अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: इसरो

चर्चा में क्यों?

हाल ही में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (Indian Space Research Organisation- ISRO) और जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (Japan Aerospace Exploration Agency- JAXA) ने पृथ्वी अवलोकन, चंद्र सहयोग और उपग्रह नेविगेशन में सहयोग की समीक्षा की।

प्रमुख बिंदु

सहयोग के विषय में:

  • वे "अंतरिक्ष स्थिति संबंधी जागरूकता और पेशेवर विनिमय कार्यक्रम" में सहयोग के अवसर तलाशने पर भी सहमत हुए।
  • दोनों एजेंसियों ने उपग्रह डेटा का उपयोग करके चावल फसल क्षेत्र और वायु गुणवत्ता निगरानी पर सहयोगी गतिविधियों के लिये एक कार्यान्वयन व्यवस्था पर हस्ताक्षर किये।
  • भारत और जापान पहले से ही एक संयुक्त चंद्र ध्रुवीय अन्वेषण (LUPEX) मिशन पर काम कर रहे हैं।
    • LUPEX का लक्ष्य वर्ष 2024 तक चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर और रोवर भेजना है।

अन्य देशों के साथ समझौते:

  • दोनों देशों ने इस बात पर चर्चा की कि ऑस्ट्रेलिया गगनयान (Gaganyaan) मानव मिशन में बुनियादी ज़रूरतों के लिये भारत की सहायता करेगा।
  • भारत और इटली ने पृथ्वी के अवलोकन, अंतरिक्ष विज्ञान और रोबोटिक तथा मानव अन्वेषण में अवसरों का पता लगाने का फैसला किया है।
    • भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों ने एक  संशोधित समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये जो व्यापक रणनीतिक साझेदारी का निर्माण करेगा।

अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की कुछ उपलब्धियाँ

चंद्रयान- 1:

  • इसरो का चंद्रमा के लिये यह पहला मिशन था, जो अंतर्राष्ट्रीय पेलोड और सहयोग का एक अनुकरणीय उदाहरण है।
  • इस मिशन ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति अर्जित की है, जिसने इसरो-नासा द्वारा संयुक्त रूप से चंद्रमा की सतह पर पानी के अणुओं की खोज में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

मेघा-ट्रोपिक्स:

  • मेघा-ट्रोपिक्स (MEGHA-TROPIQUES) नामक इंडो-फ्रेंच संयुक्त उपग्रह मिशन वर्ष 2011 में मानसून, चक्रवात आदि जैसे उष्णकटिबंधीय वातावरण तथा जलवायु के अध्ययन के लिये शुरू किया गया था।

सरल:

  • सरल (SARAL- Satellite for ALTIKA and ARGOS) वर्ष 2013 में इंडो-फ्रेंच द्वारा एल्टीमेट्री (Altimetry) का उपयोग करके अंतरिक्ष से समुद्र का अध्ययन करने के लिये इस मिशन को लॉन्च किया गया था।

निसार:

  • ISRO और NASA पृथ्वी विज्ञान के अध्ययन के लिये NISAR (NASA ISRO Synthetic Aperture Radar) नामक एक संयुक्त उपग्रह मिशन को साकार करने में जुटे हैं।
  • यह मिशन पृथ्वी का अवलोकन करेगा और इसके बदलते पारिस्थितिकी तंत्र का पता लगाएगा।
  • यह विश्व का सबसे महँगा इमेजिंग उपग्रह है और दोनों अंतरिक्ष एजेंसियों का इरादा वर्ष 2022 तक इस उपग्रह को लॉन्च करना है।

उन्नति:

  • यह नैनो सैटेलाइट (Nano Satellites) विकास पर एक क्षमता निर्माण कार्यक्रम है, जो अन्वेषण और बाह्य अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग पर प्रथम संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (United Nations Conference on the Exploration and Peaceful Uses of Outer Space) की 50वीं वर्षगाँठ (UNISPACE 50) मनाने के लिये ISRO की एक पहल है।

तृष्णा:

  • इसरो और फ्राँसीसी अंतरिक्ष एजेंसी CNES ने  जल चक्र की निगरानी के लिये तृष्णा (TRISHNA) जैसे उन्नत उपग्रहों को विकसित करने में भागीदारी की है।

स्रोत: द हिंदू