सावलकोट जलविद्युत परियोजना | 13 Feb 2026
पाकिस्तान ने चिनाब नदी पर सावलकोट जलविद्युत परियोजना के संबंध में जानकारी और परामर्श के लिये भारत से आधिकारिक तौर पर अनुरोध किया है, यह अनुरोध 1960 की सिंधु जलसंधि (IWT) के प्रावधानों के तहत किया गया है।
- संधि की स्थिति और संदर्भ: यह घटना इसलिये महत्त्वपूर्ण है क्योंकि भारत ने पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद 1960 की सिंधु जलसंधि (IWT) को दंडात्मक कार्रवाई के रूप में अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया था।
- पाकिस्तान का रुख: पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने कहा कि "कोई भी एकतरफा कार्रवाई" संधि की कानूनी वास्तविकता को बदल नहीं सकती और भारत से संधि का पूरा पालन करने और अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने का आग्रह किया।
- पाकिस्तान ने संवाद और IWT द्वारा निर्धारित अंतर्राष्ट्रीय कानूनी तंत्रों के माध्यम से विवादों को सुलझाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
- सावलकोट जलविद्युत परियोजना:
- स्थान और नदी: यह जम्मू और कश्मीर के राँबान ज़िले में चिनाब नदी (जो सिंधु जलसंधि के तहत एक "पश्चिमी नदी" है) पर स्थित है।
- क्षमता और प्रकार: यह एक विशाल 1,856 मेगावाट परियोजना है, जिसे रन-ऑफ-द-रिवर योजना के रूप में डिज़ाइन किया गया है, जिसमें नदी के प्राकृतिक प्रवाह का उपयोग किया जाता है और भंडारण न्यूनतम होता है।
- यह परियोजना एक कंक्रीट ग्रेविटी बांध और जलाशय के निर्माण को शामिल करती है।
- स्थिति: यद्यपि इसकी शुरुआत वर्ष 1984 में हुई थी, किंतु इसे लंबे विलंब का सामना करना पड़ा और अब इसे ‘राष्ट्रीय महत्त्व की परियोजना’ (Projects of National Importance) घोषित किया गया है।
- रणनीतिक महत्त्व: इससे प्रतिवर्ष 7,000 मिलियन यूनिट से अधिक विद्युत उत्पादन होने की अपेक्षा है, जिससे यह भारत की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं में से एक बन जाती है।
- सिंधु जलसंधि (IWT) के स्थगित रहने की स्थिति में यह परियोजना पश्चिमी नदियों पर भारत के नियंत्रण को सुदृढ़ करने तथा उनकी क्षमता के सर्वोत्तम उपयोग की दृष्टि से रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
- चिनाब नदी पर जलविद्युत परियोजनाएँ: चिनाब नदी पर किश्तवाड़ में 390 मेगावाट की दुलहस्ती परियोजना, रामबन में 890 मेगावाट की बगलीहार परियोजना तथा रियासी में 690 मेगावाट की सलाल परियोजना स्थित हैं। ये परियोजनाएँ क्षेत्र की ऊर्जा आपूर्ति में महत्त्वपूर्ण योगदान देती हैं।
