भारत में व्यक्तित्व अधिकार | 02 Feb 2026

स्रोत: द हिंदू 

हाल ही में दिल्ली उच्च न्यायालय ने सलमान खान के व्यक्तित्व अधिकारों से जुड़े एक मामले में नोटिस जारी किया, जब एक विदेशी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) वॉइस-जनरेशन प्लेटफॉर्म ने उनके नाम, छवि और आवाज़ के अवैध उपयोग से बचाने वाले अंतरिम निषेधाज्ञा को हटाने का अनुरोध किया।

व्यक्तित्व अधिकार

  • परिचय: व्यक्तित्व अधिकार किसी व्यक्ति के सार्वजनिक व्यक्तित्व, जैसे– नाम, आवाज़, छवि और व्यवहार को उनके व्यापक गोपनीयता या संपत्ति अधिकार के हिस्से के रूप में सुरक्षित करते हैं। यह किसी के नाम, छवि या स्वरूप के वाणिज्यिक उपयोग पर नियंत्रण प्रदान करता है।
  • प्रकार:
    • प्रचार का अधिकार: किसी व्यक्ति की छवि और स्वरूप को अवैध वाणिज्यिक उपयोग से बचाना, जो ट्रेडमार्क अधिकारों के समान है।
    • गोपनीयता का अधिकार: किसी व्यक्ति की सहमति के बिना उसके व्यक्तित्व की सार्वजनिक प्रस्तुति से सुरक्षा करना।
  • संवैधानिक और कानूनी आधार:
    • अनुच्छेद 21: जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार, जिसमें गोपनीयता शामिल है (के.एस. पुट्टस्वामी मामला, 2017)
    • कॉपीराइट अधिनियम, 1957: यह लेखकों और कलाकारों को उनके कार्यों के विकृतीकरण या दुरुपयोग को रोकने के लिये नैतिक अधिकार प्रदान करता है।
    • ट्रेडमार्क अधिनियम, 1999: धारा 14 जीवित व्यक्ति या पिछले 20 वर्षों के भीतर दिवंगत व्यक्ति के साथ किसी प्रकार का झूठा संबंध दर्शाने वाले ट्रेडमार्क को, बिना उसकी सहमति के, प्रतिबंधित करती है।
    • सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000: धारा 66C में किसी अन्य व्यक्ति की इलेक्ट्रॉनिक पहचान या प्रत्यय पत्र के दुरुपयोग से जुड़ी पहचान की चोरी के लिये दंड का प्रावधान है।
  • प्रमुख निर्णय: ऐश्वर्या राय बच्चन मामले (2025) में दिल्ली उच्च न्यायालय ने उनकी बिना अनुमति की गई नकल, उनके नाम या छवि के दुरुपयोग तथा AI जनरेटेड मैनीपुलेटेड कंटेंट के प्रसार पर रोक लगाई।
    • न्यायालय व्यक्तित्व अधिकारों और व्यापार तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाते हैं, और किसी भी कलात्मक या व्यावसायिक उपयोग को केवल तब अनुमति देते हैं जब वह जनता को गुमराह न करे या किसी अनुमोदन का संकेत न दे। इसके अतिरिक्त, विदेशी संस्थाएँ भारत में अनुच्छेद 19 के अधिकारों का हवाला नहीं दे सकते

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