राष्ट्रीय मतदाता दिवस (NVD) 2026 | 28 Jan 2026

स्रोत: पी. आई. बी.

भारत के राष्ट्रपति ने 25 जनवरी को मनाए गए राष्ट्रीय मतदाता दिवस (NVD) समारोह की अध्यक्षता की, जिसका उद्देश्य लोकतंत्र का उत्सव मनाना और निर्वाचन प्रक्रिया में नागरिकों की भागीदारी को प्रोत्साहित करना है।

  • राष्ट्रीय मतदाता दिवस (NVD), भारत का निर्वाचन आयोग (ECI) की स्थापना को चिह्नित करता है, जिसकी स्थापना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत 25 जनवरी, 1950 को की गई थी।

राष्ट्रीय मतदाता दिवस (NVD) 2026 के प्रमुख बिंदु क्या हैं?

  • थीम: राष्ट्रीय मतदाता दिवस 2026 की थीम “मेरा भारत, मेरा वोट” है, जिसका टैगलाइन “भारतीय लोकतंत्र के केंद्र में नागरिक” है।
    • यह मतदाता सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए नागरिक-केंद्रित निर्वाचन प्रक्रियाएँ विकसित करने की दिशा में भारत के निर्वाचन आयोग (ECI) के प्रयासों का प्रतीक है।
  • विशेषताएँ: यह लोकतंत्र में मतदाता भागीदारी के महत्त्व को रेखांकित करता है। भारत का निर्वाचन आयोग (ECI) के नेतृत्व में देशव्यापी समारोहों और जनसंपर्क गतिविधियों के माध्यम से, विशेष रूप से नए और युवा मतदाताओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए, मतदाता पंजीकरण तथा जागरूकता को बढ़ावा देता है।
  • शुरू की गई पहलें:
    • 2026 के सर्वश्रेष्ठ निर्वाचन ज़िला पुरस्कार: राष्ट्रपति ने सर्वश्रेष्ठ निर्वाचन प्रथाएँ पुरस्कार प्रदान किये, जिनमें प्रौद्योगिकी के उपयोग, चुनाव प्रबंधन, मतदाता जागरूकता, आदर्श आचार संहिता के प्रवर्तन और प्रशिक्षण में उत्कृष्टता के लिये बिहार, केरल, तमिलनाडु, ओडिशा, गुजरात, मेघालय, मिज़ोरम, उत्तर प्रदेश, झारखंड और दिल्ली जैसे राज्यों को सम्मानित किया गया।
    • प्रकाशन: राष्ट्रीय मतदाता दिवस 2026 के अवसर पर “2025: ए ईयर ऑफ इनिशिएटिव्स एंड इनोवेशन्स” और “चुनाव का पर्व, बिहार का गर्व” नामक प्रकाशनों का विमोचन किया गया, जो निर्वाचन प्रबंधन में भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) के नेतृत्व को प्रदर्शित करते हैं।

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ECI द्वारा शुरू किये गए प्रमुख चुनावी सुधार क्या हैं?

  • मतदाताओं के लिये फोटो पहचान-पत्र (1993): भारत का निर्वाचन आयोग (ECI) ने मतदाताओं के प्रतिरूपण और फर्जी मतदान को रोकने के लिये मतदाता फोटो पहचान-पत्र (EPIC) योजना की शुरुआत की। प्रारंभ में यह एक भौतिक कार्ड के रूप में था, जिसे वर्ष 2004 में फोटो युक्त निर्वाचन नामावली (PER) को शामिल करते हुए और विकसित किया गया।
    • वर्ष 2021 में e-EPIC की शुरुआत की गई, जिससे मतदाता अपने पहचान-पत्र का सुरक्षित और गैर-संपादन योग्य डिजिटल संस्करण डाउनलोड कर सकते हैं, जिसे मोबाइल उपकरणों पर आसानी से ले जाना तथा उपयोग करना संभव हो गया।
  • इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें (EVMs) (1998): पहली बार वर्ष 1982 में केरल में प्रायोगिक रूप से उपयोग की गईं। इसके बाद वर्ष 1998 में मध्य प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली के राज्य विधानसभा चुनावों में इन्हें व्यापक स्तर पर औपचारिक रूप से लागू किया गया।
    • इससे अमान्य मतों (जो कागज़ी मतपत्रों में एक सामान्य समस्या थी) की समस्या समाप्त हुई, मतगणना में लगने वाला समय दिनों से घटकर घंटों में आ गया और कागज़ की बचत होने से यह प्रक्रिया पर्यावरण के अनुकूल भी सिद्ध हुई।
  • व्यवस्थित मतदाता शिक्षा और निर्वाचन सहभागिता (SVEEP) (2009): यह भारत का निर्वाचन आयोग (ECI) का प्रमुख कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य शहरी उदासीनता तथा युवाओं की कम भागीदारी जैसी चुनौतियों को दूर करते हुए “भागीदारी अंतर” को कम करना है।
    • यह कार्यक्रम लक्षित हस्तक्षेपों (जैसे- नुक्कड़ नाटक, सोशल मीडिया और कैंपस एंबेसडर) का उपयोग करता है, ताकि “कोई भी मतदाता पीछे न छूटे” सुनिश्चित किया जा सके।
  • मतदाता सत्यापन योग्य पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) (2013): वर्ष 2013 में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश (सुब्रमण्यम स्वामी बनाम भारतीय निर्वाचन आयोग) के बाद EVM में सत्यापन की एक अतिरिक्त परत जोड़ने के लिये VVPAT की शुरुआत की गई।
    • VVPAT मतदाताओं को उनके मत को एक काँच की खिड़की के माध्यम से सात सेकंड के लिये दिखाई देने वाले प्रिंटेड पर्चे के माध्यम से सत्यापित करने की अनुमति देता है।
  • राष्ट्रीय चुनावी रोल शुद्धिकरण और प्रमाणीकरण कार्यक्रम (NERPAP) (2015): इस कार्यक्रम ने चुनावी अधिकारियों को घर-घर जाकर सत्यापन अभियान करने की अनुमति दी।
    • इसका उद्देश्य EPIC डेटा को आधार से जोड़ना था ताकि विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में डुप्लीकेट या एकाधिक प्रविष्टियों की पहचान की जा सके और उन्हें हटाकर एक त्रुटिरहित और प्रमाणीकरण युक्त मतदाता सूची तैयार की जा सके।
  • ERO-NET (2018): यह चुनाव अधिकारियों के लिये एक डिजिटल फॉर्म-प्रोसेसिंग प्रणाली है, जो 14 भाषाओं और 11 लिपियों में उपलब्ध है। यह मतदाताओं को उनके आवेदन की स्थिति ट्रैक करने में मदद करती है तथा फॉर्म के रियल-टाइम प्रोसेसिंग की सुविधा देती है ताकि दोहरे पंजीकरण को रोका जा सके।
  • दिव्यांग व्यक्तियों के लिये सुलभ चुनाव (2018): भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने वर्ष 2018 को “सुलभ चुनाव वर्ष” घोषित किया।
    • दृष्टिबाधित मतदाताओं को ब्रेल-सक्षम मतदाता फोटो पहचान-पत्र (EPIC) उपलब्ध कराए गए, यात्रा दूरी घटाने हेतु सहायक मतदान केंद्र स्थापित किये गए तथा दिव्यांग मतदाताओं (PwDs) के लिये मतदान केंद्रों तक निशुल्क परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई गई।
  • cVIGIL ऐप (2018): यह मोबाइल ऐप नागरिकों को “चुनाव पर्यवेक्षक” की भूमिका निभाने में सक्षम बनाता है।
    • नागरिक आचार संहिता उल्लंघन (जैसे घृणास्पद भाषण या रिश्वत वितरण) की फोटो या वीडियो अपलोड कर सकते हैं। यह ऐप जियो-टैगिंग तकनीक से घटना का स्थान स्वतः चिह्नित करता है।
    • निर्वाचन आयोग ने निर्देश दिया है कि प्राधिकरणों को cVIGIL शिकायतों की जाँच और कार्रवाई 100 मिनट के भीतर करनी होगी।
  • विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) (2025): यह एक व्यापक मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान है, जिसे निर्वाचन आयोग ने यह सुनिश्चित करने के लिये शुरू किया कि कोई पात्र नागरिक वंचित न रहे और कोई अपात्र व्यक्ति शामिल न हो।
    • SIR ने 12 राज्यों/केंद्र-शासित प्रदेशों में 51 करोड़ से अधिक मतदाताओं को कवर किया, जिसमें मृत मतदाताओं और दोहराव वाली प्रविष्टियों को हटाने पर विशेष ध्यान दिया गया।
  • ECINET (2026): यह निर्वाचन आयोग द्वारा शुरू किया गया एक उपयोगकर्त्ता-अनुकूल डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो मतदाताओं, निर्वाचन अधिकारियों, राजनीतिक दलों और नागरिक समाज के लिये बनाया गया है। 40 से अधिक मौजूदा मोबाइल और वेब अनुप्रयोगों को इस प्लेटफॉर्म पर शामिल कर एक ही “वन-स्टॉप” इंटरफेस बनाया जाएगा।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: भारत ने द्विपक्षीय सहयोग को मज़बूत करते हुए “इंडिया इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट (IICDEM) 2026” का आयोजन नई दिल्ली में किया, जिसके परिणामस्वरूप “दिल्ली घोषणा 2026” अपनाई गई।
    • यह घोषणा पाँच स्तंभों को रेखांकित करती है - स्वच्छ मतदाता सूचियाँ, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव, अनुसंधान तथा प्रकाशन, प्रौद्योगिकी का उपयोग (भारत के ईसीआईनेट प्लेटफॉर्म को साझा करना सहित) एवं आईआईआईडीईएम के माध्यम से प्रशिक्षण व क्षमता निर्माण - ताकि वैश्विक चुनावी सत्यनिष्ठा और लोकतांत्रिक नवाचार को आगे बढ़ाया जा सके।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. राष्ट्रीय मतदाता दिवस क्या है और इसे क्यों मनाया जाता है?
राष्ट्रीय मतदाता दिवस प्रतिवर्ष 25 जनवरी को भारत निर्वाचन आयोग की स्थापना के उपलक्ष्य में और मतदाता जागरूकता, पंजीकरण तथा चुनावों में भागीदारी को बढ़ावा देने के लिये मनाया जाता है।

2. राष्ट्रीय मतदाता दिवस 2026 की थीम क्या है?
राष्ट्रीय मतदाता दिवस 2026 की थीम "मेरा भारत, मेरा वोट" है, जिसका टैगलाइन "नागरिक भारतीय लोकतंत्र के केंद्र में" था। इसके माध्यम से मतदाता-केंद्रित चुनावी सुधारों पर प्रकाश डाला गया।

3. ECINET क्या है और यह क्यों महत्त्वपूर्ण है?
ECINET एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो 40 से अधिक ECI अनुप्रयोगों को एक इंटरफेस में समेकित करता है। यह सभी चुनावी हितधारकों के लिये पहुँच, पारदर्शिता और दक्षता में सुधार करता है।

4. cVIGIL चुनावी सत्यनिष्ठा को कैसे मज़बूत करता है?
cVIGIL ऐप नागरिकों को आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन की रिपोर्ट वास्तविक समय में करने में सक्षम बनाता है, जिसका अनुपालन 100 मिनट की अनिवार्य प्रतिक्रिया समय के साथ किया जाता है। यह प्रवर्तन और जवाबदेही को बढ़ाता है।

5. दिल्ली घोषणा 2026 का क्या महत्त्व है?
यह घोषणा IICDEM 2026 में अपनाई गई, जो स्वच्छ मतदाता सूची, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव, अनुसंधान, प्रौद्योगिकी उपयोग और क्षमता निर्माण – इन पाँच स्तंभों के माध्यम से वैश्विक लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को सुदृढ़ करने का रोडमैप प्रस्तुत करती है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न

प्रिलिम्स:

प्रश्न.1 निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2017)

  1. भारत का निर्वाचन आयोग पाँच-सदस्यीय निकाय है।
  2. केंद्रीय गृह मंत्रालय, आम चुनाव और उप-चुनाव दोनों के लिये चुनाव कार्यक्रम तय करता है।
  3. निर्वाचन आयोग मान्यता-प्राप्त राजनीतिक दलों के विभाजन/विलय से संबंधित विवादों को हल करता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा सही है/हैं?

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 2

(c) केवल 2 और 3

(d) केवल 3

उत्तर: (d)


मेंस:

प्रश्न 1 भारत में लोकतंत्र की गुणवत्ता बढ़ाने के लिये भारत निर्वाचन आयोग ने वर्ष 2016 में चुनावी सुधारों का प्रस्ताव दिया है। सुझाए गए सुधार क्या हैं और लोकतंत्र को सफल बनाने में वे किस सीमा तक महत्त्वपूर्ण हैं? (2017)