ज़ेहनपोरा स्तूप | 22 Jan 2026
हाल ही में बारामूला (उत्तरी कश्मीर) के ज़ेहनपोरा में पुरातात्त्विक खुदाई के दौरान 2,000 वर्ष से अधिक प्राचीन एक विशाल बौद्ध स्तूप के अवशेष मिले, जो कुषाण काल (प्रथम शताब्दी ईस्वी से तीसरी शताब्दी ईस्वी) का है।
- पुरातात्त्विक महत्त्व: यह स्थल कश्मीर का सबसे बड़ा ज्ञात बौद्ध केंद्र माना जाता है, जहाँ लगभग 10 एकड़ क्षेत्र में खुदाई हुई है, जिसमें लकड़ी की ऊपरी संरचना और अपरिवर्तित टीले शामिल हैं जो इसे विशिष्ट ऐतिहासिक जानकारी प्रदान करते हैं।
- अंतर्राष्ट्रीय अभिलेखों से संबंध: इस स्थल की एक ऐतिहासिक तस्वीर, जिसमें तीन बौद्ध स्तूप दिखाई देते हैं, फ्राँस के एक संग्रहालय के अभिलेखागार में मिली है। माना जाता है कि यह तस्वीर किसी ब्रिटिश यात्री ने खींची थी, जो यह संकेत देती है कि 19वीं या 20वीं सदी की शुरुआत में ही यह स्थल औपनिवेशिक काल के यात्रा-वृत्तांतों में दर्ज हो चुका था।
- कश्मीर में बौद्ध धर्म: कश्मीर में बौद्ध धर्म की शुरुआत मौर्य काल के दौरान राजा अशोक के शासनकाल से जोड़ी जाती है। हालाँकि कल्हण की राजतरंगिणी में राजा सुरेंद्र (क्षेत्र के पहले बौद्ध राजा) द्वारा कश्मीर में मठ बनवाने का उल्लेख है, जबकि अन्य ऐतिहासिक अभिलेखों में इस क्षेत्र में इंडो-ग्रीक शासक मेनांडर ((Menander)) और भिक्षु नागसेन के बीच हुए बौद्ध संवाद की चर्चा है।
- बाद में, कनिष्क जैसे कुषाण राजाओं के संरक्षण ने बौद्ध प्रथाओं के उदय को समर्थन दिया और कश्मीर को वह क्षेत्र माना जाता है जहाँ महायान संप्रदाय (लगभग 72 ईस्वी में कश्मीर में चौथी बौद्ध संगीति) ने अपनी जड़ें जमाईं।
- श्रीलंका के बौद्ध साहित्यिक ग्रंथ महावंश के अनुसार, अशोक ने लगभग 250 ईसा पूर्व पाटलिपुत्र में आयोजित तृतीय बौद्ध संगीति के लिये कश्मीर के बौद्ध विद्वानों को आमंत्रित किया था।
- कश्मीर में बौद्ध विरासत: संपूर्ण कश्मीर में कई पुरातात्त्विक स्थल बौद्ध धर्म की सुदृढ़ता को दर्शाते हैं:
- उत्तरी कश्मीर: कनिसपोरा, उश्कुर, ज़ेहनपोरा, परिहसपोरा
- मध्य कश्मीर: हरवन बौद्ध परिसर (श्रीनगर)
- दक्षिणी कश्मीर: सेमथान, हुतमुर, होइनार, कुतबल।
|
और पढ़ें: भारत में बौद्ध धर्म |
