CARA ने भोपाल में मध्य क्षेत्र कार्यशाला आयोजित की | 25 Mar 2026

चर्चा में क्यों?

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अंतर्गत केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) ने मध्य प्रदेश के भोपाल में केंद्रीय क्षेत्र के लिये अपनी तीसरी क्षेत्रीय परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया।

मुख्य बिंदु:

  • आयोजक: यह कार्यशाला CARA द्वारा उसके देशव्यापी दत्तक ग्रहण जागरूकता अभियान के तहत आयोजित की गई।
  • थीम: यह “विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (दिव्यांग बच्चों) के गैर-संस्थागत पुनर्वास को बढ़ावा देना” पर केंद्रित, जिसमें दीर्घकालिक संस्थागत देखभाल के बजाय परिवार-आधारित देखभाल पर ज़ोर दिया गया।
    • मुख्य अतिथि: इस कार्यशाला में मध्य प्रदेश सरकार की महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।
  • केंद्रीय क्षेत्र के राज्य: मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड।
    • यह भारतीय राज्यों का एक क्षेत्रीय समूह है, जिसका उपयोग दत्तक ग्रहण और बाल कल्याण कार्यक्रमों में प्रशासनिक समन्वय के लिये किया जाता है।
  • दत्तक ग्रहण के मूलभूत सिद्धांत:
    • बच्चे के सर्वोत्तम हित: प्रत्येक दत्तक ग्रहण में बच्चे के कल्याण और सर्वोत्तम हित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिये।
    • भारतीय नागरिकों को प्राथमिकता: बच्चे को गोद लेने के लिये भारतीय नागरिकों को प्राथमिकता दी जानी चाहिये, ताकि उसे यथासंभव अपने सामाजिक-सांस्कृतिक वातावरण में रखा जा सके।
    • पंजीकरण और गोपनीयता: सभी दत्तक आवेदन निर्धारित ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकृत होने चाहिये और उनकी गोपनीयता सक्षम प्राधिकारी द्वारा बनाए रखी जानी चाहिये।
    • प्राधिकरणों की भूमिका:
      • विशेषीकृत दत्तक एजेंसियाँ (SAAs): वे बच्चों का प्रबंधन करती हैं जो कानूनी रूप से दत्तक ग्रहण के लिये उपलब्ध हैं।
      • ज़िला बाल संरक्षण इकाइयाँ (DCPUs): वे स्थानीय स्तर पर प्रक्रिया की निगरानी करती हैं।
    • न्यायालय आदेश: दत्तक ग्रहण केवल ज़िला मजिस्ट्रेट या सक्षम प्राधिकारी (जुवेनाइल जस्टिस अधिनियम के संशोधनों के अनुसार) की स्वीकृति के बाद ही कानूनी रूप से वैध होता है।
  • दिव्यांग बच्चों के लिये दत्तक नीति:
    • कानूनी ढाँचा: भारत में दिव्यांग बच्चों के दत्तक ग्रहण को जुवेनाइल जस्टिस (बालकों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के तहत 2022 के दत्तक विनियमों द्वारा नियंत्रित किया जाता है, जिसे केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) लागू करता है।
    • परिवार देखभाल का समान अधिकार: यह नीति मान्यता देती है कि दिव्यांग बच्चों को भी अन्य बच्चों की तरह प्रेमपूर्ण और सहयोगी पारिवारिक वातावरण में बड़े होने का समान अधिकार है।

और पढ़ें: केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA), दिव्यांगजन, बाल दत्तक ग्रहण, किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015