डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किया गया है, जो शोधकर्त्ताओं को वैज्ञानिक अध्ययनों के लिये डेटा तक पहुँच और साझा करने में सक्षम बनाता है।
- महत्त्व: भारत की जैव-अर्थव्यवस्था वर्ष 2014 में लगभग 10 बिलियन डॉलर से बढ़कर लगभग 195 बिलियन डॉलर तक पहुँच गई है और अब देश निवारक तथा प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता के लिये वैश्विक स्तर पर पहचान प्राप्त कर रहा है।
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