सर्वोच्च न्यायालय ने ऑटिज़्म के लिये स्टेम सेल थेरैपी पर रोक लगाई | 09 Feb 2026

स्रोत: द हिंदू

चर्चा में क्यों?

हाल ही में, सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) के लिये स्टेम सेल थेरैपी को स्वीकृत नैदानिक परीक्षणों (Approved Clinical Trials) के बाहर नैदानिक सेवा (Clinical Service) के रूप में नहीं दिया जा सकता। साथ ही, न्यायालय ने केंद्र सरकार को स्टेम सेल अनुसंधान के लिये एक समर्पित नियामक प्राधिकरण स्थापित करने का निर्देश दिया।

  • न्यायालय ने माना कि ऐसी चिकित्सा में सुरक्षा और प्रभावकारिता के ठोस प्रमाण नहीं हैं और इसलिये यह चिकित्सकों द्वारा रोगियों को प्रदान किये जाने वाले उचित देखभाल मानकों के अनुरूप नहीं है।

स्टेम सेल क्या हैं?

  • परिचय: स्टेम सेल विशिष्ट प्रकार की कोशिकाएँ होती हैं, जो रक्त, हड्डी और माँसपेशियों जैसी विशेष कोशिकाओं का निर्माण करती हैं और ऊतक पुनर्निर्माण तथा शारीरिक कार्यों में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
  • प्रकार: 
    • भ्रूण स्टेम सेल: किसी भी प्रकार की कोशिका में परिवर्तित हो सकती हैं, इन्हें भ्रूण या कॉर्ड ब्लड से प्राप्त किया जाता है।
    • ऊतक-विशिष्ट स्टेम सेल: केवल संबंधित ऊतक की कोशिकाओं से उत्पन्न होता है, जैसे– ब्लड स्टेम सेल
    • प्रेरित भ्रूण जैसी स्टेम सेल : प्रयोगशाला में निर्मित कोशिकाएँ, जो भ्रूण स्टेम सेल की तरह व्यवहार करती हैं और अनुसंधान तथा दवा परीक्षण में उपयोग होती हैं।
  • स्टेम सेल थेरैपी: इसे पुनर्योजी चिकित्सा भी कहा जाता है और इसका उद्देश्य स्टेम सेल या उनसे उत्पन्न पदार्थों का उपयोग करके क्षतिग्रस्त या रोगग्रस्त ऊतकों की मरम्मत करना है।
    • भारत में स्टेम सेल आधारित उपचार केवल अनुमोदित क्लिनिकल ट्रायल के अंतर्गत ही अनुमति प्राप्त हैं, क्योंकि कई रोगों के लिये इसकी सुरक्षा, प्रभावशीलता और दीर्घकालिक प्रभाव पूरी तरह स्थापित नहीं हैं।
  • विनियम: भारत में स्टेम सेल थेरैपी का नियमन राष्ट्रीय स्टेम सेल अनुसंधान दिशानिर्देश, 2025 के तहत किया जाता है, जिसे भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) और बायोटेक्नोलॉजी विभाग (DBT) ने संयुक्त रूप से तैयार किया है।

सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय 

  • सूचित सहमति: सूचित सहमति की वैधता के लिये सुरक्षा, प्रभावशीलता, जोखिम और विकल्पों पर स्पष्ट वैज्ञानिक साक्ष्य आवश्यक हैं। वर्तमान में ऑटिज़्म में स्टेम सेल थेरैपी के लिये ऐसे पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं, जिससे इस प्रकार का नैदानिक उपयोग नैतिक और विधिक रूप से अनुचित है।
  • रोगी की स्वायत्तता पर नैतिक सीमाएँ: न्यायालय ने स्पष्ट किया कि रोगी या अभिभावक की सहमति उन उपचारों को न्यायोचित नहीं ठहरा सकती, जो वैज्ञानिक रूप से अप्रमाणित, नैतिक रूप से अनुचित या स्वीकृत चिकित्सा प्रथा के बाहर हों।
  • विधिक ढाँचे का उल्लंघन: ऐसे कार्य नई औषधि एवं नैदानिक ​​परीक्षण नियम, 2019 के साथ‑साथ भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) द्वारा जारी स्‍टेम कोशिका अनुसंधान-2017 के लिये राष्‍ट्रीय दिशानिर्देश का उल्लंघन करती हैं।

ऑटिज़्म (ASD)

  • ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम विकार (ASD): यह एक जटिल न्यूरोडेवलपमेंटल कंडीशन है जो मस्तिष्क के विकास को प्रभावित करती है। इसका मुख्य लक्षण सामाजिक संपर्क, संवाद और व्यवहार में विसंगतियाँ हैं, जिसमें मस्तिष्क की क्षमताओं में व्यापक भिन्नता देखी जाती है।
  • वैश्विक स्तर पर अनुमानतः प्रत्येक 100 में लगभग 1 बच्चा ऑटिज़्म से प्रभावित है, हालाँकि कम और मध्यम आय वाले देशों में मामले अक्सर कम रिपोर्ट किये जाते हैं।
  • ऑटिज़्म का प्रारंभिक विकास आनुवंशिक और पर्यावरणीय जोखिम संबंधी कारकों के संयोजन से होता है, बाल टीकाकरण से ऑटिज़्म का जोखिम नहीं बढ़ता।
  • ऑटिज़्म से ग्रस्त व्यक्तियों में मिर्गी, अवसाद, चिंता, नींद से संबंद्ध विकार जैसी सहवर्ती स्थितियाँ पाई जा सकती हैं, जबकि उनकी बौद्धिक क्षमताएँ गंभीर ह्रास से लेकर औसत से अधिक स्तर तक विस्तृत हो सकती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. स्टेम सेल क्या हैं?
स्टेम सेल ऐसी विशेष कोशिकाएँ हैं, जो शरीर में विभिन्न प्रकार की कोशिकाओं में विकसित हो सकती हैं और क्षतिग्रस्त ऊतकों की मरम्मत या प्रतिस्थापन करने की क्षमता रखती हैं।

2. स्टेम सेल थेरैपी क्या है?
स्टेम सेल थेरैपी में रोगों के उपचार या प्रबंधन के लिये स्टेम सेल का उपयोग किया जाता है, जिससे क्षतिग्रस्त कोशिकाओं का पुनर्जनन किया जा सके। हालाँकि अधिकांश ऐसी थेरैपी अभी भी प्रयोगात्मक हैं।

3. ऑटिज़्म के लिये स्टेम सेल थेरैपी क्यों प्रतिबंधित है?
क्योंकि ऑटिज़्म के लिये इसकी सुरक्षा और प्रभावकारिता पर प्रमाणित वैज्ञानिक साक्ष्य नहीं हैं तथा वैध सूचित सहमति सुनिश्चित नहीं की जा सकती।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQs)

प्रिलिम्स

प्रश्न. वंशानुगत रोगों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2021) 

  1. अंडों के अंतःपात्र (इन विट्रो) निषेचन से पहले या बाद में सूत्रकणिका प्रतिस्थापन (माइटोकॉन्ड्रिया रिप्लेसमेंट) चिकित्सा द्वारा सूत्रकणिका रोगों (माइटोकॉन्ड्रियल डिज़ीज़) को माता-पिता से संतान में जाने से रोका जा सकता है।  
  2. किसी संतान में सूत्रकणिका रोगों (माइटोकॉन्ड्रियल डिज़ीज़) आनुवंशिक रूप से पूर्णतः माता से जाता है न कि पिता से।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1

(b) केवल 2

(c) 1 और 2 दोनों

(d) न तो 1 और न ही 2

उत्तर: (C) 


प्रश्न. अक्सर सुर्खियों में रहने वाली ‘स्टेम कोशिकाओं’ के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में कौन-सा/से सही है/हैं? (2012)

  1. स्टेम कोशिकाएँ केवल स्तनपायी जीवों से ही प्राप्त की जा सकती है।  
  2. स्टेम कोशिकाएँ नई औषधियों को परखने के लिये प्रयोग की जा सकती है।  
  3. स्टेम कोशिकाएँ चिकित्सा थेरैपी के लिये प्रयोग की जा सकती हैं।

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 2 और 3

(c) केवल 3

(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (b)