संसद टीवी संवाद

हरित प्रौद्योगिकी में निवेश | 05 Jan 2022 | जैव विविधता और पर्यावरण

भारत ने COP-26 में जलवायु कार्रवाई के लिये महत्त्वपूर्ण प्रतिबद्धताएँ की हैं। इनमें वर्ष 2030 तक अपनी ऊर्जा आवश्यकता का 50% अक्षय ऊर्जा के माध्यम से पूरा करना और अपनी गैर-जीवाश्म ईंधन ऊर्जा क्षमता को 500 GW तक लाना शामिल है। इसके लिये हरित प्रौद्योगिकियों में भारी निवेश की आवश्यकता होगी और बड़े कॉर्पोरेट इस कार्य के लिये कमर कस रहे हैं।  वर्ष 2000 के बाद से सौर और पवन ऊर्जा की कीमतों में 90% से अधिक की गिरावट आई है, जबकि केवल मामूली सब्सिडी द्वारा इन क्षेत्रों को प्रोत्साहित किया गया है। हालाँकि सौर और पवन ऊर्जा निरंतरता में नहीं प्राप्त होती है अतः 24 घंटे बिजली सुनिश्चित करने हेतु उनके सस्ते भंडारण की आवश्यकता है। 

हरित ऊर्जा:

हरित ऊर्जा हेतु वित्तीय तंत्र की आवश्यकता:

हरित परियोजनाएँ: केवल सौर या पवन ऊर्जा?

निजी क्षेत्र द्वारा निवेश की भूमिका:

निष्कर्ष

अतः कहा जा सकता है कि यदि भारत को COP-26 में की हुई प्रतिबद्धताओं को पूरा करना है तो उसे बहुत जल्द कार्बन आधारित ऊर्जा से नवीकरणीय ऊर्जा आधारित अर्थव्यवस्था की तरफ बढ़ना होगा। इसके लिये उसे पर्याप्त वित्त एवं प्रौद्योगिकी की आवश्यकता होगी जिसके लिये सरकार एवं निजी क्षेत्रों के साथ ही वैश्विक स्तर पर निवेशकों को भी साथ लाना होगा।