बिहार ‘नक्सल-मुक्त’ राज्य घोषित | 25 Feb 2026

चर्चा में क्यों?

बिहार सरकार ने घोषणा की है कि वरिष्ठ माओवादी विद्रोही सुरेश कोड़ा उर्फ मुस्तकीम के आत्मसमर्पण के बाद राज्य अब माओवादी-मुक्त हो गया है।

मुख्य बिंदु:

  • ऐतिहासिक संदर्भ: सशस्त्र संघर्ष की माओवादी विचारधारा में निहित नक्सलवाद दशकों तक बिहार के लिये एक प्रमुख आंतरिक सुरक्षा चुनौती रहा है। वर्ष 2005 का जहानाबाद जेल हमला जैसी घटनाएँ अतीत में विद्रोही गतिविधियों की तीव्रता को रेखांकित करती हैं।
  • सुरेश कोड़ा: वह बिहार और झारखंड क्षेत्रों में सक्रिय एक दीर्घकालिक माओवादी कमांडर था तथा राज्य के सबसे वांछित उग्रवादियों में शामिल था।
    • कोड़ा ने मुंगेर ज़िले में बिहार पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के समक्ष आत्मसमर्पण किया।
  • राज्य की घोषणा: बिहार सरकार और पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि नक्सल प्रभावित रहे ज़िलों में अब किसी भी प्रकार की सक्रिय सशस्त्र माओवादी टुकड़ी मौजूद नहीं है। इस प्रकार राज्य को प्रभावी रूप से माओवादी प्रभाव से मुक्त घोषित किया गया है।
  • पुनर्वास नीति: राज्य की आत्मसमर्पण-सह-पुनर्वास नीति के तहत सुरेश कोड़ा को घोषित ₹3 लाख का इनाम, इसके अतिरिक्त ₹5 लाख की प्रोत्साहन राशि तथा व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिये  मासिक भत्ता मिलने की संभावना है।
  • महत्त्व: एक प्रमुख माओवादी नेता के आत्मसमर्पण के बाद ‘नक्सल-मुक्त’ स्थिति की घोषणा राज्य के लंबे समय से चले आ रहे वामपंथी उग्रवाद विरोधी संघर्ष में एक उल्लेखनीय उपलब्धि है।
    • यह घटनाक्रम समन्वित सुरक्षा उपायों, प्रभावी पुनर्वास नीतियों और सतत प्रशासनिक प्रयासों के सकारात्मक प्रभाव को सुदृढ़ करता है, जिससे प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी शांति तथा स्थिरता सुनिश्चित करने में सहायता मिलती है।

और पढ़ें: नक्सल-मुक्त, वामपंथी उग्रवाद