राष्ट्रीय कुष्ठ रोग दिवस | 02 Feb 2026
राष्ट्रीय कुष्ठ रोग दिवस (जनवरी का अंतिम रविवार) पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने कुष्ठ रोग से संबंधित जागरूकता, प्रारंभिक पहचान और कलंक में कमी को बढ़ावा देने के लिये एक सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) दृष्टिकोण कार्यक्रम आयोजित किया।
कुष्ठ रोग
- परिचय: यह माइकोबैक्टीरियम लेप्री (जीवाणु) के कारण होने वाला एक पुराना संक्रामक रोग है, जो त्वचा और नसों को प्रभावित करता है, यह बिना उपचार वाले रोगियों के शरीर से निकलने वाली बूँदों के माध्यम से फैलता है, हालाँकि विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निशुल्क प्रदान की जाने वाली बहु-औषधि चिकित्सा (MDT) से इसका पूर्ण उपचार संभव है।
- भारत ने वर्ष 2005 में राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन स्थिति (प्रसार दर <1/10,000) हासिल की और इसे बनाए रखा। वर्ष 2025 तक राष्ट्रीय स्तर पर प्रसार दर 0.57 है।
- मुख्य लक्षण: संवेदी हानि के साथ लाल त्वचा के धब्बे, मोटी नसें और परिणामस्वरूप सुन्नता जो अल्सर, माँसपेशियों की कमज़ोरी और पक्षाघात (जैसे– क्लॉ-हैंड, फुट-ड्रॉप) का कारण बन सकती है।
- उन्नत मामलों में चेहरे पर गाँठ, नकसीर और भौंहों के झड़ने जैसी विकृतियाँ देखी जा सकती हैं।
- भारत के कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम का विकास: भारत ने वर्ष 1983 में राष्ट्रीय कुष्ठ नियंत्रण कार्यक्रम (NLCP, 1954-55) से राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम (NLEP) में संक्रमण किया, जो वर्ष 2005 में राष्ट्रीय उन्मूलन हासिल करने में महत्त्वपूर्ण था।
- वर्तमान रणनीति: राष्ट्रीय रणनीतिक योजना (NSP) 2023-27 वैश्विक कुष्ठ रणनीति 2021-30 और WHO उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग रोडमैप के साथ समन्वित है।
- इसका लक्ष्य वर्ष 2030 तक कुष्ठ रोग संचरण को समाप्त करना और कोविड-19 महामारी से उबरना है, जिसमें वर्ष 2027 तक संचरण को रोकने के लिये विशिष्ट हस्तक्षेप और एक रोडमैप निर्धारित किया गया है।
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