शैडो फ्लीट | 23 Jan 2026

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस 

संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान, वेनेज़ुएला और रूस जैसे देशों से प्रतिबंधित कच्चे तेल के परिवहन में शामिल वैश्विक ‘शैडो फ्लीट’ तेल टैंकरों पर अपनी सैन्य-नेतृत्व वाली कार्रवाई तीव्र कर दी है।

शैडो फ्लीट

  • परिचय: यह उस व्यापक नेटवर्क को संदर्भित करता है जिसमें 3,000 से अधिक जहाज़ शामिल हैं, जो पश्चिमी प्रतिबंधों से बचने और प्रतिबंधित देशों से तेल परिवहन करने के लिये धोखाधड़ीपूर्ण शिपिंग प्रथाओं का उपयोग करते हैं, जैसे कि AIS (ऑटोमेटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम) ट्रांसपोंडर को निष्क्रिय करना, GNSS (ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम) स्पूफिंग और अस्पष्ट स्वामित्व संरचनाएँ।
  • डार्क बनाम ग्रे फ्लीट: डार्क फ्लीट सबसे उच्च-जोखिम वाले जहाज़ होते हैं; ये जानबूझकर अपनी गतिविधियों को छुपाते हैं, जैसे कि AIS बंद करना, GNSS स्पूफिंग, फाल्स फ्लैग्स और गुप्त शिप-टू-शिप ट्रांसफर।
    • ग्रे फ्लीट ज़रूरी नहीं कि प्रतिबंधित हो, लेकिन इसमें जोखिम संकेत दिखाई देते हैं, जैसे असामान्य मार्ग, तेज़ी से स्वामित्व में बदलाव और संरचनात्मक अस्पष्टता जो इसे अनुपालनशील दिखाने के लिये डिज़ाइन की गई हो। यह रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद उभरा।
  • नियामक कमज़ोरियाँ: कई शैडो जहाज़ ऐसे क्षेत्राधिकारों में पंजीकृत हैं जहाँ समुद्री निगरानी अप्रभावी है, जिनमें गैबॉन, मार्शल द्वीप समूह, कुक द्वीप, लाइबेरिया, पनामा और मंगोलिया (भूमि-संबंधित) शामिल हैं।
  • रणनीतिक और पर्यावरणीय जोखिम: यह फ्लीट, जिसमें अक्सर पुराने और कम बीमित जहाज़ शामिल होते हैं, न केवल प्रतिबंधों को कमज़ोर करती है, बल्कि निम्न-स्तरीय संचालन के कारण महत्त्वपूर्ण पर्यावरणीय तथा सुरक्षा जोखिम भी उत्पन्न करती है।
  • भारतीय संबंध: वर्ष 2022-2023 में, मुंबई स्थित गतिक शिप मैनेजमेंट (शैडो फ्लीट ऑपरेटर) रूसी कच्चे तेल का प्रमुख परिवाहक बनकर उभरा, जिसने अपने शिखर पर 1.5 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के जहाज़ों का संचालन किया और अगस्त 2023 तक सभी टैंकरों को संबंधित कंपनियों को स्थानांतरित कर दिया, जब इसकी निगरानी बढ़ी।

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