प्रीलिम्स फैक्ट्स: 17 जुलाई, 2020 | 17 Jul 2020

ताड़ गुड़

Palm Jaggery

तमिलनाडु में थूथुकुडी (Thoothukudi) ज़िले के उदंगुड़ी (Udangudi) शहर से उत्पादित ताड़ गुड़ (Palm Jaggery) के लिये भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग हेतु हालिया आवेदन ने इस प्राचीन, प्राकृतिक मिठास से युक्त उत्पाद पर लोगों का ध्यान आकर्षित किया है जो कभी मलेशिया, सिंगापुर, श्रीलंका एवं ब्रिटेन को निर्यात किया जाता था।

Palm-Jaggery

प्रमुख बिंदु: 

  • सामान्य तौर पर ताड़ गुड़ (Palm Jaggery) का उपयोग दक्षिणी भारत में रसोई की सामग्री एवं आयुर्वेदिक दवाओं के एक घटक के रूप में किया जाता है।
  • उदंगुड़ी (Udangudi) शहर का यह ताड़ गुड़ जिसे स्थानीय रूप से उदंगुड़ी पनानगारूपट्टी (Udangudi Panangarupatti) के नाम से भी जाना जाता है, अपनी अनूठी आकृति का एक उत्पाद है।

उदंगुड़ी (Udangudi) की भौगोलिक विशेषता और ताड़ गुड़:

  • कम वर्षा होने के कारण इस क्षेत्र में लाल-टिब्बा रेत (Red-Dune Sand) में नमी कम होती है इसलिये पाल्मीरा वृक्षों (Palmyra Trees) का रस अधिक चिपचिपा होता है।
  • अन्य क्षेत्रों के विपरीत जहाँ किण्वन से बचाने के लिये मिट्टी के बर्तन में वृक्ष के रस को इकट्ठा करके औद्योगिक चूने का लेप किया जाता है वहीँ इस क्षेत्र में जल में घुलित सीशेल्स (Seashells) को लाइम एजेंट के रूप में उपयोग किया जाता है। इससे गुड़ को नमकीन स्वाद मिलता है।
  • थूथुकुडी (Thoothukudi) ज़िले में एक प्रमुख पेशे के रूप में पाल्मीरा (Palmyra) के जंगलों में ताड़ी एवं गैर-मादक ताड़ रस (पडनीर-Padaneer) बनाया जाता है। 

उदंगुड़ी (Udangudi):

Udangudi

  • उदंगुड़ी (Udangudi) दो शब्दों ‘उडाई’ (Udai) जिसका अर्थ है कांटेदार जलाने वाला वृक्ष (प्रोसोपिस जूलीफ्लोरा-Prosopis Juliflora) जो इस क्षेत्र में प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं तथा ‘कुड़ी’ (Kudi) जो एक गांव या एक मानव बस्ती को संदर्भित करता है, से मिलकर बना है।
  • तमिलनाडु का यह क्षेत्र कभी वेट्रिलाई (Vetrilai-सुपारी) और करुप्पत्ति (Karuppatti-ताड़ गुड़) के सर्वाधिक उत्पादन के लिये जाना जाता था। 

चितकबरा कोयल

Pied Cuckoo

हाल ही में कई एजेंसियों द्वारा शुरू की गई एक परियोजना में नैनो तकनीक का उपयोग किया जा रहा है ताकि चितकबरे कोयल (Pied Cuckoo) के प्रवास पैटर्न का अध्ययन किया जा सके।

Pied-Cuckoo

प्रमुख बिंदु: 

  • गौरतलब है कि इस पक्षी का प्रवास पैटर्न भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन से संबंधित  है।

परियोजना में शामिल संस्थान:

भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान

(Indian Institute of Remote Sensing- IIRS):

  • भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान (IIRS), भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग के राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र के अंतर्गत एक प्रमुख प्रशिक्षण एवं शिक्षण संस्थान है। 
  • इसे सुदूर संवेदन, भू-सूचना एवं प्राकृतिक संसाधनों तथा आपदा प्रबंधन हेतु GPS प्रौद्योगिकी में व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिये गठित किया गया है।
  • इसकी स्थापना वर्ष 1966 में की गई थी।  

चितकबरा कोयल (Pied Cuckoo):

  • मूल रूप से चितकबरे कोयल की तीन उप-प्रजातियाँ हैं जिनमें एक अफ्रीका का निवासी पक्षी है वहीँ दूसरा दक्षिण भारत का निवासी पक्षी है। जबकि तीसरा भारत एवं अफ्रीका के बीच विचरण करने वाला प्रवासी पक्षी है और यह गर्मियों के दौरान भारत में चला जाता है
  • एक छोटा, स्थलीय पक्षी होने के कारण इस कोयल के लिये समुद्र पार करना अधिक जोखिम वाला होता है। 
  • चितकबरा कोयल उत्तर भारतीय लोक कथाओं में 'चातक' (Chatak) पक्षी के रूप में प्रसिद्ध है जो केवल बारिश की बूंदों से अपनी प्यास बुझाता है।
  • प्रत्येक वर्ष प्रजनन के लिये यह दक्षिणी अफ्रीका से हिमालय की तलहटी (जम्मू से असम तक फैली) में आता है। ये पक्षी प्रत्येक वर्ष एक ही इलाके में आते हैं।
  • यह एक ब्रूड (Brood) परजीवी पक्षी है जो अपना घोंसला नहीं बनाता है बल्कि अन्य पक्षियों विशेष रूप से जंगल बब्बलर (Jungle Babbler) के घोंसले में अपना अंडा देता है।

जंगल बब्बलर (Jungle Babbler):

Jungle-Babbler

  • जंगल बब्बलर (अर्ग्या स्ट्रिअटा-Argya striata) भारतीय उपमहाद्वीप में पाए जाने वाले लियोथ्रीचिडे (Leiothrichidae) परिवार का सदस्य है।
  • ये पक्षी छह से दस पक्षियों के छोटे समूहों में दिखाई देते हैं जिसके कारण इन्हें उत्तरी भारत के शहरों में ‘सात बहन’ के नाम से भी जाना जाता है। जबकि बंगाली में इन्हें ‘सात भाई’ के स्थानीय नाम से जाना जाता है।
  • जंगल बब्बलर को IUCN की रेड लिस्ट में कम चिंताजनक (Least Concern) की श्रेणी में सूचीबद्ध किया गया है।   
  • इसे (चितकबरे कोयल) IUCN की रेड लिस्ट में कम चिंताजनक (Least Concern) की श्रेणी में सूचीबद्ध किया गया है। 

परियोजना:

  • चितकबरे कोयल के प्रवास पैटर्न से संबंधित अध्ययन भारतीय जैव संसाधन सूचना (Indian Bioresource Information- IBIN) नामक बड़ी परियोजना के अंतर्गत किया जा रहा है। जिसे केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Union Ministry of Science and Technology) के तहत प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा वित्त पोषित किया गया है।

उद्देश्य: 

  • इस परियोजना का उद्देश्य वेब पोर्टल के माध्यम से भारत के प्रासंगिक जैव संसाधन (पौधे, पशु एवं अन्य जैविक जीव) की जानकारी देना है।   

अन्य प्रमुख बिंदु: 

  • IBIN परियोजना में विभिन्न जैव विविधता एवं पर्यावरणीय पैरामीटर शामिल किये गए हैं जो परिवर्तित जलवायु परिदृश्यों में चितकबरे कोयले के संभावित वितरण पर अनुमानित जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का आकलन करने में मदद करेंगे।

निष्ठा

NISHTHA

हाल ही में केंद्रीय मानव संसाधन एवं विकास मंत्री (Union Human Resource and Development Minister) द्वारा आंध्र प्रदेश के 1200 ‘की रिसोर्सेज़ पर्सन’ (Key Resources Persons) के लिये पहला ऑन-लाइन निष्ठा (NISHTHA) कार्यक्रम शुरू किया गया है।

Nishtha

प्रमुख बिंदु:

  • यह समग्र शिक्षा (Samagra Shiksha) के तहत प्रारंभिक स्तर पर स्कूल प्रमुखों एवं शिक्षकों की समग्र उन्नति (National Initiative for School Heads’ and Teachers’ Holistic Advancement) के लिये एक राष्ट्रीय पहल है।
    • समग्र शिक्षा (Samagra Shiksha) सीखने के परिणामों में सुधार करने के लिये MHRD का एक फ्लैगशिप कार्यक्रम है।     
  • वर्ष 2019 में निष्ठा (NISHTHA) को फेस-टू-फेस मोड में लॉन्च किया गया था। इसके बाद 33 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों ने इस कार्यक्रम को अपने-अपने क्षेत्रों में समग्र शिक्षा (Samagra Shiksha) के तहत शुरू किया है।
    • NCERT द्वारा राज्य स्तर पर 29 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में निष्ठा (NISHTHA) प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरा किया गया है। 4 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों (मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर एवं बिहार) में राज्य स्तर पर प्रशिक्षण अभी भी जारी है। 

COVID-19 से उत्पन्न संकट:

  • COVID-19 महामारी के कारण अचानक लागू किये गए लॉकडाउन ने फेस-टू-फेस मोड में इस कार्यक्रम के संचालन को प्रभावित किया है। इसलिये शेष 24 लाख शिक्षकों एवं स्कूल प्रमुखों को प्रशिक्षण देने के लिये निष्ठा को NCERT द्वारा दीक्षा (DIKSHA) एवं निष्ठा (NISHTHA) पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन मोड के अनुकूलित किया गया है। 
  • आंध्र प्रदेश, देश का पहला राज्य है जिसके लिये निष्ठा (NISHTHA) पोर्टल के माध्यम से 1200 ‘की रिसोर्सेज़ पर्सन’ (Key Resources Persons) के लिये एक ऑन-लाइन निष्ठा (NISHTHA) कार्यक्रम शुरू किया गया है।
    • ये ‘की रिसोर्सेज़ पर्सन’ आंध्र प्रदेश के शिक्षकों का मार्गदर्शन करने में मदद करेंगे जो उस समय दीक्षा (DIKSHA) पर ऑन-लाइन निष्ठा प्रशिक्षण लेंगे।

संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक परिषद

United Nations Economic and Social Council

17 जुलाई, 2020 को भारतीय प्रधानमंत्री न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र संघ की आर्थिक एवं सामाजिक परिषद (Economic and Social Council- ECOSOC) के वार्षिक उच्च-स्तरीय खंड को आभासी रूप से संबोधित करेंगे।

थीम: 

  • इस वर्ष संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक परिषद के उच्च-स्तरीय खंड की थीम ‘COVID-19 के बाद बहुपक्षवाद: 75वीं वर्षगांठ पर हमें किस तरह के संयुक्त राष्ट्र की ज़रूरत है’ (Multilateralism after Covid19: What kind of UN do we need at the 75th anniversary) है।

प्रमुख बिंदु:

  • इसके वार्षिक उच्च-स्तरीय खंड में विभिन्न देशों की सरकारों के प्रतिनिधि, निजी क्षेत्र एवं सिविल सोसायटी के उच्चस्तरीय प्रतिनिधियों एवं शिक्षाविदों का एक विविध समूह शामिल होता है।
  • यह आयोजन विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यह पहला अवसर होगा जब भारतीय प्रधानमंत्री 17 जून, 2020 को सुरक्षा परिषद के गैर-स्थायी सदस्य (2021-22 के कार्यकाल के लिये) के रूप में भारत को निर्विरोध चुने जाने के बाद संयुक्त राष्ट्र की आर्थिक एवं सामाजिक परिषद को संबोधित करेंगे।
  • इससे पहले भारतीय प्रधानमंत्री ने जनवरी 2016 में ECOSOC की 70वीं वर्षगांठ पर संबोधित किया था।