विटामिन B12 पर PRIYA ट्रायल | 09 Feb 2026

स्रोत: द हिंदू

पुणे रूरल इंटरवेंशन इन यंग एडोलेसेंट्स (Pune Rural Intervention in Young Adolescents- PRIYA) ट्रायल के फॉलो-अप निष्कर्ष बताते हैं कि किशोरावस्था में विटामिन B12 का सेवन एपिजेनेटिक तंत्रों के माध्यम से नवजात स्वास्थ्य में सुधार करता है।

  • वर्ष 2012 से 2020 के बीच पुणे मातृ पोषण अध्ययन (PMNS) के अंतर्गत आयोजित PRIYA परीक्षण में यह आकलन किया गया कि क्या किशोरों में विटामिन B12 का स्तर बढ़ाने से व्यापक रूप से कमी वाले समुदाय में अंतरपीढ़ी मेटाबोलिक जोखिम कम किया जा सकता है।
  • अध्ययन में पाया गया कि किशोरावस्था में विटामिन B12 का सेवन नवजात शिशुओं के पोंडरल इंडेक्स (वज़न के अनुपात में ऊँचाई) को महत्त्वपूर्ण रूप से सुधारता है, जो भ्रूण विकास और जीवन के प्रारंभिक पोषण संबंधी परिणामों में सुधार को दर्शाता है।
  • ये परिणाम नीति संबंधी सिफारिशों को मज़बूती देते हैं कि किशोरों और प्रजनन आयु की महिलाओं के लिये आयरन–फोलिक एसिड पूरक कार्यक्रमों में विटामिन B12 की शारीरिक खुराक शामिल की जाए, ताकि दीर्घकालिक जनसंख्या स्वास्थ्य और मानव पूंजी को मज़बूत किया जा सके।

विटामिन B12

  • विटामिन B12 (सियानोकोबालामिन) एक जल-घुलनशील विटामिन है जिसे मानव शरीर स्वयं संश्लेषित नहीं कर सकता, यह सूक्ष्मजीवों द्वारा निर्मित होता है और मुख्यतः पशु आधारित आहार से प्राप्त किया जाता है।
  • यह लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण, DNA संश्लेषण, मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के सही कार्य के लिये आवश्यक है।
  • भारत में विटामिन B12 की कमी अत्यधिक प्रचलित है, जिसका मुख्य कारण आहार में इसकी अपर्याप्त मात्रा का होना है।
    • इस कमी के कारण एनीमिया और न्यूरोलॉजिकल विकार हो सकते हैं, जो मुख्य रूप से अपर्याप्त पोषण के कारण होते हैं और कुछ मामलों में इंट्रिंसिक फैक्टर की कमी के कारण अवशोषण में बाधा के कारण भी हो सकते हैं।

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