महत्त्वपूर्ण खनिजों के लिये भारत की पहली टेलिंग्स नीति | 23 Jan 2026
चर्चा में क्यों?
भारत सरकार ने देश की पहली टेलिंग्स नीति (Tailings Policy) की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य खनन अपशिष्ट जैसे टेलिंग्स, माइन डंप, स्लैग और ओवरबर्डन से महत्त्वपूर्ण तथा रणनीतिक खनिजों की पुनर्प्राप्ति को सक्षम बनाना है।
मुख्य बिंदु:
- टेलिंग्स की परिभाषा: टेलिंग्स वे अवशिष्ट अपशिष्ट पदार्थ होते हैं (चट्टानों का महीन अवशेष, जल और रसायन) जो अयस्क से मूल्यवान खनिज निकालने के बाद बच जाते हैं।
- द्वितीयक स्रोतों से पुनर्प्राप्ति: यह नीति मौजूदा माइन डंप, स्लैग, फ्लाई ऐश और टेलिंग्स तालाबों से ‘सह-खनिजों’ के निष्कर्षण पर ध्यान केंद्रित करती है।
- अंतर-मंत्रालयी समन्वय: चूँकि महत्त्वपूर्ण खनिज विभिन्न क्षेत्रों द्वारा सॅंभाले जाने वाले पदार्थों में पाए जाते हैं, इसलिये नीति कोयला, खान, पेट्रोलियम और परमाणु ऊर्जा मंत्रालयों के बीच समन्वित दृष्टिकोण को अनिवार्य बनाती है।
- तकनीकी क्रियान्वयन: भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI), भारतीय खान ब्यूरो (IBM) और परमाणु खनिज निदेशालय (AMD) जैसी एजेंसियाँ इन द्वितीयक संसाधनों की पहचान, नमूनाकरण तथा आर्थिक मूल्यांकन का नेतृत्व करेंगी।
- परिपत्र अर्थव्यवस्था: अपशिष्ट के पुनःप्रसंस्करण के माध्यम से यह नीति परिपत्र खनन अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देती है, नए खानों की आवश्यकता को कम करती है और भूमि क्षरण तथा जल प्रदूषण जैसे पर्यावरणीय खतरों को न्यूनतम करती है।
- आयात निर्भरता में कमी: भारत लिथियम, कोबाल्ट और दुर्लभ मृदा तत्त्वों (REEs) जैसे खनिजों के लिये भारी मात्रा में आयात पर निर्भर है। टेलिंग्स के पुनःप्रसंस्करण से इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) और स्वच्छ ऊर्जा के लिये घरेलू आपूर्ति शृंखलाएँ सुदृढ़ होंगी।
- आर्थिक मूल्य: सह-धातुओं की पुनर्प्राप्ति (जैसे तांबे की टेलिंग्स से सेलेनियम और कोबाल्ट या जिंक अपशिष्ट से इंडियम) अरबों डॉलर के ‘हिडन’ खनिज मूल्य को उजागर कर सकते हैं।
- राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूपता: यह नीति राष्ट्रीय महत्त्वपूर्ण खनिज मिशन और आत्मनिर्भर भारत को समर्थन देती है, जिससे दीर्घकालिक संसाधन सुरक्षा सुनिश्चित होती है।