नियमित DGP की नियुक्तियों में विलंब पर चिंता | 07 Feb 2026

स्रोत: द हिंदू 

हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने यह टिप्पणी की कि अनेक राज्य नियमित पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति को टालते हुए “कार्यवाहक” DGP की व्यवस्था जारी रखे हुए हैं, जो कि प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ (वर्ष 2006) के निर्णय में दिये गए निर्देशों का उल्लंघन है।

प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ (वर्ष 2006):

  • इस मामले के निर्णय में न्यायालय ने यह व्यवस्था दी कि DGP की नियुक्तियाँ राजनीतिक प्रभाव से स्वतंत्र होनी चाहिये, “कार्यवाहक” DGP की अवधारणा का अस्तित्व नहीं होना चाहिये।
  • निर्णय के अनुसार, DGP का चयन UPSC द्वारा सूचीबद्ध तीन वरिष्ठतम अधिकारियों में से किया जाना चाहिये, साथ ही उन्हें न्यूनतम दो वर्ष का निश्चित कार्यकाल प्रदान किया जाना अनिवार्य है।
  • इसके पश्चात वर्ष 2018 तथा वर्ष 2019 में सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों द्वारा एक विस्तृत प्रक्रिया निर्धारित की गई, जिसके अंतर्गत राज्यों को वर्तमान DGP की सेवानिवृत्ति से तीन माह पूर्व अपने प्रस्ताव UPSC को भेजना आवश्यक है।

राज्य पुलिस पर्यवेक्षण:

  • पुलिस संविधान की सातवीं अनुसूची के अंतर्गत राज्य सूची का विषय है।
  • इसके अतिरिक्त, पुलिस अधिनियम, 1861 की धारा 3 के अनुसार प्रत्येक राज्य में पुलिस का पर्यवेक्षण राज्य सरकार में निहित होता है।
  • ज़िला स्तर पर एक द्वैध व्यवस्था विद्यमान है, जहाँ ज़िला मजिस्ट्रेट तथा पुलिस अधीक्षक दोनों अधिकार साझा करते हैं।
  • सामान्यतः राज्य पुलिस का नेतृत्व पुलिस महानिदेशक (DGP) रैंक के अधिकारी द्वारा किया जाता है।

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