Rapid Fire (करेंट अफेयर्स): 31 मई, 2023 | 31 May 2023

हिमालय को जलवायु परिवर्तन से बचाने के लिये तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता

माउंट एवरेस्ट सहित हिंदू-कुश हिमालय (HKH) क्षेत्र को ग्लोबल वार्मिंग (वैश्विक तापन) के कारण अपरिवर्तनीय परिवर्तनों का सामना करना पड़ रहा है। बढ़ता तापमान पर्यावरण को खतरे में डाल रहा है, इसके कारण आने वाले 70 वर्षों में दो-तिहाई हिमनद पिघल सकते हैं तथा चरम मौसमी घटनाओं में लगातार वृद्धि हो सकती है। इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) पेरिस समझौते का सम्मान करने, उत्सर्जन में कटौती करने तथा नवीकरणीय ऊर्जा में संक्रमण के लिये तत्काल वैश्विक कार्रवाई का आह्वान करता है। SaveOurSnow अभियान को जनता के समर्थन की आवश्यकता है। 240 मिलियन लोगों तथा महत्त्वपूर्ण जल संसाधनों पर खतरे को देखते हुए हिमालय के संरक्षण हेतु तत्काल कार्रवाई किये जाने की आवश्यकता है। ICIMOD एक अंतर-सरकारी ज्ञान एवं शिक्षण केंद्र है जो HKH के आठ क्षेत्रीय सदस्य देशों- अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, चीन, भारत, म्याँमार, नेपाल और पाकिस्तान में लोगों को सशक्त बनाने हेतु अनुसंधान, सूचना तथा नवाचारों को विकसित एवं साझा करता है। अंतर्राष्ट्रीय एवरेस्ट दिवस 29 मई को न्यूज़ीलैंड के एडमंड हिलेरी तथा नेपाल के तेनज़िंग नोर्गे शेरपा की उल्लेखनीय उपलब्धि के सम्मान में मनाया जाता है। बर्फ और तूफानों का सामना करते हुए दोनों 29 मई, 1953 को पृथ्वी के सबसे ऊँचे पर्वत शिखर तक पहुँचने वाले पहले व्यक्ति बने

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ओडिशा की पलूर नहर में ‘ईल’ की नई प्रजाति की खोज की गई  

भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI) के वैज्ञानिकों ने ओडिशा के गंजम ज़िले के पलूर नहर में ईल की एक नई प्रजाति की पहचान की है। प्राचीन ओडिशा के नाम पर इसे पिसोडोनोफिस कलिंगा नाम दिया गया, यह ईल परिवार ओफिचथिडे और ऑर्डर एंगुइलिफोर्मेस से संबंधित है। यह दिखने में सांप जैसा है और इसकी लंबाई 560 मिलीमीटर से 7 मीटर तक हो सकती है। यह खोज एशिया के सबसे बड़े खारे पानी के लैगून चिल्का लैगून और आसपास के पलूर नहर में की गई। सितंबर से नवंबर तक मानसून के मौसम के दौरान इस क्षेत्र में नई प्रजाति, पिसोडोनोफिस कलिंग प्रचुर मात्रा में पाई जाती है। डीएनए विश्लेषण ने पहले ग्रहण किये गए पिसोडोनोफिस बोरो (चावल-धान ईल) से इसके भिन्न होने की पुष्टि की। इस खोज से भारतीय जल में पिसोडोनोफिस प्रजातियों की कुल संख्या बढ़कर तीन हो गई है।

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मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक  

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक (MTHL) पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की और लोगों के लिये "ईजी ऑफ लिविंग" के महत्त्व को बढ़ाने पर बल दिया। MTHL एक उल्लेखनीय बुनियादी ढाँचा परियोजना है जो मुंबई महानगर क्षेत्र में कनेक्टिविटी को बदलने की क्षमता रखती है जिसे सेवरी-न्हावा शेवा ट्रांस हार्बर लिंक के रूप में भी जाना जाता है। इसके निर्माण के साथ MTHL का लक्ष्य 21.8 किलोमीटर का 6-लेन एक्सेस-कंट्रोल एक्सप्रेसवे ग्रेड रोड ब्रिज बनाना है जिससे यह भारत का सबसे लंबा समुद्री पुल बन जाएगा। MTHL का निर्माण कार्य पूरा होने से यातायात की बारहमासी समस्या दूर हो जाएगी तथा सेवरी और चिर्ले के बीच यात्रा का समय केवल 15 से 20 मिनट का हो जाएगा जिससे यात्रियों को दैनिक जीवन के कार्यों में बहुत राहत होगी। ओपन रोड टोलिंग सिस्टम के साथ MTHL पर बिना वाहनों को रोके या धीमा कर टोल एकत्र करने की विधि अपनाने वाली देश की पहली परियोजना बन गई है। यह नवीन दृष्टिकोण यातायात प्रवाह को व्यवस्थित करता है और इलेक्ट्रॉनिक सेंसर तथा कैमरों का उपयोग करके पुल की दक्षता बढ़ाता है। इसके अतिरिक्त MTHL ऑर्थोट्रॉपिक स्टील डेक प्रौद्योगिकी का उपयोग करता है। यह एक निर्माण विधि है जो पुल की संरचना को ताकत और लचीलापन प्रदान करती है। यह स्टील डेक तकनीक पुल के हल्के ढाँचे को बनाए रखते हुए भारी वाहनों का अधिक भार उठाने की क्षमता प्रदान करती है।

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भारत के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में गिरावट 

वित्त वर्ष 2022-23 में भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) प्रवाह में गिरावट देखी गई, उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (DPIIT) द्वारा इसके वैश्विक कारकों की पहचान की गई है। उदार FDI नीतियों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता के बावजूद कठोर ब्याज दरों और बिगड़ती भू-राजनीतिक स्थिति के संयुक्त प्रभाव ने देश में निवेश करने के लिये निवेशकों के विश्वास एवं गरीबी में गिरावट की संभावना को कम कर दिया है। पाँच महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों- कंप्यूटर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर, निर्माण, शिक्षा, ऑटोमोबाइल तथा धातुकर्म उद्योगों में उल्लेखनीय गिरावट देखी गई है। पिछले वित्तीय वर्ष में कुल FDI में 30 बिलियन अमेरिकी डॉलर के एक महत्त्वपूर्ण हिस्से के संकुचन के पीछे के विशिष्ट कारणों को उजागर करने के लिये एक व्यापक विश्लेषण की आवश्यकता है। FDI प्रवाह में गिरावट के परिणाम अधिक गंभीर हैं, क्योंकि FDI इक्विटी प्रवाह में 22% की गिरावट आई है जो वित्तीय वर्ष 2022-23 में 46 बिलियन अमेरिकी डॉलर थी। विशेष रूप से पहली तिमाही जनवरी-मार्च के दौरान निवेश में 40.5% की भारी गिरावट आई, यह कुल 9.28 बिलियन अमेरिकी डॉलर थी। FDI प्रवाह में इस तरह की गिरावट भारत के आर्थिक विकास, रोज़गार के अवसरों और तकनीकी प्रगति में बढ़ा उत्पन्न करती है। इस स्थिति से निपटने के लिये नीति निर्माताओं और हितधारकों को वैश्विक एवं क्षेत्र-विशिष्ट दोनों चुनौतियों पर विचार करते हुए  FDI प्रवाह को प्रभावित करने वाले कारकों का व्यापक विश्लेषण करना चाहिये।

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