RBI द्वारा तरलता को नियंत्रित करने के लिये ट्रेजरी बिल की बोलियाँ खारिज | 28 Mar 2026
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने चालू वित्तीय वर्ष के 31 मार्च, 2026 को समाप्त होने के साथ बैंकिंग प्रणाली की तरलता को सुदृढ़ करने के लिये ट्रेज़री बिल (T-बिल) की नीलामी में सभी बोलियों को अस्वीकार कर दिया।
- यह कदम 35,000 करोड़ रुपये के बहिर्वाह को रोककर तरलता अधिशेष को बढ़ावा देने के लिये उठाया गया है, जिससे महत्त्वपूर्ण वर्षांत की अवधि के दौरान बैंकों के पास पर्याप्त नकदी सुनिश्चित हो सके।
- यह प्रतिफल (यील्ड) में वृद्धि को भी रोकेगा क्योंकि उच्च ब्याज वाली बोलियों को स्वीकार करने से बाज़ार "स्पूक" हो सकता है और ऋण लागत में वृद्धि हो सकती है।
ट्रेज़री बिल (T-बिल)
- परिचय: ट्रेज़री बिल (T-बिल) भारत सरकार द्वारा अपने नकदी प्रवाह में अस्थायी विसंगतियों को प्रबंधित करने के लिये जारी किये गए अल्पकालिक ऋण साधन हैं।
- अवधि: T-बिल मुद्रा बाज़ार के वह साधन हैं, जिनकी परिपक्वता अवधि 1 वर्ष से कम होती है। वर्तमान में भारत सरकार 3 विशिष्ट परिपक्वताओं में T-बिल जारी करती है: 91 दिन, 182 दिन और 364 दिन।
- पात्रता: अतीत के विपरीत, खुदरा निवेशक अब RBI रिटेल डायरेक्ट पोर्टल के माध्यम से सीधे T-बिल खरीद सकते हैं, हालाँकि प्राथमिक खरीदार बैंक, बीमा कंपनियाँ और म्यूचुअल फंड बने हुए हैं।
- शून्य-कूपन प्रतिभूतियाँ: T-बिल पर कोई ब्याज नहीं दिया जाता है। इसके बजाय अपने अंकित मूल्य से छूट पर जारी किये जाते हैं और परिपक्वता पर सममूल्य (अंकित मूल्य) पर भुनाए जाते हैं।
- जारी मूल्य और परिपक्वता मूल्य के बीच का अंतर निवेशक द्वारा अर्जित "ब्याज" होता है।
- जारी करने वाला प्राधिकारी: हालाँकि RBI नीलामी और जारी करने का प्रबंधन करता है, जो केंद्र सरकार की ओर से जारी किये जाते हैं। भारत में राज्य सरकारें T-बिल जारी नहीं करती हैं।
- न्यूनतम निवेश: न्यूनतम बोली की राशि 10,000 रुपये है और उसके बाद 10,000 रुपये के गुणक में।
- महत्त्व: भारत में वाणिज्यिक बैंकों को अपनी वैधानिक तरलता अनुपात (SLR) की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये T-बिल रखने की अनुमति है। RBI T-बिल की आपूर्ति को बढ़ाकर या घटाकर प्रणालीगत तरलता को विनियमित करने के लिये T-बिल की नीलामी का उपयोग करता है।
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