निर्यात सहायता के लिये RELIEF योजना का विस्तार | 18 Apr 2026

स्रोत: पीआईबी

हाल ही में सरकार ने पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और समुद्री लॉजिस्टिक्स पर इसके निरंतर प्रभाव को देखते हुए, रेज़िलिएंस एंड लॉजिस्टिक्स इंटरवेंशन फॉर एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन (RELIEF) योजना का विस्तार किया है।

  • परिचय: RELIEF, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा शुरू की गई निर्यात संवर्द्धन मिशन (EPM) के अंतर्गत एक समयबद्ध पहल है, जिसके लिये ₹497 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है। इसका उद्देश्य बढ़ते समुद्री जोखिमों का सामना कर रहे भारतीय निर्यातकों को वित्तीय और परिचालन सुरक्षा प्रदान करना है।
  • उद्देश्य: इसका उद्देश्य भू-राजनीतिक व्यवधानों के दौरान रसद लागत को कम करना, जोखिम से सुरक्षा प्रदान करना, आपूर्ति शृंखला की मज़बूती सुनिश्चित करना और निर्यात प्रतिस्पर्द्धात्मकता बनाए रखना है।
  • यह योजना सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत, ओमान, बहरीन, इराक, ईरान और यमन जैसे खाड़ी देशों एवं पश्चिम एशिया के क्षेत्रों में निर्यात को कवर करती है। इसके साथ ही, हाल ही में इसमें जॉर्डन और मिस्र को भी शामिल किया गया है।
  • कार्यान्वयन: इसका कार्यान्वयन भारतीय निर्यात ऋण गारंटी निगम (ECGC) के माध्यम से किया जाता है, जो दावों, संवितरण और निगरानी का प्रबंधन करता है।
  • तीन-भागीय ढाँचा:
    • घटक 1: यह उन निर्यातकों हेतु सहायता सुनिश्चित करता है जो पहले से ECGC लिमिटेड के अंतर्गत कवर हैं। इसके माध्यम से 14 फरवरी से 15 मार्च, 2026 के मध्य भेजे गए कंसाइनमेंट्स के लिये प्रीमियम दरों को पूर्व-विघटन स्तर पर स्थिर रखा गया है। इसके अतिरिक्त, युद्ध-जनित जोखिमों के संदर्भ में यह नुकसान की शत प्रतिशत भरपाई हेतु उन्नत कवर भी प्रदान करता है।
    • घटक 2: 16 मार्च से 15 जून, 2026 के बीच के कंसाइनमेंट्स के लिये अधिकतम 95% तक हानि कवरेज प्रदान करता है, इसमें 16 मार्च, 2026 के बाद नए ECGC होल टर्नओवर पॉलिसी लेने वाले निर्यातक भी शामिल हैं।
    • घटक 3: विशेष रूप से उन MSME निर्यातकों को लक्षित करता है जिनके पास पहले कोई बीमा नहीं था तथा प्रभावित शिपमेंट्स के लिये प्रति निर्यातक 50 लाख रुपये तक की सीमा प्रदान करता है।    

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