आधार 2.0 कार्यशाला

प्रिलिम्स के लिये:

आधार, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण

मेन्स के लिये:

‘आधार’ का महत्त्व और संबंधित मुद्दे

चर्चा में क्यों?

हाल ही में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 'आधार 2.0- डिजिटल पहचान और स्मार्ट शासन के नए युग की शुरुआत' नामक एक 3 दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया।

  • कार्यशाला का उद्देश्य सरकार द्वारा शुरू किये गए प्रमुख सुधारों और योजनाओं में डिजिटल पहचान हेतु पहुँच का विश्लेषण करना है।
  • इसका उद्देश्य सामाजिक और वित्तीय दोनों तरह से सार्वभौमिक समावेशन प्राप्त करने के लिये डिजिटल पहचान के विभिन्न पहलुओं पर गौर करना है।

प्रमुख बिंदु

  • परिचय:
    • यह भारत और विदेशों में डिजिटल पहचान पर काम कर रहे सरकार और उद्योग जगत के नेताओं, प्रख्यात शिक्षाविदों एवं वैज्ञानिकों, नवोन्मेषकों तथा चिकित्सकों के साथ विचारों को साझा करने व आदान-प्रदान करने के लिये एक मंच प्रदान करेगा।
    • यह कार्यशाला भारत-विशिष्ट चुनौतियों और लोगों, प्रक्रियाओं, प्रौद्योगिकी, अनुसंधान, नियामक ढाँचे, कानूनी नीति व शासन के संदर्भ में सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने के अवसरों को दर्शाते हुए क्षेत्रीय एवं वैश्विक बहस में शामिल होने का अवसर प्रदान करेगी।
  • प्रमुख चर्चाएँ:
    • आधार के उपयोग का विस्तार:SWIK’ नियमों (सामाजिक कल्याण, नवाचार और ज्ञान) के आलोक में ‘आधार’ स्वयं को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों मोड में पहचान सत्यापन के मुख्य प्रवर्तकों में से एक के रूप में जारी रख सकता है।
      • उदाहरण के लिये ‘आधार’ ई-कॉमर्स, ई-बैंकिंग और वित्त क्षेत्र के लिये उपयोगी हो सकता है।
    • आधार एक अंतर्राष्ट्रीय डिजिटल पहचान मानक के रूप में: आधार को डिजिटल पहचान के लिये अंतर्राष्ट्रीय मानक बनाने, अंतर्राष्ट्रीय डिजिटल पहचान मानकों के लिये एक रोडमैप और सीमाओं के पार अंतर्संचालनीयता के लिये रूपरेखा के रूप में विकसित किया जाना है।
    • क्रिटिकल टेक्नोलॉजी का उपयोग: आधार में बायोमेट्रिक्स को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीप लर्निंग तकनीकों का उपयोग करके बेहतर बनाया जा सकता है।
      • ब्लॉकचेन आधारित प्रौद्योगिकियों और अनुप्रयोगों के साथ-साथ बैंकिंग क्षेत्र में आधार तथा इन नई प्रौद्योगिकियों के प्रभाव का पता लगाया जाना चाहिये।

आधार:

  • परिचय:
    • आधार संख्या ‘भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण’ (UIDAI) द्वारा भारत के निवासियों को निर्धारित सत्यापन प्रक्रिया को पूरा करने के बाद जारी की गई 12 अंकों की एक यादृच्छिक संख्या है।
    • कोई भी व्यक्ति जो भारत का निवासी है, चाहे वह किसी भी उम्र और लिंग का हो, आधार संख्या प्राप्त करने के लिये स्वेच्छा से नामांकन कर सकता है।
    • नामांकन के इच्छुक व्यक्ति को नामांकन प्रक्रिया के दौरान न्यूनतम जनसांख्यिकीय और बायोमेट्रिक जानकारी प्रदान करनी होगी जो पूरी तरह से निःशुल्क है।
    • एक व्यक्ति को केवल एक बार आधार के लिये नामांकन करने की आवश्यकता होती है और डी-डुप्लीकेशन (De-Duplication) के बाद केवल एक आधार ही उत्पन्न होगा, क्योंकि विशिष्टता जनसांख्यिकीय और बायोमेट्रिक, डी-डुप्लीकेशन की प्रक्रिया के माध्यम से प्राप्त की जाती है।
  • कानूनी ढांँचा: संसद ने आधार और अन्य कानून (संशोधन) अधिनियम, 2019 पारित किया है जो पहचान के प्रमाण के रूप में आधार के स्वैच्छिक उपयोग की अनुमति देता है।
  • आधार के लाभ:
    • पारदर्शिता और सुशासन को बढ़ावा देना: आधार नंबर ऑनलाइन एवं किफायती तरीके से सत्यापन योग्य है।
      • यह डुप्लीकेट और नकली पहचान को खत्म करने में अद्वितीय है और इसका उपयोग कई सरकारी कल्याण योजनाओं का लाभ प्राप्त करने हेतु किया जाता है जिससे पारदर्शिता और सुशासन को बढ़ावा मिलता है।
    • निचले स्तर तक मदद: आधार ने बड़ी संख्या में ऐसे लोगों को पहचान प्रदान की  है जिनकी पहले कोई पहचान नहीं थी। 
    • तटस्थ: आधार संख्या किसी भी जाति, धर्म, आय, स्वास्थ्य और भूगोल के आधार पर लोगों को वर्गीकृत नहीं करती है।
      • आधार संख्या पहचान का प्रमाण है, हालांँकि आधार संख्या इसके धारक को नागरिकता या अधिवास का कोई अधिकार प्रदान नहीं करती है।
    • जन-केंद्रित शासन: आधार सामाजिक और वित्तीय समावेशन, सार्वजनिक क्षेत्र के वितरण सुधारों, वित्तीय बजटों के प्रबंधन, सुविधा बढ़ाने और बाधा मुक्त जन-केंद्रित शासन को बढ़ावा देने हेतु एक रणनीतिक नीति उपकरण है। 
    • स्थायी वित्तीय पता: आधार को स्थायी वित्तीय पते के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है तथा यह समाज के वंचित और कमज़ोर वर्गों को वित्तीय समावेशन की सुविधा प्रदान करता है, अत: इस कारण यह वितरण न्याय और समानता का एक उपकरण है।